500 परिवारों पर टूटा संकट, सांसद जोबा मांझी ने दी चेतावनी—‘न्याय नहीं तो खदान बंद’
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
लौह नगरी गुवा इन दिनों विकास बनाम विस्थापन की जंग का केंद्र बन चुकी है। एक ओर सेल, गुवा प्रबंधन अपने विस्तार और परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर सदियों से बसे सैकड़ों परिवार अपने अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं।
करीब 500 परिवारों पर विस्थापन की तलवार लटक रही है, और इसी दर्द को समझने के लिए सांसद जोबा मांझी और जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सोरेन गुवा पहुंचीं। यहां पहुंचते ही उन्हें विस्थापितों का भारी समर्थन और भावनात्मक स्वागत मिला—लेकिन इसके पीछे छिपा था गुस्सा, दर्द और न्याय की पुकार।

“हम घर नहीं छोड़ेंगे”—सैकड़ों परिवारों का ऐलान
रामनगर से जाटा हीटिंग तक फैली विस्थापन की मार
गुवा के रामनगर/ढीपा साईं, नानक नगर, पुट साइडिंग, जाटा हीटिंग, डीवीसी जैसे इलाकों में रहने वाले लोग आज भय और असुरक्षा के साये में जी रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि:
* सेल प्रबंधन ने अब तक केवल 184 घर बनाए हैं
* जबकि विस्थापित होने वाले परिवारों की संख्या करीब 500 है
यानी साफ है—300 से अधिक परिवारों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
लोगों का सीधा सवाल है:
👉 “जब घर ही नहीं है, तो हमें कहां बसाया जाएगा?”

गायब हो गया सर्वे! आखिर किसके इशारे पर?
2016-18 का रिकॉर्ड रहस्यमय तरीके से लापता
विस्थापितों ने एक और गंभीर आरोप लगाया—
सेल प्रबंधन द्वारा 2016 और 2018 में किए गए सर्वे का पूरा रिकॉर्ड गायब है।
इन सर्वे में:
* सभी घरों की सूची तैयार की गई थी
* तस्वीरें ली गई थीं
* परिवारों का पूरा डाटा मौजूद था
लेकिन अब वही रिकॉर्ड “गायब” हो चुका है।
यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करता है, ताकि सैकड़ों परिवारों को उनके अधिकार से वंचित किया जा सके।
उपायुक्त का आदेश भी बेअसर?
“जिसे घर मिला है, उसी का घर तोड़ो”—पर जमीनी हकीकत अलग
उपायुक्त द्वारा स्पष्ट आदेश दिया गया था कि: 👉 जिन्हें नया घर आवंटित हो चुका है, केवल उन्हीं के पुराने घर तोड़े जाएं
लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।
विस्थापितों ने बताया कि:
* लगभग 150 लोगों की सूची उपायुक्त को सौंपी गई है
* 70 और नाम जोड़े जाने बाकी हैं
फिर भी, बिना पूरी सूची के ही तोड़फोड़ की तैयारी की जा रही है।

28 मार्च: जब बुलडोजर के सामने खड़ा हो गया जनसैलाब
ढीपा साईं में टकराव, विरोध के आगे झुकी कंपनी
28 मार्च का दिन गुवा के इतिहास में दर्ज हो चुका है।
सेल प्रबंधन पूरी टीम के साथ ढीपा साईं में घर तोड़ने पहुंचा।
लेकिन यहां जो हुआ, उसने सबको चौंका दिया:
* सैकड़ों लोग एकजुट हो गए
* महिलाओं और बच्चों ने भी मोर्चा संभाला
* जोरदार विरोध के चलते तोड़फोड़ की कार्रवाई रोकनी पड़ी
यह सिर्फ विरोध नहीं था—यह अपने अस्तित्व की लड़ाई थी।
“एक कमरे में कैसे जिएंगे?”—पुनर्वास पर बड़ा सवाल
न घर पर्याप्त, न पानी, न बिजली
सेल द्वारा बनाए गए घरों को लेकर भी भारी असंतोष है।
विस्थापितों का कहना है:
* एक घर में सिर्फ एक कमरा दिया जा रहा है
* जबकि एक परिवार में 2-4 बेटे और उनके परिवार रहते हैं
यानी: 👉 एक छोटे कमरे में पूरा परिवार समा ही नहीं सकता
इतना ही नहीं:
* पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं
* बिजली नहीं दी गई, उल्टा 500 रुपये जमा करने को कहा जा रहा है
लोगों का दर्द साफ झलकता है: 👉 “इससे अच्छा तो सरकार का आबुआ आवास है”
विस्थापितों की साफ मांग: “सम्मानजनक पुनर्वास चाहिए”
सुविधाओं के बिना घर नहीं, यह हमारा अधिकार है
विस्थापितों ने अपनी मांगों को स्पष्ट शब्दों में रखा:
* हर परिवार को 1 कमरा + 1 हाल + 1 किचन
* शौचालय और बाथरूम
* सामुदायिक भवन
* बच्चों के लिए स्कूल और बस सुविधा
* मंदिर और सामाजिक स्थल
* बिजली, पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था
साथ ही सबसे महत्वपूर्ण मांग: 👉 फिर से ग्राम सभा हो और सभी प्रस्ताव पास किए जाएं
लोगों ने साफ कहा:
“हम कंपनी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अन्यायपूर्ण विस्थापन नहीं सहेंगे।”
सांसद जोबा मांझी का सीधा ऐलान: “अन्याय हुआ तो खदान बंद”
“हजार लोगों को नहीं संभाल सकते तो खदान चलाने का हक नहीं”
सांसद जोबा मांझी ने विस्थापितों के बीच खड़े होकर बेहद आक्रामक रुख अपनाया।
उन्होंने कहा:
* “यह लड़ाई यहीं खत्म नहीं होगी”
* “आपके साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा”
* “अगर जबरन हटाने की कोशिश हुई तो लाखों लोग यहां जुटेंगे”
सबसे बड़ी चेतावनी: 👉 “सम्मानजनक समझौता नहीं हुआ तो सेल से एक टुकड़ा लोहा भी बाहर नहीं जाएगा”
यह बयान सीधे-सीधे कंपनी और प्रशासन दोनों के लिए चेतावनी है।

“बात से नहीं माने तो लात से मनवाएंगे”
सोनाराम देवगम का तीखा हमला
JMM जिलाध्यक्ष सोनाराम देवगम ने भी बेहद सख्त रुख अपनाया।
उन्होंने कहा:
* “शोषण और मनमानी बर्दाश्त नहीं करेंगे”
* “घर के बदले सभी सुविधाओं वाला घर मिलना चाहिए”
उनका बयान: 👉 “जो बात से नहीं मानेगा, उससे लात मारकर मनवाया जाएगा”
यह बयान इस संघर्ष की गंभीरता और उबाल को दर्शाता है।
लक्ष्मी सोरेन का सवाल: “पहले बसाया, अब उजाड़ क्यों?”
पूर्वजों के साथ हुए वादे का क्या हुआ?
जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सोरेन ने भी कंपनी पर सवाल उठाए:
* “पहले आपके पूर्वजों को यहां बसाया गया”
* “उनसे काम कराया गया”
* “अब उनके वंशजों को बेदखल किया जा रहा है”
उन्होंने इसे अन्याय और विश्वासघात करार दिया।
“सेल को ऊंचाई देने वालों को ही बेदखल?”
राहुल आदित्य का बड़ा सवाल
JMM नेता राहुल आदित्य ने कहा: 👉 “जिन लोगों ने सेल को मजबूती दी, उन्हीं को आज उजाड़ा जा रहा है”
उन्होंने साफ किया:
* “मनमानी नहीं चलेगी”
* “जनता के अधिकारों से समझौता नहीं होगा”
जनसमर्थन के साथ बढ़ता आंदोलन
सैकड़ों लोग बने गवाह
इस मौके पर सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से:
* अभिषेक सिंकु
* बुधराम लागुरी
* दुर्गा देवगम
* चांदमनी लागुरी
* मोहम्मद तबारक
* लागुड़ा देवगम
* देवकी कुमारी
* रोहित सिंह
* विनय प्रसाद
* भादो टोप्पो
* धर्मु रजक
* बामिया माझी
आदि शामिल थे।

विकास या विनाश? फैसला अब होना है
गुवा में जो हो रहा है, वह सिर्फ विस्थापन नहीं—
यह अधिकार बनाम सत्ता की लड़ाई है।
एक तरफ कंपनी है, जिसके पास संसाधन और ताकत है।
दूसरी तरफ आम लोग हैं, जिनके पास सिर्फ अपना घर और अपनी जमीन है।
अब सवाल यह है:
क्या विकास के नाम पर लोगों को उजाड़ा जाएगा?
या फिर उन्हें उनका हक और सम्मान मिलेगा?
गुवा की धरती पर उठ रही आवाज साफ है:
👉 “विकास चाहिए, लेकिन सम्मान के साथ… उजाड़कर नहीं!”














