15 अप्रैल से भूख हड़ताल, 20 अप्रैल से अनिश्चितकालीन चक्का जाम का ऐलान
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
सारंडा क्षेत्र में अब रोजगार का मुद्दा बड़ा जनआंदोलन बनता जा रहा है। सारंडा पीढ़ के मानकी और मुंडाओं के नेतृत्व में ग्रामीणों के साथ बेरोजगार युवक-युवतियां गुवा सेल प्रबंधन के खिलाफ निर्णायक संघर्ष छेड़ने की तैयारी में हैं।
रोजगार की मांग को लेकर लंबे समय से आवाज उठा रहे इन युवाओं ने अब 72 घंटे की भूख हड़ताल और उसके बाद अनिश्चितकालीन चक्का जाम करने का ऐलान किया है।

नेतृत्व में पारंपरिक व्यवस्था, जुड़ा जनसमर्थन
इस आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे सारंडा की पारंपरिक आदिवासी व्यवस्था—मानकी और मुंडाओं—का खुला नेतृत्व और समर्थन मिल रहा है। उनके नेतृत्व में न सिर्फ बेरोजगार युवक-युवतियां, बल्कि प्रभावित गांवों के ग्रामीण भी आंदोलन में शामिल होंगे।
यह संघर्ष अब व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक अधिकारों की लड़ाई बन चुका है।
दो ज्ञापन, फिर भी नहीं मिला जवाब
13 फरवरी 2026 को पहली बार धरना-प्रदर्शन के जरिए रोजगार की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था। इसके बाद 27 फरवरी को गुवा सेल जनरल ऑफिस के सामने ‘कटोरा-थाली’ बजाकर चार घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया गया और पुनः मांग पत्र सौंपा गया।
इसके बावजूद 39 दिन बीत जाने के बाद भी सेल प्रबंधन की ओर से न कोई लिखित जवाब मिला और न ही ग्राम सभा की बैठक बुलाई गई।
स्थानीय युवाओं का आरोप: “हमारे अधिकारों की अनदेखी”
आंदोलनरत युवाओं का कहना है कि खदान से सीधे प्रभावित होने के बावजूद स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार नहीं दिया जा रहा है। बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे स्थानीय युवाओं में गहरा असंतोष है।
पेसा कानून उल्लंघन का भी उठा मुद्दा
मानकी और मुंडाओं द्वारा हस्ताक्षरित आवेदन के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर इसे पेसा कानून का उल्लंघन बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम सभा की अनदेखी कर लिया गया हर फैसला गैरकानूनी है।
खनन प्रदूषण से बर्बाद जिंदगी, रोजगार बना सहारा
ग्रामीणों और युवाओं ने बताया कि खदान से निकलने वाले मलबे और प्रदूषण ने उनकी जीवनशैली पूरी तरह बदल दी है:
* खेती योग्य जमीन बंजर हो चुकी है
* नदी-नाले और झरने प्रदूषित हो गए हैं
* पशु-पक्षियों और इंसानों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है
ऐसे में रोजगार ही उनके जीवन का एकमात्र सहारा बचा है।
ग्राम सभा में लिए गए अहम फैसले
7 अप्रैल 2026 को ग्राम कसियापेचा में आयोजित ग्राम सभा की बैठक में सर्वसम्मति से आंदोलन का निर्णय लिया गया।
🔴 प्रस्ताव संख्या (1): 72 घंटे की भूख हड़ताल
15 अप्रैल से 17 अप्रैल 2026 तक गुवा सेल जनरल ऑफिस के सामने 72 घंटे की भूख हड़ताल की जाएगी।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कहा है कि इस दौरान किसी भी प्रकार की अनहोनी की जिम्मेदारी सेल प्रबंधन की होगी।
🔴 प्रस्ताव संख्या (2): अनिश्चितकालीन चक्का जाम
यदि भूख हड़ताल के बावजूद भी रोजगार को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 20 अप्रैल 2026, सोमवार सुबह 6 बजे से गुवा सेल खदान के डिस्पैच, क्रेशर प्लांट और डंपिंग कार्य को अनिश्चितकालीन रूप से ठप कर दिया जाएगा।
इन मानकी-मुंडाओं ने किया हस्ताक्षर
इस आंदोलन के समर्थन में सारंडा क्षेत्र के कई मानकी और मुंडाओं ने हस्ताक्षर कर पत्र सेल प्रबंधन और प्रशासन को सौंपा है। प्रमुख नामों में शामिल हैं:
मानकी सुरेश चांपिया
मुंडा कानूराम देवगम
मुंडा जामदेव चांपिया
मुंडा सिंगा सुरीन
मुंडा मंगल पूर्ति
मुंडा मंचुरिया सिद्धू
मुंडा चिंतामणि चांपिया
मुंडा बिरसा सुरीन
निर्णायक मोड़ पर संघर्ष
सारंडा में यह आंदोलन अब एक बड़े टकराव की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। मानकी-मुंडाओं के नेतृत्व और ग्रामीणों के समर्थन ने इसे और अधिक मजबूत बना दिया है।
15 अप्रैल से शुरू होगी निर्णायक लड़ाई
अब सभी की निगाहें 15 अप्रैल पर टिकी हैं, जब 500 बेरोजगार युवक-युवतियां भूख हड़ताल पर बैठेंगे। यदि इसके बाद भी समाधान नहीं निकला, तो 20 अप्रैल से शुरू होने वाला चक्का जाम गुवा की खदान गतिविधियों को पूरी तरह प्रभावित कर सकता है।
मुख्य मांग: स्थानीयों को रोजगार, सम्मान के साथ अधिकार
आंदोलनकारियों की साफ मांग है:
500 स्थायी बेरोजगार युवक-युवतियों को रोजगार
ग्राम सभा के साथ बैठकर लिखित समझौता
पारदर्शी और स्थायी रोजगार नीति
सारंडा में अब यह सिर्फ रोजगार का मुद्दा नहीं, बल्कि हक, अस्तित्व और स्वाभिमान की निर्णायक लड़ाई बन चुकी है।













