रांची से पहुंची विशेष टीम, माता-पिता लापता—सरेंडर की कहानी पर संदेह बरकरार
✍️ रिपोर्ट: शैलेश सिंह
मुगदी होनहागा बनी जांच का केंद्र
सारंडा की होलोंगउली गांव की युवती मुगदी होनहागा के ओड़िशा के राउरकेला पुलिस के सामने कथित नक्सली सरेंडर मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची से 5-6 सदस्यीय विशेष जांच टीम 4 अप्रैल को छोटानागरा थाना पहुंची, जहां पूरे घटनाक्रम की परतें खोलने की कोशिश की गई।

रांची से आई टीम, महिला अधिकारी भी शामिल
सूत्रों के अनुसार—
👉 विशेष जांच टीम में 5-6 सदस्य शामिल थे
👉 टीम में एक महिला अधिकारी की भी मौजूदगी रही
👉 छोटानागरा थाना में थाना प्रभारी सैनिक समद की मौजूदगी में पूछताछ हुई
यह जांच इस बात का संकेत है कि मामला अब केवल स्थानीय नहीं, बल्कि उच्च स्तर पर संज्ञान में आ चुका है।
ग्रामीणों से पूछताछ, लेकिन परिवार गायब
जांच टीम ने—
👉 होलोंगउली गांव के मुंडा सोमा होनहागा 👉 सारंडा पीढ़ के मानकी लागुड़ा देवगम
👉 और कुछ अन्य ग्रामीणों को थाना बुलाकर पूछताछ की
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
❗ इस अहम जांच के दौरान मुगदी के माता-पिता मौजूद ही नहीं थे।
3 अप्रैल से लापता माता-पिता, बढ़ी रहस्य की परत
ग्रामीण सूत्रों का दावा है कि—
👉 मुगदी के पिता मंगल होनहागा और मां मंजिली होनहागा
👉 3 मार्च से ही अपने गांव से गायब हैं
उनके बारे में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि—
👉 वे राउरकेला या मनोहरपुर क्षेत्र में हो सकते हैं
👉 लेकिन उनकी सही लोकेशन किसी को नहीं पता
यह घटनाक्रम पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध और संवेदनशील बना रहा है।
“नक्सली नहीं थी मुगदी” – ग्रामीण सूत्रों का दावा
ग्रामीण सूत्रों ने बताया कि—
👉 मुगदी होनहागा अपनी बहन के पास मारांगपोंगा में रह रही थी
👉 वह कभी नक्सली संगठन से नहीं जुड़ी थी
👉 छोटानागरा या झारखंड के किसी भी थाना में उसके खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं था
यह बयान उस “सरेंडर” की पूरी कहानी पर सवाल खड़ा करता है जिसे अब तक उपलब्धि बताया जा रहा है।
6 मार्च को आखिरी बार देखी गई
सूत्रों के अनुसार—
👉 मुगदी को 6 मार्च को एक स्थानीय व्यक्ति के साथ कहीं जाते देखा गया था
👉 इसके बाद उसका कोई स्पष्ट सुराग सामने नहीं आया
यह तथ्य इस मामले को “गायब होने” और “फर्जी सरेंडर” के बीच झूलता हुआ दिखा रहा है।
“मेरी बेटी नक्सली नहीं, उसे फंसाया गया”
पिता मंगल होनहागा ने बीते दिनों आरोप लगाया था कि—
👉 उनकी बेटी कभी नक्सली संगठन से जुड़ी ही नहीं थी
👉 वह घर और परिवार के बीच ही रहती थी
👉 किसी भी नक्सली घटना या गतिविधि में उसकी कोई भूमिका नहीं रही
उनका सवाल सीधा था—
“जब मेरी बेटी घर से बाहर ही नहीं जाती थी, तो उसे नक्सली कैसे बना दिया गया?”
वीडियो में मुगदी ने कबूला था—”मैं नक्सली संगठन से जुड़ी थी”
ओड़िशा पुलिस द्वारा जारी वीडियो में मुगदी होनहागा ने अपनी “हो” भाषा में साफ तौर पर स्वीकार किया था कि वह पिछले एक वर्ष से अधिक समय से नक्सली संगठन से जुड़ी हुई थी।
मुगदी ने अपने बयान में बताया कि वह जलवे उर्फ बिरसा, मुनिराम और सुनीता के साथ विभिन्न स्थानों पर जाती रही और कई बैठकों में शामिल होती रही। उसने यह भी कहा था कि वह सुशांत उर्फ अनमोल दा, जयकांत उर्फ गूंगा जैसे कुख्यात नक्सलियों के साथ सक्रिय रूप से घूमती रही।
21 जनवरी मुठभेड़ का जिक्र—”हम खाना खा रहे थे, तभी पुलिस आ गई”
मुगदी ने 21 जनवरी 2026 की उस बड़ी मुठभेड़ का भी जिक्र किया, जिसमें अनमोल दा सहित 17 नक्सली मारे गए थे।
उसने बताया—
“हम कुमडीह-होंजोरदिरी के बीच जंगल में खाना खा रहे थे और बैठक चल रही थी, तभी अचानक पुलिस पहुंची और फायरिंग शुरू हो गई। कई लोग मौके पर ही मारे गए और हम सात लोग वहां से भाग निकले।”
मुगदी के अनुसार, इस घटना के बाद वह मानसिक रूप से टूट गई थी और अपने साथियों के साथ घर लौट आई।
सरेंडर या साजिश?
अब इस पूरे घटनाक्रम में कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं—
❓ क्या मुगदी को बहला-फुसलाकर ले जाया गया?
❓ क्या उसे जबरन “नक्सली” घोषित कर सरेंडर कराया गया?
❓ क्या इस पूरे मामले में बिचौलियों की भूमिका है?
झारखंड-ओड़िशा सीमा पर चर्चा तेज
यह मामला अब केवल एक गांव या थाना तक सीमित नहीं रहा—
👉 पूरे सारंडा क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है
👉 झारखंड-ओड़िशा सीमावर्ती इलाकों में भी इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं
लोगों के बीच यह सवाल गूंज रहा है—
“क्या यह वाकई नक्सली सरेंडर है, या किसी निर्दोष की कहानी को मोड़ दिया गया?”
जांच से ही खुलेगा सच
रांची से आई विशेष टीम की जांच के बाद अब उम्मीद है कि—
✔️ मुगदी होनहागा की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी
✔️ सरेंडर की सच्चाई सामने आएगी
✔️ दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होगी
लेकिन जब तक—
👉 माता-पिता सामने नहीं आते
👉 और मुगदी की स्थिति स्पष्ट नहीं होती
तब तक यह मामला सवालों के घेरे में ही रहेगा।
अंतिम सवाल:
“मुगदी होनहागा—नक्सली या सिस्टम की एक अनसुलझी पहेली?”













