रिपोर्ट शैलेश सिंह/संदीप गुप्ता
सारंडा के खनन क्षेत्र में लंबे समय से रोजगार को लेकर उठते सवालों के बीच इस बार गुवा खदान से एक सकारात्मक और उम्मीद जगाने वाली खबर सामने आई है। सेल की गुवा खदान में पहली बार प्रभावित गांवों के बेरोजगार युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार में प्राथमिकता दी गई है। इस पहल को लेकर सारंडा पीढ़ के मानकी लागुड़ा देवगम और जोजोगुटू गांव के मुंडा कानूराम देवगम ने गुवा प्रबंधन, संयुक्त यूनियन और जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार जताया है।

18 पदों की बहाली पर उठे सवाल, फिर साफ हुई तस्वीर
गुवा खदान में इस बार 18 लोगों को रोजगार देने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। जैसे ही बहाली की चर्चा तेज हुई, वैसे ही यह भी आरोप सामने आने लगे कि कुछ प्रभावशाली लोग बैक डोर से अपने चहेतों को नौकरी दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। यहां तक कि पैसों के लेन-देन की चर्चाएं भी क्षेत्र में तेजी से फैलने लगीं।
इन आरोपों और आशंकाओं ने माहौल को गर्म कर दिया। लेकिन इसी बीच गुवा क्षेत्र की विभिन्न श्रमिक यूनियनों ने एकजुट होकर संयुक्त यूनियन के बैनर तले मोर्चा संभाल लिया। यूनियनों ने साफ कर दिया कि किसी भी कीमत पर बहाली प्रक्रिया में पारदर्शिता से समझौता नहीं किया जाएगा।
संयुक्त यूनियन के दबाव का असर, पारदर्शी सूची ने तोड़ी अफवाहें
यूनियनों के संगठित आंदोलन और दबाव का ही परिणाम रहा कि प्रबंधन को पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ानी पड़ी। जब गुवा प्रबंधन ने 18 चयनित लोगों की सूची जारी की, तो तमाम अफवाहों और आरोपों पर विराम लग गया।
सूची में पहली बार आधे से अधिक नाम प्रभावित गांवों के बेरोजगार युवाओं के थे, जबकि बाकी में गुवा शहरी क्षेत्र के योग्य युवाओं को स्थान दिया गया। इस संतुलन ने यह संदेश दिया कि इस बार चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता और स्थानीय प्राथमिकता दोनों का ध्यान रखा गया है।
प्रशासनिक निर्देशों का दिखा असर
सूत्रों के अनुसार, जिले के उपायुक्त और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों द्वारा पहले ही विभिन्न प्रबंधन इकाइयों को निर्देश दिए गए थे कि सारंडा और खनन से प्रभावित गांवों के शिक्षित बेरोजगारों को चतुर्थ श्रेणी के पदों या अन्य रोजगार के अवसरों में प्राथमिकता दी जाए।
गुवा खदान में हुई यह बहाली उसी दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है। यह पहली बार है जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति, यूनियनों के संघर्ष और स्थानीय समाज के दबाव का संयुक्त प्रभाव साफ तौर पर दिखा है।
मानकी और मुंडा ने जताया आभार, बताया ऐतिहासिक कदम
गुवा पहुंचे सारंडा पीढ़ के मानकी लागुड़ा देवगम और जोजोगुटू गांव के मुंडा कानुराम देवगम ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह निर्णय स्थानीय युवाओं के भविष्य को नई दिशा देगा।
उन्होंने कहा,
“लंबे समय से हमारे क्षेत्र के युवा रोजगार के लिए भटक रहे थे। खदान हमारे क्षेत्र में है, लेकिन रोजगार में हमारी भागीदारी नहीं के बराबर थी। इस बार गुवा प्रबंधन ने स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देकर एक सराहनीय पहल की है।”
18 गांवों की एकजुटता बनी सफलता की कुंजी
मानकी लागुड़ा देवगम और मुंडा कानुराम देवगम ने स्पष्ट कहा कि यह सफलता किसी एक व्यक्ति या संस्था की नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास का परिणाम है।
उन्होंने बताया कि इस बहाली प्रक्रिया को सफल बनाने में:
* गुवा सेल प्रबंधन
* क्षेत्र की सभी श्रमिक यूनियन
* 18 प्रभावित गांवों के मुंडा
* स्थानीय ग्रामीण
सभी ने मिलकर अहम भूमिका निभाई। यही कारण है कि इस बार चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रही और स्थानीय युवाओं को उनका हक मिल सका।
भविष्य के लिए उम्मीदों की नई किरण
इस पहल के बाद पूरे सारंडा क्षेत्र में एक सकारात्मक माहौल बना है। स्थानीय युवाओं के बीच उम्मीद जगी है कि अब खनन परियोजनाओं में उन्हें भी बराबरी का अधिकार मिलेगा।
मानकी और मुंडा ने उम्मीद जताई कि यदि इसी तरह प्रबंधन, प्रशासन और समाज के बीच समन्वय बना रहा, तो आने वाले समय में और भी बड़े स्तर पर स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
सारंडा के विकास की दिशा में मजबूत कदम
गुवा खदान की यह पहल सिर्फ 18 लोगों की नौकरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सारंडा क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।
यह दिखाता है कि जब स्थानीय समाज, यूनियन और प्रशासन एकजुट होते हैं, तो पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है।
गुवा खदान में इस बार हुई बहाली प्रक्रिया ने यह साबित कर दिया है कि यदि नीयत साफ हो और दबाव सही दिशा में हो, तो वर्षों से उपेक्षित स्थानीय युवाओं को भी उनका हक मिल सकता है। अब देखना होगा कि यह पहल भविष्य में एक स्थायी नीति का रूप लेती है या फिर यह सिर्फ एक अपवाद बनकर रह जाती है।














