उपायुक्त चंदन कुमार की अध्यक्षता में बड़ी बैठक, 140 स्कूलों को सख्त निर्देश
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
पश्चिम सिंहभूम जिले में निजी और सहायता प्राप्त विद्यालयों द्वारा मनमाने शुल्क वसूली पर अब सख्त नियंत्रण की दिशा में प्रशासन ने निर्णायक कदम उठाया है। समाहरणालय सभाकक्ष में उपायुक्त चंदन कुमार की अध्यक्षता में आयोजित अहम बैठक में जिले के 140 सहायता प्राप्त, सम्बद्ध एवं निजी विद्यालयों (मान्यता प्राप्त एवं गैर-मान्यता प्राप्त) के प्रधानाध्यापकों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक का मुख्य उद्देश्य झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2017 के तहत विद्यालयों में शुल्क निर्धारण को पारदर्शी और नियंत्रित बनाना था, ताकि अभिभावकों की शिकायतों का प्रभावी निवारण हो सके और स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगे।

दो स्तरों पर बनेगी फीस नियंत्रण की मजबूत व्यवस्था
विद्यालय और जिला स्तर पर गठित होंगी समितियां
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि शुल्क निर्धारण को लेकर अब दो स्तरों पर निगरानी और निर्णय प्रक्रिया लागू होगी—विद्यालय स्तर और जिला स्तर।
विद्यालय स्तर समिति का गठन
हर निजी विद्यालय में एक समिति बनाई जाएगी जिसमें—
* प्रबंधन द्वारा नामित प्रतिनिधि – अध्यक्ष
* प्रधानाचार्य – सचिव
* तीन शिक्षक – सदस्य
* चार अभिभावक (PTA द्वारा नामित) – सदस्य
यह समिति स्कूल फीस तय करेगी और किसी भी वृद्धि पर विचार करेगी।
जिला स्तर समिति की संरचना
जिला स्तर पर गठित समिति अधिक शक्तिशाली और निर्णायक होगी:
* उपायुक्त – अध्यक्ष
* जिला शिक्षा पदाधिकारी – सदस्य सचिव (कक्षा 9-12)
* जिला शिक्षा अधीक्षक – सदस्य सचिव (कक्षा 1-8)
* जिला परिवहन पदाधिकारी – सदस्य
* चार्टर्ड अकाउंटेंट – सदस्य
* दो निजी विद्यालयों के प्राचार्य – सदस्य
* दो अभिभावक – सदस्य
* संबंधित सांसद एवं विधायक – सदस्य
यह समिति विद्यालयों द्वारा प्रस्तावित शुल्क को अंतिम मंजूरी देगी।
तीन साल का हिसाब देना होगा, पारदर्शिता अनिवार्य
हर स्कूल को देना होगा पूरा शुल्क विवरण
उपायुक्त ने सभी विद्यालयों को निर्देश दिया कि वे पिछले तीन शैक्षणिक सत्रों का कक्षावार शुल्क विवरण अनिवार्य रूप से जिला समिति को उपलब्ध कराएं।
इसके साथ ही—
* शुल्क निर्धारण दो वर्षों के लिए मान्य होगा
* हर स्कूल को अपनी फीस संरचना वेबसाइट और सूचना पट्ट पर सार्वजनिक करनी होगी
10% से ज्यादा फीस बढ़ी तो जिला समिति की मंजूरी जरूरी
मनमानी बढ़ोतरी पर लगेगा ब्रेक
विद्यालय स्तर समिति यदि फीस में 10% से अधिक वृद्धि का प्रस्ताव देती है, तो उसे जिला समिति से अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा—
* समिति का कार्यकाल 3 वर्षों का होगा
* अभिभावक सदस्य दोबारा नामित नहीं हो सकेंगे
यूनिफॉर्म, किताब और जूते की जबरन बिक्री पर सख्त रोक
अभिभावकों को मजबूर करना होगा दंडनीय अपराध
बैठक में एक बड़ा निर्णय यह लिया गया कि—
* स्कूल परिसर में स्थित दुकानों से किताब, यूनिफॉर्म, जूते खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता
* ऐसा करने पर संबंधित स्कूल पर कड़ी कार्रवाई होगी
साथ ही—
* यूनिफॉर्म डिजाइन में बदलाव 5 साल में एक बार ही किया जा सकेगा
* बदलाव की सूचना सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा
परिवहन शुल्क भी नियमों के दायरे में
सुरक्षा मानकों के आधार पर तय होगी फीस
विद्यालयों को निर्देश दिया गया कि वे परिवहन शुल्क का निर्धारण परिवहन विभाग के मानकों और सुरक्षा नियमों के अनुसार ही करें।
फीस नहीं देने पर परीक्षा से नहीं रोका जाएगा
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ पर रोक
उपायुक्त ने सख्त निर्देश दिया कि—
* किसी भी छात्र को बकाया फीस के कारण परीक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा
* परीक्षा के बाद नियमानुसार निर्णय लिया जा सकता है
हर साल री-एडमिशन फीस वसूली पर भी रोक
अभिभावकों को बड़ी राहत
विद्यालयों को यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि—
* हर साल छात्रों से पुनः नामांकन शुल्क नहीं लिया जाएगा
यह निर्णय सीधे तौर पर अभिभावकों को आर्थिक राहत देने वाला है।
शिकायतों के लिए बनेगा विशेष कोषांग
अब सीधे प्रशासन तक पहुंचेगी अभिभावकों की आवाज
अभिभावकों की शिकायतों के निवारण के लिए—
* कक्षा 1-8 के लिए जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय
* कक्षा 9-12 के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय
में विशेष शिकायत कोषांग बनाया जाएगा।
नियम तोड़े तो भारी जुर्माना और मान्यता खत्म
पहली गलती पर लाखों का जुर्माना, दूसरी पर सख्त कार्रवाई
नियमों के उल्लंघन पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है—
पहला अपराध
* ₹50,000 से ₹2.5 लाख तक जुर्माना
* या अधिक वसूली की राशि का दोगुना
दूसरा अपराध
* ₹1 लाख से अधिक जुर्माना
* या दोगुना वसूली राशि
गंभीर स्थिति में
* विद्यालय की मान्यता समाप्त तक की कार्रवाई
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की पहल
अभिभावकों को मिलेगा न्याय, स्कूलों पर बढ़ेगी जवाबदेही
इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य साफ है—
* शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना
* अभिभावकों को शोषण से बचाना
* स्कूलों को जवाबदेह बनाना
बैठक में सभी अनुमंडल पदाधिकारी, जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।












