रामदास भट्ठा, बिष्टुपुर से पालकी साहिब में सुसज्जित होकर कलगीधर गुरुद्वारा पहुँचा पावन स्वरूप, वैसाखी पर्व को लेकर धार्मिक उत्साह चरम पर
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
सिख धर्म की आस्था, परंपरा और श्रद्धा का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप को जमशेदपुर के रामदास भट्ठा, बिष्टुपुर स्थित गुरुद्वारा से विशेष पालकी साहिब में सुसज्जित कर किरीबुरू स्थित कलगीधर गुरुद्वारा लाया गया।
इस पावन अवसर पर बाबाजी हरभजन सिंह, माताजी सतवंत कौर, माताजी बलजीत कौर और माताजी यशवीर कौर विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके नेतृत्व में श्रद्धालुओं का जत्था पूरे मार्ग में गुरबाणी और सेवा भावना के साथ आगे बढ़ता रहा।

टाउन गेट पर भव्य स्वागत, श्रद्धालुओं में दिखा अपार उत्साह
पवित्र स्वरूप के किरीबुरू पहुंचने से पूर्व टाउन गेट पर श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया। पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण गूंज उठा। सिख समाज के साथ-साथ अन्य धर्मों के लोगों ने भी इसमें बढ़-चढ़कर भाग लिया, जो आपसी सौहार्द और भाईचारे की मिसाल बना।

सेवा भावना की अद्भुत मिसाल: सड़कों की सफाई और फूलों की वर्षा
पालकी साहिब के स्वागत में श्रद्धालुओं ने जिस सेवा भाव का प्रदर्शन किया, वह अद्वितीय रहा। ड्यूटी रूम से लेकर गुरुद्वारा तक:
* सड़कों पर पानी का छिड़काव किया गया
* झाड़ू लगाकर रास्तों की सफाई की गई
* पूरे मार्ग में फूलों की वर्षा कर पवित्रता का वातावरण बनाया गया
यह दृश्य सिख धर्म की सेवा (सेवा) और समर्पण की परंपरा को जीवंत करता नजर आया।

परंपरा अनुसार अरदास, माथे पर उठाकर स्थापित किया पावन स्वरूप
गुरुद्वारा पहुंचने के बाद बाबाजी हरभजन सिंह ने अत्यंत श्रद्धा और मर्यादा के साथ गुरु ग्रंथ साहिब को अपने माथे पर उठाकर गुरुद्वारा के पवित्र स्थान पर स्थापित किया। इसके पश्चात परंपरा अनुसार अरदास की गई, जिसमें क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की गई।

संगत की उमड़ी भीड़, कई श्रद्धालु रहे उपस्थित
इस धार्मिक आयोजन में सिख समाज के अनेक गणमान्य लोग और श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से:
धरम सिंह, अवतार सिंह, ज्ञान सिंह, संतोष सिंह, रीमा कौर, दीपा कौर, ऋषि सिंह, त्रिलोचन सिंह, निर्मल सिंह, हरपाल सिंह, मुख्तार सिंह, पपिंदर सिंह, नरेंद्र कौर, आयुषी कौर, राजदीप कौर सहित दर्जनों श्रद्धालु इस पावन अवसर के साक्षी बने।
वैसाखी पर्व को लेकर विशेष धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला
वैसाखी पर्व के पावन अवसर पर गुरुद्वारा में तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है:
* 12 अप्रैल – अखंड पाठ की शुरुआत
* 13 अप्रैल – निशान साहिब का चोला परिवर्तन
* 14 अप्रैल – भजन-कीर्तन एवं भव्य लंगर
इन कार्यक्रमों को लेकर संगत में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

इस बार विशेष: जमशेदपुर से लाया गया पावन स्वरूप
इस वर्ष एक विशेष बात यह रही कि पहली बार किरीबुरू के कलगीधर गुरुद्वारा में गुरु ग्रंथ साहिब का पावन स्वरूप जमशेदपुर से लाया गया।
पूर्व में यह पवित्र स्वरूप किरीबुरू स्थित सिंहसभा गुरुद्वारा से ही लाया जाता था, लेकिन इस बार दोनों गुरुद्वारों में 14 अप्रैल को वैसाखी पर्व का आयोजन होने के कारण यह विशेष व्यवस्था की गई।
आस्था, परंपरा और एकता का अद्भुत संगम
यह पूरा आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सिख धर्म की सेवा, समर्पण और भाईचारे की भावना का जीवंत उदाहरण भी बना।
किरीबुरू में इस तरह का आयोजन क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर रहा है और समाज को एकजुट करने का कार्य कर रहा है।
संदेश स्पष्ट है—जहां श्रद्धा होती है, वहां सेवा और समर्पण अपने आप जुड़ जाते हैं।














