पचमा गांव में विधायक विशाल प्रशांत का बेबाक संदेश – “हमारा इलाका पिछड़ा है, पर बदलाव निश्चित है”
पचमा से शैलेश सिंह की विशेष रिपोर्ट
भव्य स्वागत के बीच “सरकार आपके द्वार”
19 सितंबर को तरारी विधानसभा क्षेत्र के विधायक विशाल प्रशांत उर्फ सुशील पांडेय पचमा गांव पहुंचे।
मां काली मंदिर प्रांगण में ग्रामीणों ने उनका ढोल-नगाड़े, फूलमाला और नारों के साथ जोशीला स्वागत किया।
“सरकार आपके द्वार” कार्यक्रम के तहत यह मुलाकात महज़ औपचारिकता नहीं थी, बल्कि ग्रामीणों के दुख-दर्द को सीधे सुनने और समाधान तलाशने का मंच बनी।

विधायक का पहला वाक्य – “हम पिछड़े हैं, यह सच्चाई है”
जैसे ही मंच पर माइक संभाला, विधायक का पहला वाक्य ग्रामीणों को चौंका गया।
उन्होंने कहा–
“हमें कहने में कोई संकोच नहीं कि हमारा तरारी विधानसभा क्षेत्र बिहार के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में गिना जाता है। अधिकारी यहां आना पसंद नहीं करते, डॉक्टर यहां टिकना नहीं चाहते, और किसान-बेरोजगारों की सुनवाई कहीं नहीं होती। लेकिन इस बार बदलाव की शुरुआत हो चुकी है।”
अफसर और डॉक्टर क्यों नहीं आते तरारी?
विधायक ने व्यंग्य भरे अंदाज में कहा–
- “अगर किसी अधिकारी से कहें कि हमारे ब्लॉक में रहिए, तो सवाल पूछते हैं कि रहने की व्यवस्था है क्या?”
- “किसी डॉक्टर को बुलाइए तो जवाब मिलता है कि काम तो कर लेंगे, लेकिन सोएंगे कहां?”
यह बयान ग्रामीणों के बीच गूंज उठा, क्योंकि यह उनकी रोज़मर्रा की हकीकत थी।
सड़क, ब्लॉक और अस्पताल का संघर्ष
सुशील पांडेय ने बताया कि उन्होंने लगातार मंत्रियों और विभागीय अधिकारियों से मुलाकात कर तरारी की बदहाली का दर्द सुनाया।
- नया ब्लॉक भवन स्वीकृत हुआ।
- अस्पताल भवन के लिए फंड आया।
- टूटी हुई सड़कों की मरम्मत का काम तेज़ी से शुरू हुआ।
उन्होंने कहा–
“जब मैं पहली बार चुनाव जीतकर आया तो पूरी विधानसभा की सड़कें खंडहर में बदल चुकी थीं। मात्र दस महीने में हर तरफ निर्माण कार्य शुरू हो गया है।”
“विकास सिर्फ सड़कों का नाम नहीं”
विधायक ने साफ शब्दों में कहा कि विकास केवल सड़क-नाली तक सीमित नहीं है।
उनकी प्राथमिकता शिक्षा और स्वास्थ्य पर है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा–
- “अगर बच्चा कहे कि सरकारी स्कूल में पढ़ाई नहीं होती तो यह विकास नहीं।”
- “अगर अस्पताल में दवा और इलाज न मिले तो यह विकास नहीं।”
- “किसानों-बेरोजगारों की समस्या खत्म न हो तो यह विकास अधूरा है।”
पलायन रोकना ही असली लक्ष्य
तरारी विधानसभा से बड़े पैमाने पर पलायन होता है।
ग्रामीण मजदूरी या छोटे काम के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं।
विधायक ने कहा–
“विकास तब होगा जब हमारे लोग रोज़गार के लिए बाहर जाने को मजबूर न हों। हर घर में रोजगार और सुविधा उपलब्ध हो।”
संचार और पेयजल पर खास जोर
पचमा की सभा में विधायक ने स्वीकार किया कि संचार व्यवस्था सबसे कमजोर है।
मोबाइल नेटवर्क अक्सर ठप रहता है।
उन्होंने वादा किया कि मोबाइल टावर की स्थापना उनकी प्राथमिकता में है।
इसी के साथ उन्होंने “हर घर नल योजना” की सुस्ती पर भी सवाल उठाए और कहा कि हर हाल में स्वच्छ पेयजल घर-घर पहुँचना चाहिए।
“एनडीए ही ला सकता है बदलाव”
विधायक ने मंच से खुलकर राजनीतिक संदेश भी दिया।
उन्होंने कहा–
- “बिहार गरीब राज्य है, इसे किसने गरीब बनाया यह कहने की ज़रूरत नहीं।”
- “लेकिन अगर बिहार को आगे ले जाना है तो हमें केंद्र की मदद चाहिए।”
- “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी एनडीए सरकार का विज़न हर वर्ग के विकास का है।”
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि तरारी और शाहाबाद को बदलना है तो ग्रामीणों को एनडीए के साथ खड़ा होना होगा।

“हम भीख मांगने नहीं जाते, हक मांगते हैं”
सड़क मंत्री और अन्य विभागीय अधिकारियों के तंज को याद करते हुए उन्होंने कहा–
“जब हम किसी मंत्री से सड़क की मांग करते हैं तो वो सोचते हैं कि ये विधायक फिर कोई योजना लेकर आ गया। लेकिन हमें क्या करना चाहिए? हमारी ज़रूरतें असीमित हैं। हम अपने क्षेत्र के हक के लिए लड़ते हैं, भीख नहीं मांगते।”
जन निवारण केंद्र: जनता की समस्याओं का नया ठिकाना
सभा में विधायक ने “जन निवारण केंद्र” की पहल का भी खुलासा किया।
- यह केंद्र ब्लॉक ऑफिस के सामने खोला गया है।
- यहां कोई भी ग्रामीण आवेदन देकर अपनी समस्या दर्ज करा सकता है।
- चाहे थाना, ब्लॉक, अस्पताल या किसी भी सरकारी दफ्तर में घूसखोरी या लापरवाही हो, समाधान की गारंटी दी गई।
उन्होंने कहा–
“आपने हमें वोट दिया है, तो आपकी समस्याओं का समाधान करना हमारी जिम्मेदारी है। पटना से लेकर आरा तक, हर सरकारी दफ्तर में आपकी आवाज़ हम पहुंचाएंगे।”
दस महीने में 943 करोड़ की योजना
विधायक ने दावा किया कि केवल दस महीने के कार्यकाल में ही तरारी विधानसभा में 943 करोड़ रुपए की योजनाएं धरातल पर उतारी गई हैं।
उन्होंने कहा कि यह शुरुआत है, आने वाले दिनों में तरारी विकास की नई मिसाल बनेगा।
पचमा के ग्रामीणों की समस्याएं – सीधे मंच से रखी गई
पचमा गांव के लोगों ने भी मौके पर अपनी समस्याएं गिनाई।
- 60–60 KVA ट्रांसफार्मर को 100–100 KVA से बदलना।
- गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र।
- आहर पर पुल निर्माण।
- मुख्य सड़क किनारे पक्की नाली।
- मोबाइल टावर की स्थापना।
- हर घर नल योजना के तहत शुद्ध पेयजल।
- शिव मंदिर परिसर में हाई मास्ट लाइट।
- गांव में मैरिज हॉल का निर्माण।
ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि यह मांगें गांव की जीवनरेखा हैं।
ग्रामीणों की अपेक्षाएं – “बदलाव की लहर तेज हो”
सभा के बाद ग्रामीणों ने कहा कि विधायक का बेबाक अंदाज उन्हें उम्मीद देता है।
- “पहली बार कोई नेता खुले मंच से कह रहा है कि हमारा इलाका पिछड़ा है।”
- “943 करोड़ की योजना अगर सही तरीके से लागू हुई तो पचमा और तरारी का चेहरा बदल सकता है।”
- “जन निवारण केंद्र की पहल अगर जमीनी स्तर पर कामयाब होती है तो घूसखोरी और लापरवाही पर रोक लगेगी।”
विपक्ष पर भी तीखा वार
हालांकि विधायक ने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारों में विपक्ष पर वार किया।
उन्होंने कहा–
“बिहार को गरीब बनाने वाले कौन हैं, यह सब जानते हैं। अब वक़्त है कि हम सब मिलकर अपने क्षेत्र और राज्य को आगे ले जाएं।”
शाहाबाद के लिए नई राह
सभा का समापन करते हुए विधायक ने कहा–
“अब समय कम है। हमें शाहाबाद की दशा और दिशा बदलनी है। तरारी विधानसभा इस बार पीछे नहीं रहेगा।”
निष्कर्ष: उम्मीद बनाम चुनौतियां
पचमा गांव की इस सभा ने एक बात साफ कर दी –
तरारी विधानसभा समस्याओं का अंबार है, लेकिन अब ग्रामीणों में उम्मीद भी जग चुकी है।
943 करोड़ की योजना, जन निवारण केंद्र की पहल और एनडीए सरकार के सहयोग का दावा – सब कुछ तभी मायने रखेगा जब जमीनी स्तर पर बदलाव दिखेगा।
फिलहाल पचमा और आसपास के ग्रामीणों की नज़र विधायक सुशील पांडेय पर टिकी है।
क्या वह अपने वादों पर खरे उतरेंगे?
क्या शाहाबाद सच में नई दिशा पाएगा?
इसका जवाब आने वाले वक्त देगा।















