मेघाहातुबुरु में ऐतिहासिक रावण दहन : बारिश और कोहरे के बीच गूंजा विजयादशमी का उत्सव
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
मेघाहातुबुरु फुटबॉल मैदान 2 अक्टूबर की रात विजयादशमी के पावन अवसर पर ऐतिहासिक रावण दहन का गवाह बना। बारिश और घने कोहरे के बीच भी हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। झारखंड, उड़ीसा और पड़ोसी राज्यों से आए लोगों ने इस भव्य आयोजन को देखने का आनंद लिया।

मेघनाथ का प्रयास और रावण का अंत
कहानी के मंचन के दौरान जब अहंकारी रावण का वध करने की बारी आई तो मेघनाथ ने वर्षा कर उसे बचाने का भरसक प्रयास किया। किंतु मेघाहातुबुरु लौह अयस्क खदान के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) आर.पी. सेलवम ने भगवान राम और महिला समिति की अध्यक्ष स्टेला सेलवम ने मां सीता की भूमिका निभाते हुए सटीक तीर से रावण का वध कर दिया। तीर लगते ही 60 फुट ऊंचा रावण का पुतला धू-धू कर जलने लगा और चारों ओर ‘जय श्रीराम’ के नारे गूंज उठे।

भीड़ और उत्साह पर बारिश का असर नहीं
कार्यक्रम के दौरान लगातार हो रही वर्षा ने दर्शकों का उत्साह तनिक भी कम नहीं किया। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग छतरियों और प्लास्टिक की चादरों के सहारे रावण दहन देखने मैदान में डटे रहे। रावण दहन के साथ चल रही आकर्षक आतिशबाजी ने पूरे माहौल को और भी रोमांचक बना दिया।

गांधी जयंती और अहिंसा के बीच रावण दहन की चर्चा
इस बार रावण दहन का आयोजन विशेष रहा क्योंकि यह महात्मा गांधी जयंती के दिन हुआ। अहिंसा के पुजारी गांधी जी की जयंती और असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक रावण दहन, दोनों की एक साथ चर्चा होती रही। लोगों ने इसे परंपरा और आधुनिकता के अद्भुत संगम के रूप में देखा।
सुरक्षा में सतर्क पुलिस और CISF
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इसे देखते हुए किरीबुरू थाना प्रभारी रोहित कुमार के नेतृत्व में पुलिस और CISF के जवानों ने सुरक्षा की बागडोर संभाली। पूरी रात सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रही और बिना किसी व्यवधान के कार्यक्रम संपन्न हुआ।

सांस्कृतिक पहचान बनता आयोजन
मेघाहातुबुरु का रावण दहन अब केवल स्थानीय आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। हर वर्ष की तरह इस बार भी यहां का आयोजन जिले का सबसे बड़ा आकर्षण बना। रावण दहन के इस दृश्य ने लोगों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी और विजयादशमी का संदेश फिर से जीवंत कर दिया














