आदिवासी–मूलवासी समुदाय ने खदान बंद करने की चेतावनी दी
गुवा संवाददाता।
गुवा सेल माइंस के रंजाबुरु फेस स्थित राजाबुरु खदान के उद्घाटन से पहले ही स्थानीय आदिवासी–मूलवासी समुदाय का आक्रोश फट पड़ा है। शुक्रवार शाम ठाकुरा नदी तट पर आयोजित एक बड़ी जनसभा में ग्रामीणों ने साफ कहा कि जब तक रोजगार नहीं, तब तक खदान नहीं।

“स्थानीयों को नौकरी नहीं तो एक भी लोहा बाहर नहीं जाएगा” — पीढ़ मानकी
सभा को संबोधित करते हुए कोल्हान पोड़ाहाट सारंडा बचाओ समिति के अध्यक्ष सह सारंडा पीढ़ मानकी लागुड़ा देवगम ने दोटूक चेतावनी दी—
“यदि सारंडा और गुवा क्षेत्र के युवाओं को मां सरला कंपनी रोजगार नहीं देती है, तो राजाबुरु खदान से एक भी लोहा पत्थर बाहर नहीं जाने दिया जाएगा।”
उन्होंने कहा कि रोजगार पर पहला अधिकार मूलवासी समुदाय का है। वर्षों से सेल कंपनी यहां के आदिवासी समाज के अधिकारों की अनदेखी करती आई है, लेकिन अब वक्त बदल चुका है।
पीढ़ मानकी ने कहा—
“अब समुदाय जागरूक है और अपने हक के लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष करेगा।”
सेल कंपनी पर गंभीर आरोप
पीढ़ मानकी लागुड़ा देवगम ने आरोप लगाया कि सेल कंपनी ने दशकों से सारंडा क्षेत्र के आदिवासियों को छलने, विकास योजनाओं से दूर रखने और रोजगार में पिछड़ा बनाने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि यह खदान स्थानीयों के हितों के खिलाफ नहीं जा सकती—
“यदि रोजगार में प्राथमिकता नहीं दी गई, तो व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।”
स्थानीय प्रतिनिधियों की एकजुटता, कठोर संदेश
सभा में मौजूद सभी वक्ताओं ने एकमत होकर कहा कि खदान शुरू होने से पहले स्थानीय लोगों की बहाली सुनिश्चित होनी चाहिए, अन्यथा जनप्रतिरोध तेज किया जाएगा।
सभा में उपस्थित प्रमुख व्यक्तियों में—
- पूर्व जिला परिषद सदस्य बामिया मांझी
- गंगदा मुखिया सुखराम सांडिल
- जिला संगठन सचिव बृंदावन गोप
सहित कई स्थानीय प्रतिनिधि और ग्रामीण शामिल थे।
“रोजगार दो, तभी खदान चलेगी” — स्थानीय जनप्रतिनिधि
वक्ताओं ने कहा कि सेल माइंस द्वारा बाहरी लोगों को प्राथमिकता देना स्थानीय बेरोजगार युवाओं के साथ अन्याय है।
उन्होंने चेतावनी दी—
“रोजगार सुनिश्चित करो, नहीं तो खदान का कार्य ठप कर दिया जाएगा।”
तेजी से बढ़ रहा जनसमर्थन, आंदोलन की तैयारी
जनसभा के बाद स्थानीय समुदाय का रुख और अधिक सख्त होता दिख रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि—
“हमारे जंगल–जमीन, नदी–नाले और संसाधनों का उपयोग हमारी अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता। जब खदान हमारी धरती पर है, तो रोजगार भी हमारा हक है।”
सभा में शामिल युवा बेरोजगारों ने भी कहा कि यदि सरकार और कंपनी ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो वे सामूहिक आंदोलन शुरू करेंगे।
राजाबुरु खदान शुरू होने से पहले ही जिस तरह स्थानीय निवासियों ने अपना पक्ष मजबूती से रखा है, उससे साफ है कि रोजगार की मांग अब आंदोलन का रूप ले चुकी है।
आने वाले दिनों में प्रशासन और कंपनी पर स्थानीयों के हितों को प्राथमिकता देने का दबाव और बढ़ेगा।















