गुवा सेल खदान के पांच सेवानिवृत्त कर्मियों की जीत — रोकी गई राशि पर 10% ब्याज भी देने का निर्देश
गुवा संवाददाता।
गुवा सेल खदान में सेवानिवृत्त कर्मियों की ग्रेच्युटी रोकने को लेकर वर्षों से चल रहे विवाद पर एएलसी कोर्ट, चाईबासा ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि ग्रेच्युटी का भुगतान सेल क्वार्टर खाली करने की शर्त पर निर्भर नहीं होगा। इस आदेश के बाद गुवा समेत पूरे कोल्हान क्षेत्र के सेल कर्मचारियों में राहत और खुशी की लहर है।

सेल प्रबंधन की मनमानी पर रोक
गुवा स्थित सेल खदानों में लंबे समय से यह प्रचलन था कि जो सेवानिवृत्त कर्मी समय पर क्वार्टर नहीं छोड़ते, उनकी ग्रेच्युटी राशि रोक दी जाती थी। कर्मचारी इसे प्रबंधन की मनमानी बताते हुए लगातार विरोध कर रहे थे, लेकिन वर्षों से कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकल रहा था।
स्थिति तब बदली जब गुवा के पांच सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से मामला उठाया।
पांच सेवानिवृत्त कर्मियों ने दिया था कानूनी चुनौती
ग्रेच्युटी रोकने के खिलाफ निम्न सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने एएलसी कोर्ट चाईबासा में मामला दायर किया था—
- विश्वकेशन महापात्रो
- नवीदत्त महापात्रो
- मंगल तुबिद
- सोमरा मिंज
- हरिपदो दास
इन कर्मियों ने तर्क दिया कि ग्रेच्युटी उनका कानूनी और अर्जित अधिकार है, जिसे किसी शर्त के आधार पर रोका जाना नियमों के खिलाफ है।
अदालत ने कहा — ग्रेच्युटी ‘अर्जित अधिकार’, रोकी नहीं जा सकती
मामले की गंभीरता को देखते हुए एएलसी कोर्ट ने सुनवाई में स्पष्ट टिप्पणी की कि—
- ग्रेच्युटी कर्मचारी का अधिकार है।
- क्वार्टर खाली करना इस अधिकार को सीमित करने का आधार नहीं हो सकता।
अपने आदेश में अदालत ने निर्देश दिया:
- रोकी गई सभी बकाया ग्रेच्युटी राशि तुरंत कर्मचारियों को दी जाए।
- जिस अवधि तक राशि रोकी गई, उस पर 10% ब्याज भी जोड़कर भुगतान किया जाए।
यह फैसला कर्मचारी हितों की रक्षा की दिशा में अहम माना जा रहा है।
कर्मचारियों में खुशी, बताया बड़ी जीत
फैसले के बाद गुवा सेल के सेवानिवृत्त और वर्तमान कर्मियों में उत्साह का माहौल है। सेवानिवृत्त कर्मियों ने निर्णय को अपनी बड़ी जीत बताते हुए कहा कि—
“अब प्रबंधन मनमानी करके हमारी मेहनत की कमाई रोक नहीं पाएगा। यह फैसला आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बनेगा।”
कर्मचारियों का कहना है कि यह आदेश केवल पांच लोगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए अधिकारों की मजबूती का आधार बनेगा













