स्वास्थ्य के साथ घोर खिलवाड़—दुकानदार ने चुप्पी का सौदा किया, बोला- “कहीं चर्चा मत कीजिए!”
रिपोर्ट – शैलेश सिंह।
सीलबंद बोतल में कीड़ा! आखिर ये शराब है या मौत का घूंट?
किरीबुरू मेन मार्केट स्थित सरकारी अंग्रेजी शराब दुकान की लापरवाही अब सीधे-सीधे आम उपभोक्ताओं की जान लेने पर उतर आई है।
शराब की बोतल में मरा हुआ कीड़ा मिलने के बाद लोगों के मन में एक ही सवाल—
“क्या हम शराब खरीद रहे हैं… या मौत की बोतल?”
रॉयल स्टेज की बोतल—जो सीलबंद और प्रीमियम मानी जाती है—उसके अंदर कीड़ा मिलने का मतलब है कि या तो पैकिंग में गंभीर घोटाला है या फिर दुकान में नकली शराब का खेल चल रहा है।
दोनों ही स्थितियाँ भयावह हैं।

खाली बोतलें खरीदकर नकली शराब? चर्चाओं का बाजार गरम
स्थानीय लोग खुलकर सवाल उठा रहे हैं—
- क्या खाली बोतलें इकट्ठा कर उनमें नकली शराब भरकर बेची जा रही है?
- क्या सरकारी दुकान में भी “सुरक्षा” का कोई मानक नहीं?
- अगर प्रीमियम ब्रांड की बोतल में कीड़ा हो सकता है, तो बाकी शराब का क्या भरोसा?
किरीबुरू में लंबे समय से यह चर्चा चलती आ रही है कि कुछ दुकानों में बोतल बदलने व नकली रीफिलिंग का खेल चलता है। यह घटना उन तमाम आशंकाओं को और मजबूत कर देती है।
घटना: दोस्त के साथ बैठकर पैग बनाने गए… और दिखा कीड़ा!
एक ग्राहक ने आज दोपहर रॉयल स्टेज की बोतल खरीदी।
दोस्तों के साथ सेवन शुरू करने के लिए जैसे ही बोतल खोली—
सबकी आंखें फटी रह गईं!
अंदर एक मरा हुआ कीड़ा साफ नजर आया।
ये घटना कोई छोटी भूल नहीं—
ये सीधा-सीधा फूड सेफ्टी एक्ट, उपभोक्ता अधिकार, और मानव स्वास्थ्य का घोर उल्लंघन है।
दुकानदार की शर्मनाक प्रतिक्रिया—“मत बताइयेगा… नई बोतल ले जाइये।”
जब ग्राहक बोतल लेकर दुकान पर गया तो उम्मीद थी कि दुकानदार तुरंत मामले की शिकायत आधिकारिक रूप से दर्ज कराएगा।
लेकिन हुआ उल्टा—
दुकानदार बोतल देखकर घबरा गया और बोला—
“बोतल ले जाइए, पर प्लीज इसकी चर्चा कहीं मत कीजिए।”
यह प्रतिक्रिया खुद-ब-खुद सब कुछ बता देती है:
- क्या दुकानदार पहले से ऐसी गड़बड़ियों से वाकिफ है?
- क्या यह कोई एक दिन की गलती नहीं बल्कि रोज-रोज का खेल है?
- क्या दुकान में उपभोक्ता की जान से ज्यादा “कमाई” की कीमत है?
जनता का आक्रोश—“सरकारी दुकान तक भ्रष्ट! अब भरोसा कहां करें?”
स्थानीय लोगों ने कड़ी नाराजगी जताई है।
उनका कहना है—
- “सरकारी दुकान में ये हाल है तो दूसरी दुकानों का क्या हाल होगा?”
- “शराब महंगी होती जा रही है, लेकिन गुणवत्ता रसातल में जा चुकी है।”
- “ये सीधे-सीधे आम आदमी के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है और सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी—ऐसी शराब जानलेवा हो सकती है
कीड़ा मिला होना सिर्फ गंदगी नहीं, यह संकेत है कि बोतल:
- या तो अनहाइजीनिक तरीके से दोबारा भरी गई,
- या खराब गुणवत्ता और निगरानी में बनी,
- या अवैध शराब हो सकती है।
ऐसी शराब से बैक्टीरियल इन्फेक्शन, फूड पॉयजनिंग, या लिवर डैमेज जैसी गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं।
गंभीर सवाल—क्या शराब माफिया सरकारी दुकानों में घुस गए हैं?
इस घटना ने उस बड़े खेल की ओर इशारा कर दिया है, जिसकी शिकायतें वर्षों से मिलती रही हैं:
- नकली शराब
- रीफिल की गई बोतलें
- एक्सपायरी स्टॉक
- घटिया शराब की ब्रांडिंग
अगर सरकारी दुकान में भी बिना जांच और बिना निगरानी के शराब बेची जा रही है, तो यह सीधे-सीधे प्रशासन की विफलता है।
लोगों की मांग—तुरंत जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो
ग्राहक और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि:
- शराब दुकान की फौरन जांच हो।
- दुकान का पूरा स्टॉक क्वालिटी टेस्ट से गुजरे।
- नकली शराब या रीफिलिंग का खेल साबित होने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
- दुकानदार द्वारा “चुप्पी” का सौदा करने की कोशिस को भी अपराध माना जाए।
यह घटना एक संकेत है, खतरे की घंटी है
अगर आज बोतल में मृत कीड़ा मिला है,
तो कल क्या मिलेगा—
जहर? केमिकल? या कुछ और घातक?
यह सिर्फ एक ग्राहक का मामला नहीं,
बल्कि पूरे क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य और जीवन का प्रश्न है।
सरकार और प्रशासन को अब सख्त कदम उठाने होंगे,
वरना शराब की हर बोतल एक संभावित मौत की बोतल बन सकती है।













