एल एंड डीसी–केआईओएम में 60 से अधिक श्रमिकों की सक्रिय भागीदारी, अधिकारियों ने समझाए नए प्रावधान
रिपोर्ट – शैलेश सिंह।
नए कानूनों को समझना समय की मांग – इसलिए आयोजित हुआ विशेष सत्र
श्रम क्षेत्र में बड़े बदलाव लाने वाली नए श्रम संहिताओं को समझाने और संविदा श्रमिकों को उनके अधिकारों व कर्तव्यों से अवगत कराने के उद्देश्य से दिनांक 04 दिसंबर 2025 को एल एंड डीसी–केआईओएम में एक विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया।
सत्र प्रातः 10:00 बजे से 11:00 बजे तक चला, जिसमें श्रमिकों को आधुनिक श्रम कानूनों के विभिन्न पहलुओं को सरल भाषा में समझाया गया।

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को बनाया महत्वपूर्ण
कार्यक्रम में दो महत्वपूर्ण अधिकारियों की उपस्थिति रही—
- श्री अजीत कुमार साहू, श्रम प्रवर्तन अधिकारी (एलईओ), चाईबासा
- श्री ए. के. बिस्वास, जीएम (एचआर), एमआईओएम–केआईओएम
दोनों अधिकारियों ने कार्यस्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा, अधिकार, वेतन संरचना, काम के घंटे, ओवरटाइम, सामाजिक सुरक्षा सहित विभिन्न सुधारों पर विस्तार से चर्चा की।
60–65 श्रमिकों ने लिया हिस्सा, उत्साहपूर्ण सहभागिता
सत्र में कुल 60–65 संविदा श्रमिकों ने भाग लिया।
श्रमिकों ने नए प्रावधानों को समझने के लिए कई सवाल पूछे—
- नए नियमों से वेतन में क्या बदलाव आएगा?
- ओवरटाइम के मानक कैसे लागू होंगे?
- सुरक्षा मानकों को कैसे मजबूत किया गया है?
- ईपीएफ/ईएसआई जैसे लाभों में क्या सुधार है?
अधिकारियों ने हर सवाल का विस्तार से उत्तर देते हुए श्रमिकों को आश्वस्त किया कि नई श्रम संहिताएँ उनके हितों को और मजबूत बनाने के लिए ही लागू की गई हैं।
श्री अजीत कुमार साहू का संदेश – “कानून समझना हर श्रमिक का अधिकार”
एलईओ श्री साहू ने कहा कि जागरूकता की कमी के कारण श्रमिक अक्सर अपने कई अधिकारों से वंचित रह जाते हैं।
उन्होंने कहा—
“नए श्रम संहिताएँ श्रमिकों को अधिक सुरक्षित और संगठित बनाती हैं। इन्हें समझना ही पहला कदम है।”
उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि शिकायत निवारण प्रक्रिया, वेतन सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा तथा औद्योगिक संबंधों से जुड़े मामलों में अब स्पष्ट और सख्त प्रावधान लागू हैं।
जीएम (एचआर) श्री बिस्वास ने बताया—श्रमिक कंपनी की रीढ़
श्री ए. के. बिस्वास ने कहा कि किसी भी उद्योग की मजबूती उसके श्रमिकों पर निर्भर करती है।
उन्होंने कहा—
“श्रम संहिताएँ उद्योग व श्रमिक दोनों के बीच संतुलन बनाने का काम करती हैं। पारदर्शिता बढ़ेगी, विवाद कम होंगे और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी।”
उन्होंने श्रमिकों को प्रोत्साहित किया कि वे इन नियमों का पालन करें और किसी भी समस्या की स्थिति में प्रबंधन से संवाद करें।

सत्र में शामिल हुए मुख्य बिंदु
जागरूकता कार्यक्रम में निम्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई—
• वेतन संहिता 2019
मासिक वेतन संरचना, बोनस, ओवरटाइम भुगतान, वेतन रोकने के नियम आदि।
• सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020
ईपीएफ, ईएसआई, ग्रेच्यूटी, मातृत्व लाभ, पेंशन योजनाएँ।
• औद्योगिक संबंध संहिता 2020
श्रमिकों के संगठन बनाने की स्वतंत्रता, विवाद निवारण प्रणाली।
• व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संहिता 2020
कार्यस्थल की सुरक्षा, स्वास्थ्य परीक्षण, सुरक्षात्मक उपकरणों की उपलब्धता।
सत्र ने बढ़ाई श्रमिकों की जागरूकता, मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया
भाग लेने वाले श्रमिकों ने कार्यक्रम की सराहना की और कहा कि ऐसे सत्र नियमित रूप से होने चाहिए।
अधिकांश का कहना था—
“पहली बार हमें नियमों को इतनी सरल भाषा में समझाया गया। इससे हमें अपने अधिकारों के बारे में स्पष्ट जानकारी मिली।”

श्रमिकों को मजबूत बनाने की पहल
नए श्रम संहिताओं को लेकर यह जागरूकता सत्र न केवल जानकारी प्रदान करने वाला था, बल्कि संविदा श्रमिकों के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला भी साबित हुआ।
कंपनी प्रबंधन और श्रम विभाग की संयुक्त पहल से आयोजित यह कार्यक्रम भविष्य में श्रमिक–प्रबंधन संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।













