राकेश महतो उर्फ अन्ना ने बदला बयान—“हमसे गलती हुई, दुकान की बदनामी हो गई… माफी चाहता हूँ”
रिपोर्ट – शैलेश सिंह,
जहाँ कल था ‘जहर की बोतल’ का हंगामा… आज वही अन्ना बोला—“नशे में गलत आरोप लगा दिया”
किरीबुरू मेन मार्केट स्थित सरकारी अंग्रेजी शराब दुकान पर रॉयल स्टेज की सीलबंद बोतल में मरा हुआ कीड़ा मिलने का आरोप लगाने वाले युवक राकेश महतो उर्फ अन्ना ने आज अचानक अपना बयान बदलते हुए नया दावा किया है कि उसने नशे की हालत में गलतफहमी में यह आरोप लगा दिया था।
कल तक जहां सोशल मीडिया और बाजार में ये चर्चा थी कि—
“सरकारी दुकान में जहर बेचा जा रहा है!”
आज वही अन्ना कह रहा है—
“हमसे गलती हो गई… बोतल में कीड़ा कैसे आया, पता नहीं।”

पहला आरोप: “सीलबंद बोतल में कीड़ा… दुकानदार ने चुप्पी खरीदने की कोशिश की”
कल अन्ना ने मीडिया से कहा था कि उसने रॉयल स्टेज की बोतल खरीदी और दोस्तों के साथ शराब पीने बैठा, तभी बोतल में मरा हुआ कीड़ा देखा।
उसने दावा किया था—
- दुकानदार घबरा गया
- बोतल बदलकर नई दे दी
- और बोला—“कहीं चर्चा मत कीजिए”
इस बयान के बाद पूरा क्षेत्र सवालों से जल उठा था—
क्या सरकारी दुकान तक नकली शराब माफिया पहुँच गए?
क्या बोतल रीफिलिंग का खेल चल रहा है?
क्या स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है?
आज अन्ना का यू–टर्न: “नशे में था… गलत बोल दिया”
आज राकेश महतो उर्फ अन्ना ने खुद आगे आकर कहा—
“कल हम नशे में थे। बोतल में कीड़ा शराब पीते समय कैसे आया, मुझे याद नहीं। गलती से मीडिया में गलत बयान दे दिया। दुकान की साख खराब हुई है, मैं दुकान मालिक से माफी मांगता हूँ।”
इस बयान ने पूरे मामले को एकदम नई दिशा दे दी है।
लोग हैरान—क्या दबाव में बदला बयान? या सच में हुई गलतफहमी?
अन्ना के अचानक बयान बदलने से लोग दो हिस्सों में बंट गए हैं:
1. कुछ लोग कह रहे हैं—यह दबाव में दिया बयान है:
- “कल तक दुकान वाला घबरा रहा था, आज सब ठीक कैसे हो गया?”
- “क्या शिकायत वापस लेने को कहा गया?”
- “क्या दुकानदार ने कानूनी मामले में फसाने के लिए धमकाया ?”
2. जबकि कुछ लोग कह रहे हैं—शायद नशे में गलतफहमी हुई हो:
- “नशे में बोतल संभलती नहीं, कीड़ा दिखना भी भ्रम हो सकता है”
- “दोस्तों के बीच बैठकर हंगामा बढ़ गया होगा”
- “दुकानदार ने तुरंत बोतल बदल दी, मतलब उसकी नीयत ठीक थी”
दुकानदार को राहत—लेकिन सवाल बाकी
अन्ना के बयान वापस लेने से दुकान की प्रतिष्ठा पर लगे दाग कुछ हद तक धुले जरूर हैं, लेकिन सवाल अब भी वहीं खड़े हैं—
1. शराब की बोतल में कीड़ा आया कैसे?
क्या वाकई बाहर से गिरा? या भ्रम था? या फिर बोतल में पहले से था?
2. दुकानदार ने बोतल तुरंत क्यों बदल दी?
अगर गलती ग्राहक की थी, तो बोतल बदलना क्यों? क्या वह हंगामा शांत कराना चाहता था?
3. शराब दुकानों की क्वालिटी जांच कब होगी?
सरकारी दुकान पर ऐसे मामलों में
- कोई निरीक्षण नहीं
- कोई रिकॉर्डिंग नहीं
- कोई गुणवत्ता जांच नहीं यह सबसे बड़ा खतरा है।












