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गुवा, सेल में बाहरी बहाली पर महाबवाल: दूसरे दिन भी जाम, उत्पादन–डिस्पैच ठप

On: December 9, 2025 4:40 PM
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स्थानीय युवाओं के रोजगार अधिकार पर ‘हमला’ बताते हुए यूनियनों का अल्टीमेटम—बहाली रद्द नहीं तो संघर्ष और उग्र होगा

गुवा संवाददाता।
गुवा सेल में कथित बाहरी बहाली को लेकर मंगलवार को भी माहौल पूरी तरह विस्फोटक बना रहा। संयुक्त यूनियनों का उग्र प्रदर्शन दूसरे दिन और अधिक आक्रामक हो गया, जिसके चलते गुवा सेल में उत्पादन और डिस्पैच पूरी तरह से बंद हो चुका है। सोमवार शाम से शुरू हुआ आंदोलन मंगलवार को पूर्ण बंदी में बदल गया, और मजदूरों का आक्रोश प्रबंधन को सीधे चुनौती देता दिखाई दिया।

यूनियनों की दो-टूक—“बाहरी बहाली बंद करो, वरना प्लांट बंद रहेगा”

जनरल ऑफिस के बाहर सुबह से ही यूनियन पदाधिकारियों, मजदूरों और स्थानीय युवाओं की भारी भीड़ जुटी। लगातार घंटों तक चली नारेबाजी में प्रबंधन पर स्थानीय अधिकारों की खुली अनदेखी का आरोप लगाया गया। यूनियन का कहना है कि गुवा जैसे खनन क्षेत्र में जब हजारों स्थानीय युवा बेरोजगार हैं, तब बाहर के व्यक्तियों को नौकरी देने का निर्णय स्थानीय जनता के साथ सरासर अन्याय है।

यूनियनों ने सोमवार की रात्रि पाली से ही सभी बसों को रोक दिया, जिसके कारण उत्पादन शून्य हो गया और मंगलवार को भी कामकाज ठप रहा। मजदूरों ने साफ चेतावनी दे दी है—
“जब तक बाहरी बहाली पर रोक नहीं लगती, तब तक उत्पादन और डिस्पैच अनिश्चितकालीन बंद रहेगा!”

ठेका मजदूरों से लेकर आम परिवारों में उबाल—“रोजगार का हक छीना नहीं जाएगा”

बाहरी बहाली के विरोध ने ठेका मजदूरों, सफाईकर्मियों और स्थानीय परिवारों में जबरदस्त आक्रोश पैदा कर दिया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वर्षों से सेल प्रबंधन स्थानीय युवाओं की अनदेखी कर ठेका कंपनियों के दबाव में बाहरी लोगों को तरजीह दे रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार यह सिर्फ बहाली विवाद नहीं, बल्कि स्थानीय रोजगार के अधिकार पर सुनियोजित प्रहार है।

प्रबंधन की सफाई—“सिर्फ 7 लोगों की बहाली, सभी झारखंड के”

मंगलवार को हालत बिगड़ते देख सेल प्रबंधन ने संयुक्त यूनियनों के साथ बैठक की। मुख्य महाप्रबंधक चंद्रभूषण कुमार ने यूनियनों को बताया कि गुवा सेल में केवल 7 लोगों की ही बहाली की गई है और ये सभी झारखंड के ही हैं।

लेकिन यूनियनों ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया। उनका कहना था—
“झारखंड बहुत बड़ा है, पर गुवा क्षेत्र में भी सैकड़ों युवा योग्य होने के बावजूद बेरोजगार हैं। फिर बाहर के जिलों से लोगों को क्यों?”

यूनियनों ने बैठक में साफ कर दिया—
“सातों की बहाली रद्द किए बिना आंदोलन नहीं रुकेगा।”

भीड़ में बड़ा जनसमर्थन, कई पंचायत जनप्रतिनिधि और संगठन नेता जुटे

प्रदर्शन स्थल पर मंगलवार को जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रमुख उपस्थित नेताओं में—

  • झारखंड मजदूर संघर्ष संघ यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे
  • महामंत्री अंतर्यामी महाकुड़
  • बोकारो स्टील वर्कर्स यूनियन इंटक के महामंत्री विश्वजीत तांती
  • सारंडा युवा बेरोजगार संघ के अध्यक्ष उदय कुमार सिंह
  • मुखिया पद्मिनी लागुरी एवं चांदमनी लागुरी
  • जिला परिषद सदस्य देवकी कुमारी
  • विभिन्न गाँवों के मुंडा और मानकी

सहित बड़ी संख्या में ठेका मजदूर और स्थानीय युवा शामिल हुए।

इन नेताओं ने मंच से कहा—
“यह आंदोलन बाहरी बहाली रोकने की नहीं, बल्कि स्थानीय स्वाभिमान बचाने की लड़ाई है। जरूरत पड़ी तो गुवा सेल का पहिया पूरी तरह जाम कर देंगे!”

स्थिति गंभीर—उत्पादन ठप, डिस्पैच रुका, परिवहन व्यवस्था अस्त-व्यस्त

लगातार दूसरे दिन भी उत्पादन नहीं होने से गुवा सेल की पूरी व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई है। डिस्पैच बंद होने से आयरन ओर परिवहन पर तत्काल असर पड़ा है, जिसका प्रभाव आने वाले दिनों में बोकारो समेत इस्पात क्षेत्र पर देखने को मिल सकता है।
कर्मचारियों का स्पष्ट बयान है—
“जब तक बहाली rollback नही—तब तक wheel lock।”

आंदोलन के उग्र होने की आशंका—स्थानीय जनता भी कूदी मैदान में

मौजूदा हालात को देखते हुए यह आंदोलन किसी भी समय बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है। कई पंचायतों और दर्जनों गांवों का जनसमर्थन मिलने से संयुक्त यूनियन का हौसला और बुलंद हो गया है।

स्थानीय युवाओं ने कहा—
“हमारे घर के सामने सेल की खान है, पर रोजगार बाहर वालों को मिलता है। यह अब नहीं चलेगा।”

संभावित संकट—अगर बहाली वापस नहीं हुई, तो संघर्ष लंबा चलेगा

स्थिति यह संकेत दे रही है कि यदि प्रबंधन ने कोई ठोस समाधान अब तक नहीं निकाला, तो यह विवाद गुवा सेल के इतिहास का सबसे बड़ा श्रम आंदोलन बन सकता है।
यूनियनों ने दोहराया—
“हम पीछे हटने वाले नहीं। बहाली रद्द नहीं हुई तो गुवा सेल में एक भी वाहिका नहीं चलेगी!”

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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