प्रबंधन को सख्त चेतावनी: “अब नहीं सहेंगे अन्याय!”
रिपोर्ट – शैलेश सिंह।
झारखण्ड मजदूर संघर्ष संघ की मेघाहातुबुरु इकाई ने बुधवार को जेनरल ऑफिस के सामने ऐसा जोरदार प्रदर्शन किया कि पूरा प्रशासनिक महकमा हिल गया। महासचिव अफताब आलम के नेतृत्व में दर्जनों श्रमिक गगन भेदी नारों के साथ जेनरल ऑफिस पर धावा बोलते हुए साफ संदेश दे गए—“स्थानीयों का हक छीनना बंद करो! नहीं तो बड़ा आंदोलन होगा!”

तनावपूर्ण माहौल के बीच यूनियन प्रतिनिधियों ने मुख्य महाप्रबंधक, मेघाहातुबुरु को चार बिंदुओं वाला मांगपत्र सौंपा और चेताया कि अब मजदूर किसी भी कीमत पर अपने अधिकारों से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
🔥 यूनियन का आक्रोश—चार्टर ऑफ डिमांड्स में प्रबंधन को खुली चेतावनी
1️⃣ बाहरी लोगों की भर्ती बंद करो — स्थानीयों की अनदेखी नहीं चलेगी
यूनियन ने सबसे कड़े अंदाज़ में कहा कि मेघाहातुबुरु और किरीबुरू खदानों में बाहरी लोगों की बिना रोक-टोक भर्ती पूरी तरह बंद होनी चाहिए। “यह मजदूरों के पेट पर लात मारने जैसा है। जब हमारे घर का युवा बेरोजगार घूम रहा है, तब बाहरी लोगों को नौकरी देना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
2️⃣ 2019 की भर्ती घोटाले जैसी प्रक्रिया अब नहीं — 1000 पद तुरंत भरने की मांग
यूनियन ने 2019 की भर्ती प्रक्रिया को स्थानीयों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि इस बार कोई गलती नहीं होगी। “कर्मचारी आश्रितों और स्थानीयों को 70% आरक्षण दो—वरना भर्ती प्रक्रिया नहीं चलेगी!” 1000 रिक्त पदों को तुरंत भरने की जोरदार मांग की गई।
3️⃣ ठेका व्यवस्था पर पूर्ण रोक—स्थानीयों को ही मिलना चाहिए काम
श्रमिकों की भारी कमी के बावजूद प्रबंधन ठेका कर्मियों पर निर्भर है। यूनियन ने इसे मजदूर-विरोधी नीति बताया। “ठेका मजदूरों के नाम पर बाहर से लोगों को घुसाया जा रहा है। भर्ती करो—और स्थानीयों को प्राथमिकता दो!” उन्होंने कहा कि इस मामले में मुख्य महाप्रबंधक का हस्तक्षेप अब अनिवार्य है।
4️⃣ KBR-MBR जनरल हॉस्पिटल को ‘नाम का अस्पताल’ बताकर कड़ी टिप्पणी
यूनियन ने अस्पताल की दयनीय हालत पर भी जमकर हमला बोला। “रेफरल अस्पताल कहलाने वाले KBR-MBR में एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं! यह मजदूरों की जान से खिलवाड़ है।” सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, मूत्र रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, ENT समेत सभी विशेषज्ञ डॉक्टरों की तत्काल नियुक्ति की मांग रखी गई।

⚠ प्रबंधन को अंतिम चेतावनी — ‘अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन तेज होगा’
अफताब आलम ने साफ शब्दों में कहा— “हमारी मांगें जायज़ हैं, क्षेत्रीय हित की हैं। अगर प्रबंधन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो हम सड़क से लेकर कार्यालय तक ऐसा आंदोलन करेंगे कि पूरा सिस्टम जवाब देने को मजबूर होगा!”
यूनियन ने साफ कर दिया कि अब समय बदल चुका है—मजदूर की आवाज दबाने की कोशिश करने वालों को कड़ा जवाब मिलेगा।
✊ प्रदर्शन में शामिल रहे ये प्रमुख कार्यकर्ता
दयानंद कुमार, अफताब आलम, कामता प्रसाद, सोमा नाग, कुलदीप सिंह, शैलेश बारी, कमल कुमार रजक, नारायण तिरिया, ताहिर मोहम्मद, गोपी पान, सुमन लकड़ा, मोहम्मद फैजुद्दीन, एकबार हुसैन सहित कई वरिष्ठ श्रमिक नेता मौके पर मौजूद रहे और एक स्वर में मजदूर एकता का शंखनाद किया।












