पलामू उजड़ा, भरपाई कोल्हान से क्यों?
रांची डेस्क
जब कोयला खनन से पर्यावरण को नुकसान पलामू प्रमंडल में हुआ है, तो उसकी भरपाई कोल्हान के आदिवासी किसानों की जमीन से क्यों की जा रही है?
क्या सरकार मानती है कि शेड्यूल एरिया की जमीन सबसे आसान निशाना है?

कैबिनेट फैसलों में आदिवासियों की सहमति कहां है?
24 सितंबर को 271.92 एकड़ और 23 दिसंबर को 559 एकड़ जमीन हिंडाल्को को दी गई।
सरकार बताए—
इन फैसलों से पहले कितनी ग्राम सभाएं हुईं?
किस ग्राम सभा ने लिखित सहमति दी?
खेती की जमीन पर “वनारोपण” क्यों?
जिन जमीनों पर ग्रामीण वर्षों से खेती और पशुपालन कर रहे हैं, वहां जबरन पेड़ लगाने का फैसला क्यों?
क्या आदिवासियों की आजीविका सरकार के लिए महत्वहीन है?
विस्थापन नीति कहां है?
यदि यह जमीन ली जाती है तो—
विस्थापन नीति क्या है?
मुआवजा कितना है?
रोजगार की गारंटी कौन देगा?
या फिर सरकार बिना नीति के ही आदिवासियों को उजाड़ना चाहती है?
शेड्यूल एरिया की जमीन कॉरपोरेट को क्यों?
संविधान के तहत संरक्षित शेड्यूल एरिया की जमीन को स्थायी रूप से कॉरपोरेट कंपनी को देना किस कानून के तहत किया गया?
क्या यह पेसा और पांचवीं अनुसूची का खुला उल्लंघन नहीं है?
सारंडा को सैंक्चुअरी—आदिवासियों का क्या?
सारंडा में—
50 राजस्व गांव,
10 वन गांव,
75 हजार से अधिक आदिवासी रहते हैं।
सरकार साफ बताए—
इन्हें हटाया जाएगा या नहीं?
हटाया जाएगा तो कहां बसाया जाएगा?
देवस्थलों को उजाड़ने का अधिकार किसने दिया?
सरना स्थल, देशाउली, ससनदिरी, मसना जैसे पवित्र स्थल जिस जंगल में हैं, उसे सैंक्चुअरी बनाकर
आदिवासियों की आस्था और पहचान मिटाने का अधिकार सरकार को किसने दिया?
खनन बचाने सुप्रीम कोर्ट, आदिवासी चुप क्यों?
जब खदानों पर खतरा आया तो सरकार तुरंत सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई।
लेकिन—
वहां आदिवासियों के अधिकारों की बात क्यों नहीं रखी गई?
क्या सरकार सिर्फ कंपनियों की वकील है?
नो एंट्री मांगने पर लाठीचार्ज क्यों?
जो आदिवासी अपने क्षेत्र में “नो एंट्री” की मांग कर रहे थे—
उन पर लाठीचार्ज क्यों?
जेल क्यों भेजा गया?
क्या लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध हो गया है?
चारों तरफ से आदिवासी घिरे क्यों हैं?
शहरों में धर्मांतरण,
गांवों में घुसपैठ,
जंगलों में सरकारी बेदखली
तो आदिवासी जाएं तो जाएं कहां?
पेसा अधिनियम कहां गायब हो गया?
कैबिनेट से पास होने के बाद—
पेसा अधिनियम का ड्राफ्ट कहां है?
मीडिया और जनप्रतिनिधियों को क्यों नहीं दिया गया?
सरकार क्या छिपा रही है?
पेसा के बाद भी चुनाव किस आधार पर?
अगर पेसा लागू है तो—
शेड्यूल एरिया में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव क्यों?
पारंपरिक स्वशासन की भूमिका कहां गई?
हाई कोर्ट को दिखाने का खेल तो नहीं?
कहीं ऐसा तो नहीं कि—
पेसा अधिनियम सिर्फ कागजों में पास हुआ,
और असल मकसद हाई कोर्ट को गुमराह करना है?
कोल्हान खामोश नहीं रहेगा
चम्पाई सोरेन ने साफ चेतावनी दी— “वीर पोटो हो की धरती कोल्हान से फिर उलगुलान होगा।
आदिवासी अपनी जमीन, जंगल और अस्तित्व की लड़ाई पीछे नहीं हटेंगे।”














