मुख्यमंत्री के नाम पर पोस्टर, ज़मीनी हकीकत में जुआ माफिया की सरकार
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
नोवामुंडी और जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र आज कानून के राज का नहीं, बल्कि जुआ माफियाओं के साम्राज्य का गवाह बन चुका है। यहां सवाल सिर्फ अवैध जुए का नहीं, बल्कि राज्य की सत्ता, पुलिस प्रशासन और शासन की नैतिकता पर सीधा हमला है। जुआ माफिया धुना, बीरेंद्र, संदीप आदि—जो खुद को इतना ताकतवर मानता है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पुलिस से भी ऊपर समझता है—सप्ताह में 5 से 7 दिन खुलेआम ‘हब्बा-डब्बा’ और ‘मुर्गा पाड़ा’ जैसे प्रतिबंधित जुए का संचालन कर रहा है।

पोस्टरों में नशा विरोध, ज़मीन पर जुआ संरक्षण
“नशे का लत छोड़ें” के नारे और पुलिस संरक्षण में जुआ!
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तस्वीरें पूरे राज्य में पोस्टर-बैनर पर चमकती हैं—
“नशे का लत छोड़ें, जीवन से नाता जोड़ें”
लेकिन नोवामुंडी और जगन्नाथपुर में यह नारा मजाक बन चुका है। क्योंकि यही सरकार, यही प्रशासन, और यही पुलिस तंत्र कथित रूप से जुआ माफियाओं को संरक्षण देकर आदिवासी, गरीब और युवा पीढ़ी को जुए की आग में झोंक रहा है। सवाल सीधा है—पोस्टर असली हैं या नीति ढोंग?

सातों दिन जुआ, सातों दिन लूट
झारखंड-उड़ीसा के जुआरियों का सुरक्षित अड्डा बना नोवामुंडी
पश्चिम सिंहभूम का नोवामुंडी और जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र आज झारखंड और उड़ीसा के जुआरियों व शराब माफियाओं का सुरक्षित ठिकाना बन चुका है।
नोवामुंडी के लखनसाई में सप्ताह में दो दिन यानी रविवार और मंगलवार तथा चातोम्बासाई में सोमबार तथा शुक्रवार आदि को मुर्गापाड़ा एवं हब्बा डब्बा चलता है, जगन्नाथपुर के साप्ताहिक गुरुवार हाट बाजार जो थाना के आंखों के सामने है, तथा जैतगढ़ में शनिवार को बाजार क्षेत्र में
खुलेआम संचालन
बिना किसी भय के
यहां लाखों रुपये रोज़ गरीब आदिवासी और मजदूर वर्ग से जुए के जरिए निकाले जा रहे हैं। यह सिर्फ अवैध कारोबार नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक शोषण है—वह भी कानून की नाक के नीचे।
हारता गरीब, जीतता माफिया
जुआ नहीं—गरीबी की नसों से खून निकालने का धंधा
नोवामुंडी और जगन्नाथपुर के गांवों और बस्तियों में हालात भयावह हैं।
जुए में रोज़गार का पैसा हारता मजदूर
घर लौटता खाली हाथ,
घरेलू हिंसा,
मानसिक तनाव,
और फिर छोटे-बड़े अपराधों की ओर फिसलन
यह जुआ नहीं, समाज को तोड़ने की फैक्ट्री है। और इस फैक्ट्री के गेट पर पुलिस की चुप्पी सबसे बड़ा अपराध बन चुकी है।
बीरेंद्र का बेखौफ बयान
“हम अकेले नहीं, 15–20 लोगों का ग्रुप है”
जब नोवामुंडी के एक जुआ संचालक बीरेंद्र और जगन्नाथपुर से एक से संपर्क कर उसका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उसका जवाब चौंकाने वाला और व्यवस्था को नंगा करने वाला था।
उसने साफ कहा—
“हम अकेले थोड़े ये काम कर रहे हैं। हमारे साथ 15–20 लोगों का ग्रुप है, और भी लोग जुड़े हैं।”
यह बयान खुला संकेत है कि यह एक संगठित रैकेट है—जिसमें स्थानीय प्रभावशाली लोग, राजनीतिक संरक्षण, और प्रशासनिक तंत्र की मिलीभगत की बू साफ महसूस होती है।
पुलिस की भूमिका: लाचार या साझेदार?
कानून क्यों अंधा-बहरा बना हुआ है?
सबसे बड़ा सवाल—नोवामुंडी और जगन्नाथपुर थाना क्या कर रहा है?
क्या पुलिस को जानकारी नहीं?
या जानकारी है, लेकिन कार्रवाई की “अनुमति” नहीं?
या फिर हिस्सेदारी का खेल चल रहा है?
अगर सब कुछ खुलेआम है, तो छापे क्यों नहीं पड़ते?
गिरफ्तारी क्यों नहीं होती?
एफआईआर क्यों दर्ज नहीं होती?
चुप्पी खुद में सबसे बड़ा सबूत बनती जा रही है।

आदिवासी समाज पर सीधा हमला
संस्कृति नहीं, साजिश के तहत बर्बादी
नोवामुंडी और जगन्नाथपुर और आसपास का इलाका आदिवासी बहुल है। यहां जुआ सिर्फ पैसे नहीं लूटता, बल्कि
संस्कृति,
परिवार,
सामाजिक ताना-बाना
सब कुछ बर्बाद कर रहा है।
जिस समाज को सरकारी योजनाओं से सशक्त किया जाना था, उसे जुआ और शराब के दलदल में धकेला जा रहा है—वह भी राज्य के संरक्षण में।
राज्य सरकार से सीधे सवाल
मुख्यमंत्री जवाब दें!
क्या मुख्यमंत्री को नोवामुंडी, जगन्नाथपुर के जुआराज की जानकारी है?
अगर है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?
अगर नहीं, तो यह प्रशासनिक विफलता नहीं तो क्या है?
जुआ माफिया इतना बेखौफ क्यों है?
क्या पुलिस और माफिया के बीच साठगांठ है?
ये सवाल सिर्फ सरकार से नहीं, बल्कि लोकतंत्र से हैं।
खामोशी टूटी तो टूटेगा जुआ साम्राज्य
अब भी वक्त है—वरना इतिहास माफ नहीं करेगा
नोवामुंडी और जगन्नाथपुर का जुआराज अगर आज नहीं रुका, तो कल यह पूरे कोल्हान में फैल सकता है।
यह वक्त है—
ईमानदार पुलिस अधिकारियों के सामने आने का,
प्रशासन के आत्ममंथन का,
और सरकार के सख्त फैसले का।
वरना पोस्टरों के नारे और ज़मीनी सच्चाई के बीच की खाई जनआक्रोश में बदलते देर नहीं लगेगी।
निष्कर्ष– यह खबर नहीं—चेतावनी है
यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि सरकार और प्रशासन के लिए चेतावनी है।
अगर जुआ माफिया बीरेंद्र और उसके नेटवर्क पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई,
तो यह माना जाएगा कि
राज्य में कानून नहीं, माफियाओं का राज है।
अब देखना है—मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार कार्रवाई करती है या जुआ माफिया की हिम्मत और बढ़ती है।












