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नोवामुंडी में जुआराज : बच्चों के भविष्य पर खुला हमला

On: December 31, 2025 8:12 PM
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कानून नहीं, माफिया तय कर रहे हैं बच्चों का कल

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

नोवामुंडी थाना क्षेत्र आज कानून के राज का प्रतीक नहीं, बल्कि जुआ माफियाओं के बेलगाम साम्राज्य की शर्मनाक मिसाल बन चुका है। यहां सवाल केवल अवैध जुए का नहीं है, बल्कि बच्चों के भविष्य, आदिवासी समाज की आत्मा और राज्य की नैतिक जिम्मेदारी पर सीधा प्रहार है। जुआ माफिया बीरेंद्र और हेमंत की टीम इतने बेखौफ हैं कि वे खुद को मुख्यमंत्री और पुलिस प्रशासन से भी ऊपर समझते हैं। नतीजा—सप्ताह में 5 से 7 दिन खुलेआम ‘हब्बा-डब्बा’ और ‘मुर्गा पाड़ा’ जैसे प्रतिबंधित जुए, और उसी जुए में स्कूली बच्चे भी धकेले जा रहे हैं। नोवामुंडी के लखनसाई में सप्ताह में दो दिन यानी रविवार और मंगलवार तथा चातोम्बासाई में सोमवार तथा शुक्रवार को मुर्गापाड़ा एवं हब्बा डब्बा चलता है। इसके अलावे बाकी दिन भी जुआरियों की इच्छा पर इसका संचालन होता है

जुआ माफिया बीरेंद्र द्वारा ग्रुप में जुआ संबंधित डाला गया संदेश

पोस्टरों में नशा विरोध, ज़मीन पर बच्चों का शोषण

नारे खोखले, हकीकत खौफनाक

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तस्वीरों से सजे पोस्टर हर चौक-चौराहे पर दिखाई देते हैं—
“नशे का लत छोड़ें, जीवन से नाता जोड़ें”

लेकिन नोवामुंडी में यह नारा तमाशा बन चुका है। क्योंकि इसी सरकार और इसी प्रशासन के दौर में, पुलिस संरक्षण में जुआ फल-फूल रहा है और नाबालिग बच्चे इसकी चपेट में आ रहे हैं। जिस उम्र में बच्चों के हाथ में किताब होनी चाहिए, उस उम्र में जुआ की पर्ची और सट्टे का लालच थमाया जा रहा है। यह सिर्फ अपराध नहीं, पीढ़ीगत बर्बादी की साजिश है।


स्कूल से सीधे जुए के अड्डे तक

किताब छूटी, किस्मत हारने लगे बच्चे

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बच्चे स्कूल से लौटते समय या छुट्टी के बाद जुआ खेलने वालों की भीड़ में खिंचे चले जाते हैं

  • पहले तमाशबीन
  • फिर छोटी रकम से शुरुआत
  • और धीरे-धीरे लत का शिकार

माफिया इन्हीं बच्चों को आसान शिकार समझते हैं। उन्हें छोटे इनाम, लौटरी और फर्जी सपनों से फंसाया जाता है। परिणाम—पढ़ाई छूटती है, भविष्य टूटता है और अपराध की राह खुलती है।


सातों दिन जुआ, सातों दिन बच्चों की लूट

नोवामुंडी बना झारखंड–उड़ीसा का जुआ हब

नोवामुंडी थाना क्षेत्र आज झारखंड और उड़ीसा के जुआरियों का सुरक्षित अड्डा बन चुका है।

  • सप्ताह के सातों दिन
  • खुलेआम संचालन
  • बिना किसी डर के

माफियाओं ने बाकायदा “झारखंड–उड़ीसा” नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बना रखा है, जिसमें दर्जनों जुआरियों को जोड़ा गया है। ग्रुप में

  • जगह
  • समय
  • दांव
  • और लालच की पूरी जानकारी दी जाती है,
    ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग—यहां तक कि कम उम्र के लड़के भी—जुए के अड्डे तक खिंचे चले आएं।

गरीब का पैसा, बच्चों की उम्मीद—सब लूट

जुआ नहीं, सामाजिक नरसंहार

इस अवैध खेल में रोज़ लाखों रुपये गरीब आदिवासी और मजदूर परिवारों से निकाले जा रहे हैं।

  • पिता जुए में हारा
  • घर में तनाव बढ़ा
  • बच्चे पढ़ाई छोड़ने को मजबूर
  • और पूरा परिवार अपराध और हिंसा की ओर धकेला गया

यह जुआ नहीं, समाज को अंदर से खोखला करने की फैक्ट्री है। सबसे खतरनाक बात यह कि इसका पहला शिकार बच्चे बन रहे हैं।


हारता परिवार, जीतता माफिया

बचपन गिरवी, माफिया मालामाल

नोवामुंडी के गांवों में हालात भयावह हैं—

  • रोज़गार का पैसा जुए में हारता मजदूर
  • घर लौटता खाली हाथ
  • घरेलू हिंसा
  • मानसिक तनाव
  • और फिर छोटे-बड़े अपराध

इन सबके बीच सबसे ज्यादा नुकसान उठाता है बच्चा, जिसका बचपन डर, भूख और असुरक्षा में गुजरता है।

जुआ माफिया हेमंत द्वारा ग्रुप में जुआ संबंधित डाला गया संदेश

बीरेंद्र–हेमंत का घमंड

“खबर लिखने से क्या होगा, सिस्टम हमारे साथ है”

जुआ संचालक बीरेंद्र और हेमंत का जवाब व्यवस्था के मुंह पर तमाचा था—

“खबर लिखने से क्या होगा, जब सिस्टम ही हमारे साथ है।”

यह बयान साफ करता है कि यह कोई छोटा-मोटा धंधा नहीं, बल्कि संगठित रैकेट है, जिसमें

  • स्थानीय प्रभावशाली लोग
  • राजनीतिक संरक्षण
  • और प्रशासनिक मिलीभगत
    की गंध साफ महसूस होती है।

पुलिस की भूमिका: बच्चों की रक्षक या माफिया की साझेदार?

कानून क्यों मौन है?

सबसे बड़ा सवाल—नोवामुंडी थाना आखिर कर क्या रहा है?

  • क्या पुलिस को जानकारी नहीं?
  • या जानकारी है, लेकिन कार्रवाई की इजाजत नहीं?
  • या फिर हिस्सेदारी का खेल चल रहा है?

अगर जुआ खुलेआम है, तो
छापे क्यों नहीं पड़ते?
गिरफ्तारी क्यों नहीं होती?
एफआईआर क्यों दर्ज नहीं होती?

जब पुलिस चुप रहती है, तो यह चुप्पी बच्चों के खिलाफ अपराध में भागीदारी बन जाती है।


आदिवासी समाज और बच्चों पर दोहरा हमला

संस्कृति उजड़ रही, पीढ़ी बिखर रही

नोवामुंडी और आसपास का इलाका आदिवासी बहुल है। यहां जुआ केवल पैसा नहीं लूट रहा, बल्कि

  • संस्कृति
  • परिवार
  • सामाजिक ताना-बाना
    और सबसे बढ़कर बच्चों का भविष्य बर्बाद कर रहा है।

जिस समाज को सरकारी योजनाओं से सशक्त किया जाना था, उसे जुआ और शराब के दलदल में धकेला जा रहा है—वह भी राज्य की नाक के नीचे


राज्य सरकार से सीधे और कड़े सवाल

बच्चों के भविष्य पर सरकार की चुप्पी क्यों?

  1. क्या मुख्यमंत्री को नोवामुंडी में बच्चों को जुए में धकेले जाने की जानकारी है?
  2. अगर है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?
  3. अगर नहीं, तो यह प्रशासनिक विफलता नहीं तो क्या है?
  4. जुआ माफिया इतने बेखौफ क्यों हैं?
  5. क्या पुलिस और माफिया के बीच साठगांठ है?

ये सवाल सिर्फ सरकार से नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान से हैं।


खामोशी टूटी तो बचेगा बचपन

अब नहीं चेते तो कल बहुत देर हो जाएगी

अगर आज नोवामुंडी का जुआराज नहीं रोका गया, तो कल यह पूरे कोल्हान में फैल जाएगा और एक पूरी पीढ़ी बर्बाद हो जाएगी।
अब वक्त है—

  • ईमानदार पुलिस अधिकारियों के सामने आने का
  • प्रशासन के आत्ममंथन का
  • और सरकार के सख्त, त्वरित फैसले का

यह खबर नहीं—बच्चों के भविष्य की आखिरी चेतावनी

यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को बचाने की आखिरी चेतावनी है।
अगर जुआ माफिया बीरेंद्र–हेमंत और उनके नेटवर्क पर तत्काल, कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ माना जाएगा कि

राज्य में कानून नहीं, माफिया तय कर रहे हैं बच्चों का कल।

अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार बच्चों के साथ खड़ी होती है या जुआ माफियाओं की हिम्मत और बढ़ती है।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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