भ्रष्टाचार नक्सल खदान
अपराध राजनीति खेल समस्या स्वास्थ्य कार्यक्रम शिक्षा दुर्घटना सांस्कृतिक मनोरंजन मौसम कृषि ज्योतिष काम

गंगदा पंचायत में 8–9 साल से पानी का अकाल

On: January 7, 2026 11:14 PM
Follow Us:
---Advertisement---

14 गांव प्यासे, 15 दिन का अल्टीमेटम—अब आर-पार की लड़ाई

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

नक्सल प्रभावित सारंडा के गंगदा पंचायत में पेयजल संकट अब जनआक्रोश में बदल चुका है। हालात इतने बदतर हैं कि 14 गांवों के हजारों ग्रामीण पिछले आठ–नौ साल से बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, जबकि कागजों में करोड़ों की योजनाएं पूरी दिखा दी गईं। अब ग्रामीणों ने साफ शब्दों में ऐलान कर दिया है—

“15 दिन में पानी नहीं मिला, तो सलाई चौक पर एनएच अनिश्चितकाल के लिए जाम होगा।”


झूठे आश्वासन, खोखले वादे और सूखे नल

गंगदा गांव में मुंडा जोगो सुरीन और मुखिया राजू शांडिल की संयुक्त अध्यक्षता में हुई ग्रामीणों की बैठक में वर्षों का गुस्सा फूट पड़ा। बैठक में एक स्वर में कहा गया कि—

  • कई बार आंदोलन हुआ
  • कई बार सड़क जाम किया गया
  • हर बार प्रशासन, विभाग और संवेदक ने झूठा आश्वासन देकर आंदोलन तुड़वाया
  • लेकिन आज तक स्थायी समाधान नहीं हुआ

अब ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि इस बार आंदोलन खत्म नहीं होगा, जब तक हर घर तक पानी नहीं पहुंचे।


पाइप जमीन पर, पानी कागजों में!

मुखिया राजू शांडिल ने आरोप लगाया कि संवेदक हर आंदोलन के बाद दिखावटी सक्रियता दिखाता है।

  • जगह-जगह पाइप गिरा दिए गए
  • महीनों से पाइप ऐसे ही पड़े हैं
  • न बिछाव हुआ, न कनेक्शन
  • गांव-गांव तक पानी पहुंचाने की कोई मंशा नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि यह विकास नहीं, खुली धोखाधड़ी है।


पहले भी जाम हुआ था सलाई चौक, फिर भी नहीं सुधरे हालात

यह पहला अल्टीमेटम नहीं है।
17 जून को भी गंगदा पंचायत के ग्रामीणों ने सलाई चौक को अनिश्चितकालीन जाम किया था। उस वक्त
सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया ने झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय को पत्र लिखकर
👉 आसन/आसन्न जलापूर्ति योजना में बड़े घोटाले का आरोप लगाया था।


2017-18 की योजना, 2026 में भी अधूरी

समिति के अध्यक्ष एवं पंचायत के मुखिया सुखराम उर्फ राजू शांडिल ने बताया कि—
वर्ष 2017-18 में

  • मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजना
  • आसन्न जलापूर्ति योजना

के तहत हर घर नल, हर घर जल का वादा किया गया था।

लेकिन 8–9 साल बीत जाने के बाद भी

  • सिर्फ चार गांवों के कुछ घरों में ही आंशिक जलापूर्ति
  • बाकी 10 गांवों में न पाइपलाइन, न नल कनेक्शन

यह योजना नहीं, लूट की स्क्रिप्ट साबित हुई है।


चपाकल नहीं, डीप बोरिंग नहीं—बस उम्मीदें सूखी

गंगदा पंचायत की भयावह सच्चाई यह है कि—

  • पंचायत में न चपाकल है
  • डीप बोरिंग
  • गर्मी आते ही हालात और भयावह

महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग मीलों दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं।
यह हाल तब है, जब सरकार हर मंच से जल जीवन मिशन की सफलता के ढोल पीट रही है।


14 मार्च 2022: वादा किया गया, फिर धोखा

मुखिया राजू शांडिल ने बताया कि
14 मार्च 2022 को सलाई चौक पर बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था। उस वक्त
मनोहरपुर-चक्रधरपुर डिवीजन के कार्यपालक अभियंता ने
👉 दो चरणों में पाइपलाइन कार्य पूरा करने का वादा किया था।

लेकिन आज

  • तीन साल बीत चुके हैं
  • काम अधूरा है
  • अभियंता का फोन तक नहीं उठता

यह चुप्पी नहीं, जवाबदेही से भागने की रणनीति है।


15 करोड़ की योजना, पानी शून्य!

ग्रामीणों का आरोप है कि
दोदारी पेयजल आपूर्ति योजना की लागत करीब 15 करोड़ रुपए थी।

  • पूरी राशि की निकासी हो चुकी है
  • लेकिन जमीन पर पानी का एक कतरा नहीं

अब सवाल यह है—

15 करोड़ गए कहां?
काम किसने किया?
भुगतान किस आधार पर हुआ?


सीबीआई या रिटायर्ड जज से जांच की मांग

ग्रामीण अब विभागीय जांच से संतुष्ट नहीं हैं।
उनकी मांग है कि—

  • जांच सीबीआई से हो
  • या हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से
  • या किसी स्वतंत्र एजेंसी से

ग्रामीणों का कहना है कि

“जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होगी,
तब तक सच सामने नहीं आएगा।”


15 दिन का अल्टीमेटम—अब नहीं झुकेंगे

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि—
यदि 15 दिन के भीतर

  • सभी 14 गांवों में
  • पाइपलाइन बिछाकर
  • हर घर तक पानी नहीं पहुंचाया गया

तो एनएच-33 स्थित सलाई चौक को अनिश्चितकाल के लिए जाम कर दिया जाएगा।

ग्रामीणों ने साफ कहा—

“अब आर-पार की लड़ाई होगी।”


जिम्मेदारी तय: विभाग, प्रशासन और ठेकेदार दोषी

ग्रामीणों ने पहले ही चेतावनी दे दी है कि—
यदि सड़क जाम होता है,
तो उसकी पूरी जिम्मेदारी होगी—

  • पेयजल एवं स्वच्छता विभाग
  • मनोहरपुर-चक्रधरपुर प्रमंडल
  • और संबंधित ठेकेदार की

सवाल जो सरकार को जवाब देना होगा

  • 8–9 साल में पानी क्यों नहीं पहुंचा?
  • 15 करोड़ की राशि किस मद में खर्च हुई?
  • बिना काम पूरा हुए भुगतान कैसे हुआ?
  • दोषी अभियंता और संवेदक पर कार्रवाई क्यों नहीं?

पानी नहीं, अब संघर्ष बहेगा

गंगदा पंचायत की लड़ाई सिर्फ पानी की नहीं,
यह भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ जनविद्रोह है।

अगर 15 दिन में समाधान नहीं हुआ,
तो सलाई चौक पर जाम
सिर्फ सड़क नहीं रोकेगा,
बल्कि सरकार की संवेदनहीनता को भी बेनकाब करेगा।

अब सवाल यही है—
क्या सरकार जागेगी,
या गंगदा की प्यास
एक और आंदोलन को जन्म देगी?

SINGHBHUMHALCHAL NEWS

सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment