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किरिबुरु–मेघाहातुबुरु, गुआ, बोलनी के संथाली समाज का पारंपरिक ‘बीर सोले’

On: January 12, 2026 6:30 PM
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जंगल, नदी और संस्कृति के संग पारिवारिक पिकनिक का भव्य आयोजन

रिपोर्ट: शैलेश सिंह
किरिबुरु, मेघाहातुबुरु, बोलानी और गुआ क्षेत्र के संथाली समुदाय द्वारा रविवार 11 जनवरी 2026 को पारंपरिक वार्षिक पारिवारिक पिकनिक ‘बीर सोले’ का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन गुआ नदी के समीप ‘तारे जमीन पर’ स्थित गुआ रिसॉर्ट परिसर में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में लगभग 25 परिवारों के 80 से 100 सदस्य पूरे उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ शामिल हुए।

क्या है ‘बीर सोले’?

संथाली समाज की सामूहिक परंपरा

‘बीर सोले’ संथाली भाषा में जंगल और प्रकृति के सान्निध्य में परिवारों के सामूहिक मिलन का प्रतीक है। यह केवल पिकनिक नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का माध्यम है। सदियों से संथाली समाज जंगल, पहाड़ और नदियों के बीच जीवन जीता आया है और ‘बीर सोले’ उसी प्रकृति-आधारित जीवनशैली की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है।

खदान, सुरक्षा बल और विभागों से जुड़े परिवार हुए शामिल

इस आयोजन में सेल (SAIL) की किरिबुरु, मेघाहातुबुरु, बोलानी और गुआ खदानों के अधिकारी-कर्मचारी, सीआईएसएफ (CISF) के जवान अपने परिवारों के साथ, किरिबुरु हिलटॉप पोस्ट ऑफिस के पोस्टमास्टर तथा बीएसएनएल (BSNL) मेघाहातुबुरु के स्टाफ सदस्य भी शामिल हुए। इससे यह आयोजन केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रतीक बन गया।

मुख्य अतिथि और सम्मान समारोह

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में सेल मेघाहातुबुरु (MBR) के मैकेनिकल विभाग के विभागाध्यक्ष श्री कल्याण मांझी उपस्थित रहे। उन्होंने खेल-कूद प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान कर प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया।
इसी अवसर पर एक भावुक विदाई समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें फरवरी 2026 में सेवानिवृत्त हो रहे सेल कर्मचारी सोनू मुर्मू को संथाली धोती और मफलर भेंट कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान संथाली समाज की उस परंपरा को दर्शाता है, जिसमें बुजुर्गों और सेवाभावी व्यक्तियों को सम्मान और कृतज्ञता के साथ विदा किया जाता है।

खेल-कूद और पारंपरिक मनोरंजन

पिकनिक के दौरान बच्चों, महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
‘तुकुज दाल’ (हंडी फोड़ना) प्रतियोगिता कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही।
बैलून पास
म्यूजिकल चेयर
स्पून बॉल
रस्सी दौड़
इन खेलों ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया। हंसी, तालियों और पारंपरिक गीतों के बीच संथाली समाज की जीवंतता साफ झलकती रही।

संथाली संस्कृति और रीति-रिवाजों की झलक

कार्यक्रम के दौरान संथाली समाज की सामूहिक भोजन परंपरा, आपसी सहयोग और बराबरी की भावना भी देखने को मिली। संथाली समाज में भोजन, उत्सव और दुख-सुख को साझा करना एक मूल संस्कार माना जाता है। ‘बीर सोले’ के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का भी प्रयास किया गया।

सामुदायिक एकजुटता का संदेश

आयोजन समिति ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य जंगल और पहाड़ी इलाकों में बसे संथाली परिवारों को एक मंच पर लाना, सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखना और आपसी मेल-जोल को मजबूत करना है। समिति ने अपील की कि आने वाले वर्षों में भी किरिबुरु–मेघाहातुबुरु क्षेत्र के सभी संथाली परिवार इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।

आयोजन की सफलता के सूत्रधार

इस सफल आयोजन के पीछे मेघाहातुबुरु से
अर्जुन हेम्ब्रम, रमेश मुर्मू, जे.डी. मुर्मू, नागराज मुर्मू, रामदास मांझी, श्याम चरण टुडू
और किरिबुरु से
सीधा मरांडी, रामजीत हेम्ब्रम, अश्विन मांझी, लखपति टुडू, लेबा मुर्मू और दामू मुर्मू
का विशेष योगदान रहा। इन सभी की योजना, समन्वय और मेहनत ने इस दुर्गम क्षेत्र में इतने भव्य आयोजन को सफल बनाया।

सेल प्रबंधन को धन्यवाद

आयोजन समिति ने सेल मेघाहातुबुरु प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने बस सुविधा उपलब्ध कराकर आयोजन को सुगम बनाया।

परंपरा, प्रकृति और पहचान का संगम

कुल मिलाकर ‘बीर सोले’ न केवल एक पिकनिक रहा, बल्कि यह संथाली समाज की सांस्कृतिक चेतना, सामूहिकता और प्रकृति से जुड़ाव का जीवंत उत्सव बनकर उभरा, जिसने सभी प्रतिभागियों को यादगार अनुभव दिया।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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