नक्सली प्रवक्ता का ऑडियो संदेश, पुलिस कार्रवाई पर लगाए गंभीर आरोप
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी के प्रवक्ता आजाद ने एक वॉयस संदेश जारी कर सारंडा में हालिया मुठभेड़ में मारे गए अपने 17 साथियों के मामले में सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अपने बयान में उसने इस कार्रवाई को “फर्जी मुठभेड़” करार देते हुए इसे एक सुनियोजित साजिश बताया है।
आजाद ने दावा किया कि यह कार्रवाई सीआरपीएफ डीजी द्वारा 20 जनवरी को की गई “निर्णायक प्रहार” की घोषणा के बाद शुरू हुई और इसके तहत जंगल क्षेत्रों में हवाई हमले और जमीनी ऑपरेशन तेज किए गए।

20 जनवरी की घोषणा के बाद बदला हालात का मिजाज
नक्सली प्रवक्ता के अनुसार, 20 जनवरी को सीआरपीएफ के डीजी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह द्वारा सारंडा क्षेत्र में माओवादियों पर निर्णायक प्रहार की सार्वजनिक घोषणा के बाद स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई।
उसने कहा कि इस घोषणा के तुरंत बाद 21 जनवरी से ही सारंडा के बालिबा, तिरिलपोसी, दीघा और बाबूडेरा गांव के बीच के जंगलों में लगातार सैन्य गतिविधियां तेज कर दी गईं।
गनशिप हेलीकॉप्टर से हमले का आरोप
आजाद ने अपने संदेश में आरोप लगाया कि 21 जनवरी से लेकर कई दिनों तक सेना के दो से तीन गनशिप हेलीकॉप्टरों के जरिए लगातार घंटों हवाई हमले किए गए।
उसका दावा है कि ये हमले “अवैध, असंवैधानिक और अघोषित” थे और ग्रामीणों को बिना किसी सूचना के अंजाम दिए गए।
प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई से वन ग्रामों में रहने वाले आदिवासी समुदाय में भारी दहशत फैल गई है।
ग्रामीणों में भय, गांव छोड़ने को मजबूर
नक्सली प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि हवाई हमलों और सुरक्षा बलों की घेराबंदी के कारण कई गांवों के लोग अपना घर छोड़कर जंगल या सुरक्षित स्थानों की ओर भागने को मजबूर हो रहे हैं।
उसने कहा कि बालिबा, तिरिलपोसी, दीघा और बाबूडेरा गांव के आसपास के इलाकों में सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। ग्रामीणों को बिना सूचना दिए इस तरह की कार्रवाई को उसने मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया।
22 जनवरी की मुठभेड़ पर सीधा आरोप
आजाद ने 22 जनवरी को छोटानागरा थाना क्षेत्र के कुमडीह और बहदा गांव के बीच जंगल में हुई मुठभेड़ को पूरी तरह फर्जी करार दिया है।
उसका कहना है कि कोबरा 209, झारखंड जगुआर, सीआरपीएफ और जिला पुलिस के संयुक्त दल ने एक विशेष साजिश के तहत उनके 20 सदस्यीय दल को निशाना बनाया।
जीपीएस ट्रैकर से ट्रैप करने का दावा
प्रवक्ता के अनुसार, सुरक्षा बलों ने उनके अस्थायी पड़ाव का पता लगाने के लिए एक विशेष जीपीएस ट्रैकर भेजा और उसी के आधार पर हमला किया गया।
उसने कहा कि पहले भी कई बार इस तरह के जीपीएस ट्रैकर के माध्यम से उनके ठिकानों को निशाना बनाया गया है और कुछ मामलों में उन्हें भारी नुकसान भी उठाना पड़ा है।
खाद्य सामग्री और दवाओं में जहर मिलाने का आरोप
आजाद ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस द्वारा भेजी गई खाद्य सामग्री और दवाओं में जहर मिलाकर उनके साथियों को फंसाया गया।
उसने दावा किया कि पहले भी ऐसे प्रयास किए गए थे, जिनमें कुछ साथी गंभीर रूप से प्रभावित हुए लेकिन उन्हें बचा लिया गया।
इस बार भी यही तरीका अपनाकर उनके दल को कमजोर किया गया और फिर हमला किया गया।
अनल दा और अनमोल दा की मौत का दावा
प्रवक्ता ने बताया कि इस कार्रवाई में केंद्रीय कमेटी सदस्य सह बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी के सचिव पतिराम माझी उर्फ अनल दा उर्फ रमेश और उड़ीसा राज्य कमेटी के सदस्य लालचंद हेंब्रोम उर्फ अनमोल दा उर्फ सुशांत समेत कुल 17 नक्सलियों की मौत हुई है।
उसने इस घटना को “फर्जी मुठभेड़ में हत्या” करार दिया है।

संख्या को लेकर भी सवाल
आजाद ने कहा कि पहले 10 नक्सलियों के मारे जाने की बात सामने आई, फिर यह संख्या 15, 16 और बाद में 17 बताई गई।
उसका आरोप है कि यह आंकड़ों में बदलाव इस बात का संकेत है कि पूरी कार्रवाई पारदर्शी नहीं थी और जानबूझकर जानकारी को टुकड़ों में सामने लाया गया।
बाकी बचे साथियों की जान को खतरा
प्रवक्ता ने दावा किया कि इस मुठभेड़ में उनके तीन साथी जीवित बचे हैं, जिन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
उसने आशंका जताई कि इन तीनों की भी “एक-एक करके हत्या” की जा सकती है।
इस बयान के साथ उसने सुरक्षा बलों पर गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया है।
पहले भी हुए ऐसे हमले: आजाद का दावा
अपने संदेश में आजाद ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब जीपीएस ट्रैकर के माध्यम से उनके ठिकानों पर हमला किया गया हो।
उसने दावा किया कि पहले भी कोबरा 209 और पुलिस द्वारा इसी तरीके से कई बार उनके अस्थायी शिविरों पर कार्रवाई की गई है।
कुछ मामलों में उनके संगठन को भारी नुकसान हुआ, जबकि कुछ हमलों को वे विफल करने में सफल रहे।
कोबरा जवानों के हताहत होने का दावा
आजाद ने यह भी दावा किया कि पूर्व में जीपीएस ट्रैकर के कारण हुए कुछ हमलों में कोबरा 209 के जवान भी मारे गए थे।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
तीव्र निंदा और विरोध का ऐलान
नक्सली प्रवक्ता ने इस पूरी कार्रवाई की तीव्र निंदा करते हुए कहा कि उनकी कमेटी इस कथित हवाई हमले और मुठभेड़ का कड़ा विरोध करती है।
जल्द विस्तृत जानकारी देने की बात
आजाद ने अपने संदेश के अंत में कहा कि फिलहाल वह संक्षेप में जानकारी दे रहा है, लेकिन जल्द ही इस घटना से जुड़े तथ्यों को विस्तार से सार्वजनिक किया जाएगा।
उसका कहना है कि आने वाले दिनों में इस कथित फर्जी मुठभेड़ को लेकर और भी खुलासे किए जाएंगे।
पुलिस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
इस पूरे मामले पर अब तक पुलिस या सुरक्षा बलों की ओर से नक्सली प्रवक्ता के आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सुरक्षा एजेंसियां लगातार यह दावा करती रही हैं कि सारंडा क्षेत्र में चलाया गया अभियान नक्सल उन्मूलन के तहत वैध और रणनीतिक कार्रवाई है।

सारंडा फिर बना सुर्खियों में
सारंडा का जंगल क्षेत्र एक बार फिर नक्सल गतिविधियों और सुरक्षा बलों के अभियानों के कारण सुर्खियों में आ गया है।
जहां एक ओर सुरक्षा बल इसे बड़ी कामयाबी बता रहे हैं, वहीं नक्सली संगठन इसे फर्जी मुठभेड़ और मानवाधिकार उल्लंघन का मामला बता रहे हैं।
सच क्या, जांच के बाद ही होगा स्पष्ट
नक्सली प्रवक्ता के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई के बीच सच्चाई क्या है, यह स्वतंत्र जांच और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल, यह घटना झारखंड के सारंडा क्षेत्र में चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर रही है।














