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संवेदकों के भुगतान पर संकट, उप मुख्य सचेतक सोनाराम सिंकु ने ग्रामीण कार्य विभाग से की त्वरित हस्तक्षेप की मांग

On: February 12, 2026 9:59 AM
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कार्यपालक अभियंता की सेवानिवृत्ति से ठप पड़ा भुगतान तंत्र, विकास कार्यों पर मंडराया संकट

रिपोर्ट: शैलेश सिंह।
पश्चिमी सिंहभूम जिले में ग्रामीण कार्य विभाग के अंतर्गत चल रही विकास योजनाओं पर प्रशासनिक शिथिलता का साया गहराने लगा है। कार्यपालक अभियंता राधेश्याम मांझी के सेवा निवृत्त होने के बाद विभागीय अधिकारों के अभाव में संवेदकों (ठेकेदारों) का भुगतान बाधित हो गया है, जिससे जिले में सड़क, पुलिया और ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
इस गंभीर स्थिति को लेकर झारखंड विधानसभा के उप मुख्य सचेतक एवं जगन्नाथपुर (ST) के विधायक सोनाराम सिंकु ने ग्रामीण कार्य विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर तत्काल विभागीय हस्तक्षेप की मांग की है।

प्रभारी नियुक्ति हुई, लेकिन अधिकार अधूरे

जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त, पश्चिमी सिंहभूम चाईबासा द्वारा 9 फरवरी 2026 को जारी आदेश के तहत चक्रधरपुर प्रमंडल में पदस्थापित अधिसूचित कार्यपालक अभियंता को चाईबासा कार्य प्रमंडल का प्रभारी बनाया गया है।
लेकिन समस्या यह है कि यह व्यवस्था केवल जिला स्तर पर की गई है, जिसकी विभागीय स्तर से अभी तक पुष्टि नहीं हुई है।
परिणामस्वरूप प्रभारी अभियंता को संपूर्ण वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार नहीं मिल सके हैं, खासकर संवेदकों को भुगतान करने का अधिकार।

भुगतान नहीं, तो काम भी नहीं

सूत्रों के अनुसार, कई योजनाओं का कार्य पूरा होने के बावजूद संवेदकों को भुगतान नहीं मिल पाया है। इससे न सिर्फ ठेकेदारों में असंतोष है, बल्कि भविष्य के कार्यों पर भी ब्रेक लग गया है।
ग्रामीण सड़कों, पुल-पुलियों और अन्य निर्माण कार्यों में सुस्ती साफ देखी जा रही है।
स्थानीय संवेदकों का कहना है कि
“जब तक कार्यपालक अभियंता को पूर्ण वित्तीय अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक बिल पास नहीं हो सकता। इससे मजदूरों का भुगतान भी रुका हुआ है।”

विधायक सोनाराम सिंकु का हस्तक्षेप

उप मुख्य सचेतक सोनाराम सिंकु ने प्रधान सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग को भेजे पत्र में स्पष्ट कहा है कि—
“जिला के विकास हित में प्रभारी कार्यपालक अभियंता को विभागीय स्तर से सम्पूर्ण वित्तीय अधिकार दिया जाना आवश्यक है, ताकि सभी स्तरों पर कार्य निष्पादन हो सके और विशेष रूप से संवेदकों को भुगतान किया जा सके।”
उन्होंने मांग की है कि जिला उपायुक्त द्वारा जारी आदेश की विभागीय पुष्टि कर प्रभारी अभियंता को स्वतंत्र रूप से कार्य करने की अनुमति दी जाए।

विकास कार्यों पर प्रशासनिक लापरवाही भारी

जानकारों का मानना है कि यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया की देरी नहीं, बल्कि विकास कार्यों के प्रति गंभीर लापरवाही का संकेत है।
यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो—
निर्माण कार्य ठप हो जाएंगे
मजदूरों की मजदूरी प्रभावित होगी
ग्रामीण क्षेत्रों में नाराजगी बढ़ेगी
सरकार की योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे

जिला प्रशासन पर भी उठे सवाल

हालांकि जिला प्रशासन ने प्रभारी व्यवस्था की है, लेकिन बिना विभागीय स्वीकृति के यह व्यवस्था अधूरी साबित हो रही है।
अब सवाल यह है कि—
क्या विभागीय स्तर पर फाइलें जानबूझकर रोकी जा रही हैं?
या फिर यह केवल प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है?
जनता और संवेदक दोनों इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

उम्मीद की किरण या फिर कागजी कार्रवाई?

सोनाराम सिंकु द्वारा उठाया गया यह मुद्दा अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
यदि ग्रामीण कार्य विभाग शीघ्र निर्णय लेता है, तो जिले के रुके हुए विकास कार्य फिर से गति पकड़ सकते हैं।
लेकिन यदि मामला फाइलों में उलझा रहा, तो यह पश्चिमी सिंहभूम के ग्रामीण विकास पर सीधा हमला माना जाएगा।

SINGHBHUMHALCHAL NEWS

सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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