सीटू व संयुक्त यूनियन के नेतृत्व में भारत बंद को समर्थन, टायर जलाकर सड़क जाम
गुवा संवाददाता।
देशव्यापी भारत बंद के आह्वान के समर्थन में गुवा शहर में सीटू (CITU) एवं संयुक्त यूनियन के तत्वावधान में मजदूरों ने जोरदार प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए श्रम कानूनों के विरोध में सैकड़ों श्रमिक सड़कों पर उतर आए और मुख्य मार्ग को जाम कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। यूनियन के जनरल सचिव कॉमरेड रमेश गोप के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन ने गुवा की सामान्य जनजीवन व्यवस्था को कई घंटों तक पूरी तरह प्रभावित कर दिया।
प्रदर्शन के दौरान यूनियन कार्यकर्ताओं ने सड़क पर टायर जलाकर बंद को प्रभावी बनाया। देखते ही देखते गुवा की प्रमुख सड़कें जाम हो गईं और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यात्री बसें, निजी वाहन, मालवाहक ट्रक और दोपहिया वाहन जहां-तहां फंसे रहे। स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

🔥 “नए श्रम कानून मजदूरों के अधिकारों पर हमला” – कॉमरेड रमेश गोप
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू यूनियन के जनरल सचिव कॉमरेड रमेश गोप ने केंद्र सरकार की श्रम नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा—
“सरकार ने चार नए श्रम संहिताओं के नाम पर मजदूरों के वर्षों पुराने अधिकारों को कमजोर कर दिया है। इससे स्थायी रोजगार की जगह ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलेगा और मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।”
उन्होंने आरोप लगाया कि नए श्रम कानून उद्योगपतियों और कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाए गए हैं, जबकि मजदूरों की आवाज को दबाया जा रहा है।
कॉमरेड गोप ने कहा कि न्यूनतम वेतन, काम के घंटे, ओवरटाइम, भविष्य निधि और बीमा जैसी बुनियादी सुविधाओं पर संकट खड़ा हो गया है।
📢 “मजदूर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़”
यूनियन नेताओं ने अपने भाषण में कहा कि मजदूर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन आज सबसे ज्यादा उपेक्षा भी उन्हीं की हो रही है।
उन्होंने कहा—
“सरकार विकास की बात करती है, लेकिन विकास तभी संभव है जब मजदूर सुरक्षित और सम्मान के साथ काम कर सके। यदि मजदूर कमजोर होगा, तो देश की प्रगति भी कमजोर होगी।”
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि श्रमिक संगठनों से बिना संवाद किए श्रम कानूनों को लागू कर दिया गया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
🗣️ नारेबाजी से गूंज उठा गुवा
प्रदर्शन के दौरान पूरे इलाके में नारों की गूंज सुनाई दी—
“श्रम कानून वापस लो”
“मजदूर एकता ज़िंदाबाद”
“मजदूर विरोधी नीति नहीं चलेगी”
“कॉरपोरेट नहीं, मजदूरों का राज चाहिए”
“जब तक न्याय नहीं, तब तक संघर्ष जारी”
मजदूरों के हाथों में झंडे और बैनर थे, जिन पर सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लिखे हुए थे। पूरे माहौल में रोष और एकजुटता साफ नजर आ रही थी।
🚧 यातायात व्यवस्था चरमराई
सड़क जाम के कारण गुवा की यातायात व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई। घंटों तक सड़क पर जाम लगा रहा। कई एंबुलेंस और आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहन भी जाम में फंसे नजर आए, हालांकि बाद में यूनियन के कार्यकर्ताओं ने उन्हें रास्ता देकर जाने दिया।
स्थानीय व्यापारियों को भी नुकसान उठाना पड़ा। बाजारों में ग्राहक नहीं पहुंच सके और कई दुकानें बंद रहीं। स्कूलों और कार्यालयों में उपस्थिति कम रही।
🌍 देशव्यापी आंदोलन का हिस्सा बना गुवा
सीटू यूनियन ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल गुवा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में विभिन्न श्रमिक संगठनों द्वारा भारत बंद को समर्थन दिया जा रहा है।
झारखंड समेत कई राज्यों में मजदूर संगठनों ने रेल रोको, सड़क जाम और धरना-प्रदर्शन कर सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की।
संयुक्त यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह संघर्ष किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि पूरे मजदूर वर्ग का संघर्ष है।
👥 आम जनता की मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस आंदोलन को लेकर स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही।
कई लोगों ने मजदूरों की मांगों को जायज बताते हुए उनका समर्थन किया, जबकि कुछ लोगों ने सड़क जाम और टायर जलाने जैसी गतिविधियों पर नाराजगी जताई।
एक स्थानीय नागरिक ने कहा—
“मजदूरों की समस्याएं सही हैं, लेकिन सड़क जाम से आम जनता को परेशानी होती है। आंदोलन का तरीका थोड़ा और संयमित होना चाहिए।”
वहीं कुछ युवाओं ने कहा कि सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए मजदूरों के पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
🕊️ शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली प्रदर्शन
हालांकि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन टायर जलाने और सड़क जाम के कारण प्रशासन सतर्क रहा। पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा और स्थिति पर नजर बनाए रखी। किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
यूनियन नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन अहिंसक है और भविष्य में भी वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को उठाते रहेंगे।













