लौह अयस्क माफिया पर सबसे बड़ी चोट
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
झारखंड–उड़ीसा के लौहांचल कहे जाने वाले बड़ाजामदा, नोवामुंडी और बड़बिल क्षेत्र में वर्षों से चल रहे अवैध लौह और मैंगनीज अयस्क तस्करी के साम्राज्य पर आखिरकार पुलिस ने बड़ा प्रहार किया है।
पश्चिम सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक अमित रेणु के नेतृत्व में नोवामुंडी, बड़ाजामदा और हाट गम्हरिया थाना पुलिस ने सबसे चर्चित लौह अयस्क माफिया फहीम उर्फ राजा और उसके गिरोह की काली करतूतों का भंडाफोड़ किया है।
16/17 फरवरी की मध्यरात्रि वाहन जांच के दौरान पुलिस ने अवैध लौह अयस्क (साइज ओर) से लदे दो ट्रेलर जब्त कर लिए। यह कार्रवाई न सिर्फ माफिया नेटवर्क के लिए झटका है, बल्कि पूरे लौहांचल में बैठे अवैध कारोबारियों के लिए खुली चेतावनी भी है।

क्राइम मीटिंग के बीच माफिया की चालाकी
16 फरवरी को चाईबासा में पुलिस अधीक्षक अमित रेणु द्वारा एक अहम क्राइम मीटिंग बुलाई गई थी। इसमें जिले के सभी थाना प्रभारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद थे।
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक की भनक माफिया फहीम और उसके नेटवर्क को पहले से थी। उसने यह मान लिया था कि पुलिस अधिकारी बैठक में व्यस्त रहेंगे और इसी का फायदा उठाकर रात के अंधेरे में लौह अयस्क की तस्करी शुरू कर दी।
लेकिन यह उसकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई।
गुप्त सूचना और त्वरित कार्रवाई
क्राइम मीटिंग से लौटते समय एसपी अमित रेणु को गुप्त सूचना मिली कि बड़ाजामदा और हाट गम्हरिया की ओर से अवैध साइज ओर से लदे ट्रेलर रवाना किए जा रहे हैं।
उन्होंने तत्काल बड़ाजामदा ओपी प्रभारी सह नोवामुंडी थाना प्रभारी बालेश्वर उरांव और हाट गम्हरिया थाना प्रभारी को निर्देश दिया।
कुछ ही देर में पुलिस टीम ने अलग-अलग स्थानों पर घेराबंदी कर दोनों ट्रेलर को पकड़ लिया। ट्रेलरों में भारी मात्रा में अवैध लौह अयस्क लदा हुआ था, जिसके कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

कैसे चलता था फहीम गैंग का काला कारोबार
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बड़ाजामदा क्षेत्र में “श्रीराम मेटालिक” नाम से एक अवैध क्रेशर और प्लॉट संचालित हो रहा था।
इस क्रेशर के पास न तो पर्यावरण विभाग का प्रमाण पत्र है और न ही प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ा कोई वैध आदेश।
इस अवैध क्रेशर का मालिक राजा साहू बताया जा रहा है, जो फहीम उर्फ राजा के साथ पार्टनरशिप में काम करता था।
इस गिरोह में बड़बिल का नन्हे कुरैशी, जमशेदपुर का प्रेम जी समेत कई बड़े नाम शामिल हैं।
रात के अंधेरे में जंगलों की लूट
फहीम गैंग की कार्यप्रणाली बेहद संगठित और सुनियोजित थी।
बड़ाजामदा और आसपास के घने जंगलों से रात के समय अवैध खनन कराया जाता था।
खनन किए गए लौह अयस्क पत्थरों को सीधे ट्रकों और ट्रेलरों में भरकर राजा क्रेशर प्लांट तक पहुंचाया जाता था।
वहां इन पत्थरों को क्रश कर अलग-अलग साइज ओर में बदला जाता था, ताकि उन्हें विभिन्न औद्योगिक प्लांटों में भेजा जा सके।
फर्जी चालान का खेल: वैध फाइंस के नाम पर अवैध साइज ओर
सबसे बड़ा खेल जिला खनन विभाग के नाम पर जारी होने वाले माइनिंग चालानों का था।
फहीम गैंग पहले कुछ मात्रा में वैध फाइंस अयस्क की खरीद करता था और उसके नाम पर खनन विभाग से माइनिंग चालान प्राप्त कर लेता था।
इसके बाद उसी चालान का इस्तेमाल कर अवैध साइज ओर को विभिन्न स्टील प्लांटों में भेज दिया जाता था।
इस तरह वैध दस्तावेजों की आड़ में अवैध अयस्क का करोड़ों का व्यापार चलता रहा।
कानून को खुली चुनौती
यह पूरा नेटवर्क वर्षों से कानून को खुली चुनौती दे रहा था।
जंगलों का सीना चीरकर खनन, पर्यावरण नियमों की धज्जियां और प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर कारोबार—यही इस माफिया गैंग की पहचान बन चुकी थी।
अब सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार कैसे चलता रहा और प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?

खनन विभाग से मांगी गई जांच रिपोर्ट
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए खनन विभाग को पत्र लिखकर जब्त ट्रेलरों और अयस्क की जांच कराने को कहा है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद पूरे नेटवर्क पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, इस केस में सिर्फ ड्राइवर या छोटे कर्मचारियों पर नहीं, बल्कि पूरे माफिया सिंडिकेट पर मामला दर्ज किया जाएगा।
क्रेशर प्लांट क्यों नहीं सील हो रहे?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि लौहांचल क्षेत्र में जिन क्रेशरों के पास पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित कोई प्रमाण पत्र नहीं है, उन्हें प्रशासन अब तक सील क्यों नहीं कर रहा?
सूत्र बताते हैं कि राजा क्रेशर के पास ही राहुल क्रेशर नाम का एक और प्लॉट है, जिसका इस्तेमाल जगन्नाथपुर और आसपास के इलाकों के माफिया लगातार अवैध लौह अयस्क तस्करी के लिए कर रहे हैं।
क्या इन क्रेशरों को किसी राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण का कवच मिला हुआ है?
लौहांचल का पर्यावरण खतरे में
अवैध खनन और क्रेशर प्लांटों की वजह से बड़ाजामदा, नोवामुंडी और बड़बिल क्षेत्र का पर्यावरण बुरी तरह प्रभावित हो चुका है।
जंगल उजड़ रहे हैं, पहाड़ खोखले हो रहे हैं और नदियों में लाल मिट्टी का जहर घुल रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी पीने लायक नहीं बचा और खेती पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है।
पुलिस बनाम माफिया: अब आर-पार की लड़ाई?
एसपी अमित रेणु की इस कार्रवाई को माफिया नेटवर्क के खिलाफ अब तक की सबसे मजबूत पहल माना जा रहा है।
यह संकेत है कि पुलिस अब सिर्फ छोटे वाहनों या ड्राइवरों को पकड़ने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पूरे सिंडिकेट की जड़ पर वार करना चाहती है।
लेकिन सवाल यह भी है कि क्या यह अभियान लगातार जारी रहेगा या कुछ दिनों बाद फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा?
जनता का गुस्सा, प्रशासन से सवाल
स्थानीय लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है।
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन से उन्हें कोई फायदा नहीं, सिर्फ नुकसान हुआ है—न रोजगार मिला, न विकास, सिर्फ प्रदूषण और बीमारी।
लोग पूछ रहे हैं—
* क्या फहीम उर्फ राजा जैसे माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ था?
* क्या खनन विभाग के कुछ अफसर इस खेल में शामिल थे?
* क्या अवैध क्रेशर प्लांटों पर कभी सख्त कार्रवाई होगी?
माफिया राज का सच
फहीम उर्फ राजा और उसके नेटवर्क का मामला यह साबित करता है कि लौहांचल में माफिया राज कितनी गहराई तक फैला हुआ है।
यह केवल दो ट्रेलरों की जब्ती का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पोल खोलने वाला प्रकरण है।
यदि प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में फिर वही ट्रेलर, वही क्रेशर और वही अवैध खनन शुरू हो जाएगा।

अब फैसला प्रशासन के हाथ में
अब यह देखना होगा कि पुलिस की इस कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन और खनन विभाग कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं।
क्या अवैध क्रेशर प्लांट सील होंगे?
क्या माफिया सरगनाओं की गिरफ्तारी होगी?
या फिर मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा?
चेतावनी की घंटी
बड़ाजामदा, नोवामुंडी और बड़बिल क्षेत्र में हुई यह कार्रवाई केवल एक खबर नहीं, बल्कि चेतावनी की घंटी है।
यदि अभी भी प्रशासन नहीं जागा, तो लौहांचल का भविष्य केवल गड्ढों, धूल और अपराध के हवाले हो जाएगा।
एसपी अमित रेणु की पहल ने उम्मीद जगाई है कि माफिया राज के खिलाफ असली जंग शुरू हो चुकी है।
अब जरूरत है कि यह जंग आधी-अधूरी न रहे, बल्कि पूरे सिस्टम को साफ करने तक चले।
क्योंकि सवाल सिर्फ अवैध लौह अयस्क का नहीं, बल्कि कानून, पर्यावरण और जनता के भविष्य का है।














