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सारंडा में आईईडी ब्लास्ट से कोबरा के दो जवान घायल। घायल हवलदार की स्थिति गंभीर।

On: February 21, 2026 6:49 PM
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 सुरक्षा बलों का सघन सर्च ऑपरेशन जारी

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

सारंडा के बालिबा गांव के समीप चाराडेरा जंगल क्षेत्र में 21 फरवरी को दिन में हुए आईईडी ब्लास्ट की घटना से इलाके में हड़कंप मच गया है। इस विस्फोट में कोबरा 203 बटालियन के हवलदार दिनेश कुमार राउत और एक जवान बजीन्दर सिंह घायल हो गए। घायलों में हवलदार दिनेश की स्थिति गंभीर बताई जा रही है, जबकि दूसरे जवान को स्प्लेंटर लगा है और ओ खतरे से बाहर है।
सूत्रों के अनुसार,  घायल जवानों को सुरक्षित स्थान पर लाकर प्राथमिक उपचार दिए जाने की बात कही जा रही है। गंभीर रूप से घायल हवलदार दिनेश को बालीबा हेलीपैड से हेलिकॉप्टर से रांची भेजे जाने की तैयारी चल रही है।

माओवादियों की मौजूदगी की सूचना पर चल रहा था ऑपरेशन

उल्लेखनीय है कि सारंडा जंगल क्षेत्र में भाकपा माओवादी संगठन के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी की खुफिया सूचना के आधार पर बड़े पैमाने पर संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि एक करोड़ के इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा, अश्विन और मोछू के इस इलाके में सक्रिय होने की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को घेरते हुए तलाशी अभियान तेज कर दिया है।
इस ऑपरेशन में
* कोबरा बटालियन
* सीआरपीएफ
* झारखंड जगुआर
* जिला पुलिस
की संयुक्त टीम शामिल है।

आईईडी पहले से बिछाई गई थी या जानबूझकर विस्फोट कराया गया?

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह विस्फोट नक्सलियों द्वारा बैटरी से ट्रिगर किया गया या पहले से जंगल में बिछाई गई आईईडी पर किसी जवान का पैर पड़ने से धमाका हुआ। सुरक्षा एजेंसियां दोनों ही पहलुओं से जांच कर रही हैं।
सूत्रों का कहना है कि नक्सली अक्सर सर्च ऑपरेशन को विफल करने और सुरक्षाबलों में दहशत फैलाने के लिए जंगल के रास्तों और संभावित मूवमेंट रूट पर आईईडी बिछा देते हैं। चाराडेरा जंगल में हुई यह घटना भी उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

इलाके में हाई अलर्ट, जंगल सील

घटना के बाद पूरे चाराडेरा और बालिबा गांव से सटे जंगल क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया गया है। अतिरिक्त बलों को मौके पर भेजा गया है और ड्रोन व स्निफर डॉग की मदद से इलाके की गहन तलाशी ली जा रही है।
ग्रामीणों को जंगल की ओर जाने से सख्त मना किया गया है।

सारंडा अब भी नक्सलियों की बड़ी शरणस्थली

सारंडा का घना जंगल लंबे समय से नक्सलियों की शरणस्थली माना जाता रहा है। यहां कई बार सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ की घटनाएं हो चुकी हैं। सरकार की ओर से चलाए जा रहे लगातार अभियानों के बावजूद नक्सली आईईडी और गुरिल्ला रणनीति के जरिए सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते रहे हैं।

आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

फिलहाल प्रशासन और पुलिस मुख्यालय की ओर से किसी भी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां इस घटना को गंभीर मानते हुए पूरे क्षेत्र में ऑपरेशन को और तेज कर चुकी हैं।

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