कासिया पेचा में ग्रामीणों का हुंकार – सेल, गुवा प्रबंधन के खिलाफ आर-पार की चेतावनी
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
22 फरवरी को कासिया पेचा गांव में 12 मौजा के सारंडा पीढ़ मानकी सुरेश चाम्पिया एवं गांव के मुंडा सिंगा सुरीन की संयुक्त अध्यक्षता में सेल, गुवा की रांजाबुरु खदान को लेकर ग्रामीणों की एक आक्रामक और निर्णायक बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में 12 गांवों के मुंडा, डकुआ, दीयूरी, बेरोजगार युवक, महिलाएं और पुरुष बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
बैठक में ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। एक स्वर में कहा गया—
“खदान हमारी जमीन पर, लेकिन रोजगार बाहर वालों को! यह अन्याय अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

ग्रामसभा की अनुमति के बिना खदान संचालन का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि—
रांजाबुरु खदान खोलने से पहले ग्रामसभा से कोई अनुमति नहीं ली गई
अब तक प्रभावित गांवों के एक भी बेरोजगार युवक को रोजगार नहीं मिला
खदान से मुनाफा उठाया जा रहा है, लेकिन गांव बदहाली में जी रहे हैं
ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि यह संविधान और आदिवासी अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
75% स्थानीय रोजगार की मांग, विकास की गारंटी चाहिए
बैठक में निम्न मांगों को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया—
खदान में 75% रोजगार स्थानीय युवाओं को दिया जाए
प्रभावित गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जाए
शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं दी जाएं
ग्रामीणों ने कहा कि अगर इन मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन और उग्र होगा।
27 फरवरी को महाधरना का ऐलान
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि—
27 फरवरी को सेल, गुवा के जनरल ऑफिस के सामने 4 घंटे तक “कटोरा लेकर धरना प्रदर्शन” किया जाएगा।
इस दौरान गुवा प्रबंधन को मांग पत्र सौंपा जाएगा।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यह धरना केवल शुरुआत होगी। अगर तब भी प्रबंधन नहीं जागा तो—
खदान का उत्पादन कार्य बाधित किया जाएगा
चक्का जाम किया जाएगा
पूरे क्षेत्र में जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा
और इसकी पूरी जिम्मेदारी सेल प्रबंधन की होगी।
13 फरवरी का ज्ञापन बना कागज का टुकड़ा?
ग्रामीणों ने बताया कि—
13 फरवरी को पहले ही गुवा सेल प्रबंधन को एक लिखित मांग पत्र सौंपा गया था, लेकिन—
अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया
न कोई बातचीत हुई
न कोई आश्वासन मिला
जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश और भड़क गया है।
“अब आंदोलन रुकेगा नहीं” – ग्रामीणों का ऐलान
बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने दो टूक कहा—
“स्थानीय युवाओं की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जब तक रोजगार नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा।”
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो खदान का काम पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा।

बैठक में मौजूद प्रमुख ग्रामीण
बैठक में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे—
मुंडा बिरसा सुरीन,
मुंडा बिरसा चांपिया,
मुंडा कानूराम देवगम,
मुंडा चिंतामणि चांपिया,
मुंडा मनचुड़िया सिद्धू,
मंगता सुरीन,
राजेश सांडिल,
पूर्व जिला परिषद सदस्य बामिया मांझी,
अमन चाम्पिया,
मानसिंह चाम्पिया,
नंदलाल सुरीन,
रामो सिद्धू,
रोया चांपिया,
पाईकरा चांपिया,
अर्जुन चाम्पिया,
जेना वाडिंग,
बेसरा चांपिया,
मंगल सिद्धू,
कांडे चाम्पिया,
उरदुब चाकिया समेत दर्जनों ग्रामीण।
सेल प्रबंधन के लिए चेतावनी की घंटी
ग्रामीणों की इस बैठक ने साफ कर दिया है कि अब मामला केवल रोजगार का नहीं, बल्कि अस्तित्व और अधिकार की लड़ाई बन चुका है।
अगर Steel Authority of India Limited (सेल), गुवा प्रबंधन ने समय रहते समाधान नहीं किया, तो आने वाले दिनों में क्षेत्र में बड़ा आंदोलन तय है।













