मूल संस्कृति में लौटने का लिया निर्णय
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
पश्चिम सिंहभूम जिले के टोंटो प्रखंड अंतर्गत मौजा बुंडू के रेंगो टोला में एक परिवार ने लगभग दो वर्षों बाद अपनी मूल संस्कृति और प्राकृतिक आस्था में वापसी कर सरना धर्म को पुनः अपनाया। यह बदलाव लगभग 28 वर्षीय सोंगा केराई के परिवार में देखने को मिला, जिन्होंने रविवार को अपनी पत्नी सोमवारी कुई (25 वर्ष), पुत्र सुरेश केराई (5 वर्ष) और प्रकाश केराई (2 वर्ष) के साथ सामाजिक रीति-रिवाज के अनुसार सरना धर्म में पुनः वापसी की।

पारंपरिक रीति-रिवाज से हुआ शुद्धिकरण
इस अवसर पर ग्रामीण मुण्डा, गांव के दियुरी और आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा के पदाधिकारियों की उपस्थिति में पारंपरिक पूजा-पद्धति के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। गांव के दियुरी जवान अंगरिया ने ‘हो’ समाज की परंपरा के अनुसार लाल मुर्गा की बलि देकर पूजा की शुरुआत की। इसके बाद परिवार के सभी सदस्यों का जाते-परचि (शुद्धिकरण) कराया गया।
पूजा के बाद ग्रामीणों ने सामाजिक रूप से परिवार को फिर से स्वीकार किया और अब से ‘हो’ समाज के सभी पारंपरिक रीति-रिवाज, त्योहार, जन्म, विवाह और मृत्यु से जुड़े संस्कारों का पालन करने की बात कही।

बीमारी के कारण अपनाया था ईसाई धर्म
ग्रामीणों के अनुसार सोंगा केराई का परिवार लगभग दो वर्ष पहले बीमारी से राहत पाने की उम्मीद में ईसाई धर्म अपना लिया था। इसके बाद वे तिम्बरा और दुईया स्थित चर्च में हर रविवार को प्रार्थना के लिए जाया करते थे।
हालांकि धर्म परिवर्तन के बाद भी परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। इसके बाद सोंगा केराई ने स्वयं सामाजिक स्तर पर विचार किया और अपनी मूल संस्कृति में लौटने का निर्णय लिया।
जागरूकता अभियान से मिला प्रेरणा
बताया जाता है कि आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक जागरूकता अभियान, सम्मेलन, युवा महोत्सव और नुक्कड़ सभाओं से सोंगा केराई प्रभावित हुए। इन कार्यक्रमों से प्रेरित होकर उन्होंने स्वयं ग्रामीणों के सामने अपनी मूल परंपरा और संस्कृति में लौटने की इच्छा जताई।
समाज के पहल पर हुआ कार्यक्रम
इसके बाद सामाजिक पहल करते हुए आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा के अनुमंडल सांस्कृतिक सचिव सह ‘हो’ भाषा शिक्षक कृष्णा तोपनो के नेतृत्व में परिवार की वापसी का कार्यक्रम तय किया गया।
कार्यक्रम के दौरान ‘हो’ समाज की परंपरा के अनुसार परिवार के सभी सदस्यों को धोती-गंजी, साड़ी और गमछा पहनाकर सम्मानित किया गया।

समाज के नेताओं ने रखा विचार
इस मौके पर आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष इपिल सामड ने ‘हो’ समाज की प्राचीन परंपराओं, संस्कृति और धर्म-दस्तूर की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं से सामाजिक जिम्मेदारी निभाने और आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति से जोड़ने की अपील की।
वहीं महासभा के जगन्नाथपुर अनुमंडल अध्यक्ष बलराम लागुरी ने ‘हो’ समाज की बोंगा-बुरू परंपरा को समझने और समाज के विभिन्न कार्यक्रमों जैसे अधिवेशन, दियुरी सम्मेलन और आदिवासी युवा महोत्सव में भाग लेने के लिए लोगों को प्रेरित किया।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद
इस अवसर पर ग्रामीण मुण्डा गुनाराम अंगरिया, सहयोगी मुंडा राजेश पुरती, आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा के जिला सचिव ओयबन हेम्ब्रम, अनुमंडल कोषाध्यक्ष बाली लागुरी, गालू पुरती, श्रीराम अंगरिया, माधो टोपनो, कालीचरण अंगरिया, साधुचरण अंगरिया, बुढ़न सिंह अंगरिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
पूरे कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने सामाजिक एकता और अपनी पारंपरिक संस्कृति को सहेजने का संदेश दिया।














