किरीबुरू–मेघाहातुबुरु में मार्च में भी ठंड का एहसास, पर खदानों के विस्तार और जंगल कटाई से पर्यावरण पर मंडरा रहा खतरा
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
सारंडा। लौहांचल क्षेत्र के किरीबुरू और मेघाहातुबुरु शहरी इलाकों में मंगलवार 10 मार्च की सुबह लगातार दूसरे दिन भी घना कोहरा छाया रहा। सुबह के समय पूरा इलाका कोहरे की चादर में लिपटा नजर आया। सड़कों, पहाड़ियों और जंगलों के बीच फैला यह कोहरा एक ओर जहां किरीबुरू की प्राकृतिक खूबसूरती को और बढ़ा रहा था, वहीं दूसरी ओर यह मौसम के बदलते मिजाज की ओर भी संकेत कर रहा है।
हालांकि सुबह करीब नौ बजे के बाद जैसे ही सूरज की किरणें तेज हुईं, धीरे-धीरे कोहरा छंटने लगा और आसमान साफ हो गया। इसके बावजूद क्षेत्र में सुबह और शाम के समय हल्की ठंड का एहसास अभी भी बना हुआ है।
दिलचस्प बात यह है कि पूरे देश में जहां गर्मी ने दस्तक दे दी है, वहीं सारंडा के पहाड़ी इलाके में अभी भी रात के समय लोगों को हल्के गर्म कपड़े पहनने की जरूरत पड़ रही है।

कोहरे से निखरी किरीबुरू की प्राकृतिक खूबसूरती
सुबह के समय किरीबुरू और मेघाहातुबुरु का दृश्य बेहद मनमोहक दिखाई दिया। पहाड़ों के ऊपर तैरता हुआ कोहरा, जंगलों के बीच से निकलती सड़कें और दूर-दूर तक फैली खदानों की पहाड़ियां—इन सबने मिलकर एक अद्भुत प्राकृतिक दृश्य प्रस्तुत किया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह का कोहरा आमतौर पर सर्दियों के मौसम में देखने को मिलता है, लेकिन मार्च के महीने में लगातार दो दिन तक घना कोहरा छाना मौसम के असामान्य व्यवहार की ओर इशारा करता है।
मार्च में भी सुबह–शाम ठंड का एहसास
हालांकि दिन के समय धूप तेज होने लगी है और गर्मी धीरे-धीरे बढ़ रही है, लेकिन सुबह और शाम के समय अभी भी ठंड का एहसास हो रहा है।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि रात के समय तापमान इतना नीचे चला जाता है कि बिना गर्म कपड़ों के रहना मुश्किल हो जाता है।
यह स्थिति बताती है कि सारंडा का मौसम अभी भी पहाड़ी इलाकों की तरह ठंडा और संतुलित है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें तेजी से बदलाव भी देखा जा रहा है।

खदानों के विस्तार से बदल रहा मौसम
सारंडा एशिया के सबसे बड़े साल जंगलों में से एक माना जाता है। लेकिन पिछले कई वर्षों में खदानों के लगातार विस्तार और अवैध गतिविधियों के कारण यहां का पर्यावरण गंभीर संकट का सामना कर रहा है।
लौह अयस्क के खनन के लिए बड़े पैमाने पर पहाड़ों को काटा जा रहा है और जंगलों को साफ किया जा रहा है। इससे न केवल प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है बल्कि स्थानीय मौसम पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है।
जंगलों की कटाई से बढ़ रहा तापमान
स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि सारंडा के जंगल इस क्षेत्र के मौसम को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लेकिन जिस तेजी से जंगलों की कटाई हो रही है, उससे आने वाले वर्षों में यहां का तापमान तेजी से बढ़ सकता है।
कई ग्रामीणों का कहना है कि पहले यहां की गर्मी इतनी तीखी नहीं होती थी, लेकिन अब हर साल तापमान में वृद्धि दर्ज की जा रही है।
यह बदलाव धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र के पर्यावरण को प्रभावित कर रहा है।

माफियाओं की नजर जंगलों पर
सारंडा के जंगलों पर केवल खदानों का ही दबाव नहीं है, बल्कि लकड़ी माफियाओं की नजर भी इन जंगलों पर बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई जगहों पर अवैध रूप से पेड़ों की कटाई की जा रही है। इससे जंगलों का क्षेत्र लगातार कम होता जा रहा है।
यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले वर्षों में सारंडा का हरा-भरा जंगल केवल इतिहास बनकर रह जाएगा।
पर्यावरण असंतुलन का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जंगलों की कटाई और खनन का यही सिलसिला जारी रहा तो आने वाले समय में यहां का मौसम पूरी तरह बदल सकता है।
जंगलों के खत्म होने से:
* तापमान में तेजी से वृद्धि होगी
* वर्षा का पैटर्न बदल सकता है
* जल स्रोत सूख सकते हैं
* वन्य जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है
यह स्थिति न केवल पर्यावरण बल्कि यहां रहने वाले हजारों लोगों के जीवन को भी प्रभावित करेगी।

प्रशासन और कंपनियों को उठाने होंगे कदम
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि सारंडा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में खनन गतिविधियों को पूरी जिम्मेदारी के साथ संचालित करना जरूरी है।
इसके लिए जरूरी है कि:
* जंगलों की अवैध कटाई पर सख्ती से रोक लगे
* खनन के बाद बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाए
* पर्यावरण संरक्षण के नियमों का सख्ती से पालन हो
यदि ऐसा नहीं किया गया तो सारंडा की पहचान रहे घने जंगल और ठंडा मौसम धीरे-धीरे खत्म हो सकता है।
प्रकृति की चेतावनी को समझने की जरूरत
किरीबुरू और मेघाहातुबुरु में मार्च के महीने में भी छाया घना कोहरा जहां एक ओर प्रकृति की खूबसूरती को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह हमें पर्यावरण संरक्षण की याद भी दिलाता है।
आज जरूरत है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखा जाए।
यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो ही सारंडा का मौसम और इसकी प्राकृतिक सुंदरता आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह पाएगी।









