गुवा संवाददाता।
पवित्र रमजान माह में गुवा क्षेत्र की मस्जिद में रोजेदारों के लिए विशेष इफ्तार का आयोजन किया गया। इस आयोजन की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि इफ्तार की पूरी व्यवस्था कराने वाले दानदाता ने अपना नाम सार्वजनिक नहीं करने की इच्छा जताई। गुमनाम रहकर की गई इस नेक पहल की पूरे इलाके में सराहना हो रही है।

रमजान में भाईचारे का संदेश
रमजान के पवित्र महीने में रोजेदार दिनभर के रोजे के बाद इफ्तार के समय रोजा खोलते हैं। इसी परंपरा को ध्यान में रखते हुए गुवा की मस्जिद में रोजेदारों के लिए सामूहिक इफ्तार की व्यवस्था की गई। रोजेदारों ने नमाज अदा करने के बाद एक साथ बैठकर इफ्तार किया और अल्लाह की इबादत में शामिल हुए।
इफ्तार के दौरान मस्जिद परिसर का माहौल पूरी तरह भाईचारे, आपसी सम्मान और सामाजिक एकता का प्रतीक बना रहा।
पहली बार दिखी ऐसी पहल
स्थानीय लोगों के अनुसार गुवा क्षेत्र में इस तरह का आयोजन पहली बार देखने को मिला है, जब किसी व्यक्ति ने बिना नाम बताए इतने बड़े स्तर पर रोजेदारों के लिए इफ्तार की व्यवस्था कराई।
लोगों का कहना है कि आमतौर पर ऐसे कार्यक्रमों में आयोजकों का नाम सामने आता है, लेकिन इस बार गुमनाम दानदाता ने केवल नेक नीयत से यह आयोजन कराया, जिसने लोगों के दिलों को छू लिया।
खजूर, फल और पकौड़ों से सजा इफ्तार
इफ्तार के लिए मस्जिद में आने वाले सभी रोजेदारों के लिए खजूर, ताजे फल, शरबत, पकौड़े सहित कई प्रकार के व्यंजनों की अच्छी व्यवस्था की गई थी। रोजेदारों ने निर्धारित समय पर रोजा खोला और सामूहिक रूप से इफ्तार किया।
खाने-पीने के साथ ही पानी, बैठने की जगह और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी सुव्यवस्थित ढंग से की गई थीं, जिससे किसी को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।
रोजेदारों ने जताया आभार
इफ्तार में शामिल रोजेदारों और स्थानीय लोगों ने इस पहल की खुले दिल से सराहना की। उनका कहना था कि इस तरह के आयोजन समाज में एकता और भाईचारे को मजबूत करते हैं।
कई लोगों ने कहा कि रमजान का असली संदेश ही इंसानियत, सहयोग और जरूरतमंदों की मदद करना है, और गुमनाम दानदाता ने उसी भावना को जीवंत किया है।
देश और समाज की खुशहाली के लिए दुआ
इफ्तार के बाद मस्जिद में मौजूद लोगों ने देश, समाज और इलाके की खुशहाली, अमन और तरक्की के लिए विशेष दुआ की।
इस मौके पर उपस्थित लोगों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इस तरह के सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते रहेंगे, जिससे समाज में आपसी सहयोग, सद्भावना और भाईचारे का वातावरण और मजबूत होगा।
प्रेरणादायक बन गई गुमनाम सेवा
हालांकि इफ्तार की व्यवस्था कराने वाले व्यक्ति ने अपना नाम सामने नहीं आने दिया, लेकिन उनकी यह सेवा भावना पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे नेक कार्य न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में इंसानियत और आपसी विश्वास की भावना को भी बढ़ाते हैं।













