जम्बाईबुरू, कलईता और धरनाधरी के सैकड़ों ग्रामीणों को मिला स्वास्थ्य लाभ
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
सारंडा के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र में एक बार फिर केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने मानवीय पहल का परिचय दिया। 26 बटालियन द्वारा सिविक एक्शन प्रोग्राम के तहत 18 जनवरी 2026 को जम्बाईबुरू गांव में एक मुफ्त चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया, जिससे सुदूरवर्ती ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली।

कमांडेंट राजीव रंजन के निर्देशन में हुआ आयोजन
इस चिकित्सा शिविर का आयोजन 26 बटालियन के कमांडेंट राजीव रंजन के मार्गदर्शन और उपस्थिति में किया गया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. ऋषभ शेखर द्वारा किया गया, जिन्होंने स्वयं ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की और आवश्यक चिकित्सीय परामर्श दिया।
तीन गांवों के ग्रामीणों को मिला लाभ
इस शिविर में सिर्फ जम्बाईबुरू ही नहीं, बल्कि आसपास के सुदूर गांवों—
* कलईता
* धरनाधरी
के ग्रामीण भी बड़ी संख्या में पहुंचे।
सैकड़ों जरूरतमंद लोगों की
मुफ्त स्वास्थ्य जांच की गई
आवश्यक दवाइयों का वितरण किया गया
ग्रामीणों ने बताया कि इन इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहद सीमित हैं, ऐसे में यह शिविर उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
सुरक्षा बल और ग्रामीणों के बीच बढ़ा विश्वास
इस कार्यक्रम में 26 बटालियन के कंपनी कमांडर निरीक्षक (GD) अमरेश सिंह, राज्य पुलिस के सहायक उप निरीक्षक जूलियस इक्का तथा जम्बाईबुरू के गांव मुंडा जयराम तोरकोद भी उपस्थित रहे।
सभी ने मिलकर इस कार्यक्रम को सफल बनाया और ग्रामीणों के साथ संवाद स्थापित किया।
महिलाओं और बच्चों की रही विशेष भागीदारी
शिविर में महिलाओं और बच्चों की भागीदारी खास तौर पर देखने को मिली।
स्वास्थ्य जांच के दौरान
* बच्चों की सामान्य बीमारियों की जांच
* महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी सलाह
* बुजुर्गों को आवश्यक दवाइयां
प्रदान की गईं।

ग्रामीणों ने बताया—“ऐसे कार्यक्रमों से मिलती है राहत”
ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि
“सारंडा जैसे दुर्गम इलाके में ऐसे चिकित्सा शिविर बहुत जरूरी हैं, क्योंकि यहां अस्पताल और डॉक्टर आसानी से उपलब्ध नहीं होते।”
उन्होंने CRPF के इस प्रयास को जनकल्याणकारी और भरोसा बढ़ाने वाला कदम बताया।
सिविक एक्शन प्रोग्राम बना सहारा
CRPF द्वारा चलाया जा रहा सिविक एक्शन प्रोग्राम न सिर्फ सुरक्षा बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का भी उदाहरण बनता जा रहा है।
* नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इस तरह के कार्यक्रम
ग्रामीणों को राहत पहुंचाते हैं
* सुरक्षा बलों और स्थानीय जनता के बीच विश्वास मजबूत करते हैं
सारंडा में मानवता की मिसाल
सारंडा के जंगलों में जहां एक ओर सुरक्षा चुनौतियां हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे कार्यक्रम मानवता और सेवा का संदेश देते हैं।
26 बटालियन का यह प्रयास यह साबित करता है कि
सुरक्षा के साथ-साथ समाज सेवा भी उनकी प्राथमिकता है।













