“जमीन हमारी, हक भी हमारा”—आदिवासी किसान मजदूर पार्टी का खुला ऐलान
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
कोल्हान क्षेत्र में रोजगार सृजन और बढ़ते पलायन के खिलाफ जनआक्रोश अब सड़कों पर खुलकर सामने आने लगा है। इसी कड़ी में 23 मार्च 2026 को आयुक्त कार्यालय के समक्ष आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के नेतृत्व में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष जॉन मीरन मुंडा द्वारा जनता के नाम एक खुला पत्र जारी कर क्षेत्र की जमीनी हकीकत और लोगों की पीड़ा को बेबाक तरीके से सामने रखा गया।

संघर्ष की धरती पर फिर उठा अधिकारों का सवाल
धरना स्थल पर जुटे सैकड़ों लोगों ने एक स्वर में कहा कि कोल्हान केवल प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र ही नहीं, बल्कि यह संघर्ष और बलिदान की ऐतिहासिक धरती रही है। यहां के लोगों ने हमेशा अपने हक और अधिकारों के लिए आवाज उठाई है और आज भी वही लड़ाई जारी है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब-जब इस क्षेत्र की जमीन और संसाधनों पर बाहरी ताकतों ने कब्जा किया, तब-तब यहां के आदिवासियों ने आंदोलन की मशाल जलाकर विरोध दर्ज कराया। आज भी हालात कुछ अलग नहीं हैं—बस शोषण के तरीके बदल गए हैं।
खनन कंपनियों पर सीधा आरोप: “संपदा बाहर, बेरोजगारी अंदर”
खुले पत्र में क्षेत्र में संचालित बड़ी कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए गए। इसमें कहा गया कि टाटा, रुंगटा, सेल, ए.सी.सी. और अडानी जैसी दिग्गज कंपनियां कोल्हान में बड़े पैमाने पर खनन और औद्योगिक गतिविधियां चला रही हैं।
इन कंपनियों द्वारा आदिवासियों की जमीन पर कारखाने स्थापित किए गए हैं और जंगल-पहाड़ों में वैध-अवैध खनन जारी है। लेकिन विडंबना यह है कि जिस जमीन से करोड़ों की संपत्ति निकाली जा रही है, उसी जमीन के मालिक आज रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों को रोजगार देने के बजाय बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे क्षेत्र में बेरोजगारी और असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
“लकड़ी और पत्तों पर जिंदगी”—गरीबी की कड़वी सच्चाई
धरने के दौरान जारी पत्र में ग्रामीणों की बदहाल जिंदगी का भी जिक्र किया गया। कहा गया कि रोजगार के अभाव में लोग जंगलों से लकड़ी, दातून और पत्ते इकट्ठा कर बेचने को मजबूर हैं।
किसानों की स्थिति और भी दयनीय है—सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है। नतीजतन, उत्पादन कम होता है और परिवारों को आधे पेट ही गुजारा करना पड़ता है।
हाथियों का बढ़ता आतंक, वन विभाग पर लापरवाही का आरोप
खुले पत्र में एक और गंभीर मुद्दा उठाया गया—अवैध खनन के कारण जंगलों का संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है।
गांवों में फसलों और घरों को नुकसान पहुंच रहा है, लेकिन वन विभाग इस समस्या पर गंभीरता नहीं दिखा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें न तो सुरक्षा मिल रही है और न ही नुकसान का समुचित मुआवजा।
मुख्य मांग: 75% स्थानीय रोजगार की गारंटी
धरना प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार और कंपनियों के सामने स्पष्ट मांग रखी—
* कोल्हान क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन किया जाए
* सभी कंपनियों में कम से कम 75 प्रतिशत रोजगार स्थानीय लोगों को दिया जाए
* पलायन रोकने के लिए ठोस नीति बनाई जाए
* सिंचाई और कृषि सुविधाओं का विस्तार किया जाए
* अवैध खनन पर रोक लगाई जाए
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
सरकार और कंपनियों के लिए चेतावनी
धरना स्थल से यह साफ संदेश दिया गया कि अब कोल्हान के लोग अपने अधिकारों को लेकर किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं हैं।
“जमीन हमारी है, संसाधन हमारे हैं, तो रोजगार भी हमारा हक है”—इस नारे के साथ प्रदर्शनकारियों ने सरकार और उद्योगपतियों को चेतावनी दी कि अब अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।














