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सेल प्रबंधन के खिलाफ भड़का मजदूर आक्रोश: “हमारी जमा पूंजी पर डाका बर्दाश्त नहीं”

On: April 1, 2026 11:08 AM
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मेघाहातुबुरु में जनरल ऑफिस के सामने जोरदार प्रदर्शन, SESBF फंड को NPS में जबरन ट्रांसफर करने के आरोप

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

झारखंड की लौह नगरी मेघाहातुबुरु में 1अप्रैल को उस वक्त माहौल गरमा गया जब झारखंड मजदूर संघर्ष संघ की मेघाहातुबुरु इकाई के बैनर तले मजदूरों का गुस्सा फूट पड़ा। महासचिव आफताब आलम के नेतृत्व में दर्जनों श्रमिकों ने सेल प्रबंधन के खिलाफ जनरल ऑफिस के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर महाप्रबंधक (एचआर) अमित विश्वास को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
मजदूरों का आरोप है कि SAIL प्रबंधन कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई को बिना अनुमति NPS में ट्रांसफर करने की साजिश कर रहा है, जो न केवल गैरकानूनी है बल्कि ट्रस्ट डीड का सीधा उल्लंघन भी है।

“SESBF हमारी जमा पूंजी है, कोई पेंशन स्कीम नहीं”

प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि SESBF (SAIL Employees’ Superannuation Benefit Fund) और NPS दो बिल्कुल अलग योजनाएं हैं।
* SESBF एक ट्रस्ट आधारित फंड है
* इसमें कर्मचारियों के वेतन से हर महीने 2% की कटौती होती है
* रिटायरमेंट के समय पूरी राशि ब्याज सहित कर्मचारी को वापस मिलती है
मजदूर नेताओं ने कहा कि
👉 “यह हमारी मेहनत की कमाई है, कोई पेंशन स्कीम नहीं कि कंपनी जब चाहे इसे कहीं भी ट्रांसफर कर दे।”

सर्कुलर पर उठा बड़ा सवाल: “फंड का होगा क्या?”

5 मार्च 2026 को जारी सर्कुलर (HR/ ITB & Med / SESBF/NPS) को लेकर मजदूरों ने गंभीर सवाल उठाए।
उनका कहना है कि:
* सर्कुलर में SESBF ट्रस्ट को 1 अप्रैल 2026 से बंद करने की बात कही गई है
* लेकिन जमा राशि का क्या होगा, इस पर एक शब्द भी नहीं
* कर्मचारियों से NPS में 2% योगदान के लिए सहमति मांगी गई,
👉 लेकिन पुराने फंड ट्रांसफर के लिए कोई सहमति नहीं ली गई
मजदूरों ने इसे “साजिश” बताते हुए कहा कि यह कर्मचारियों के अधिकारों का खुला उल्लंघन है।

“ट्रस्ट डीड से ऊपर कोई नहीं”—प्रबंधन को खुली चेतावनी

संघ ने अपने ज्ञापन में साफ कहा कि SESBF ट्रस्ट एक Irrevocable Trust (अपरिवर्तनीय ट्रस्ट) है, जिसे:
* किसी बोर्ड मीटिंग के निर्णय से खत्म नहीं किया जा सकता
* न ही किसी अन्य स्कीम में सामूहिक रूप से ट्रांसफर किया जा सकता
मजदूरों ने जोर देकर कहा:
👉 “ट्रस्ट डीड से ऊपर कोई नहीं—न ट्रस्ट बोर्ड, न प्रबंधन, न कोई समझौता।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर ट्रस्ट समाप्त होता है, तो:
* फंड की पूरी राशि
* प्रत्येक कर्मचारी को
* उसके योगदान और ब्याज के अनुसार
👉 सीधे वापस दी जानी चाहिए

“बिना सहमति पैसा ट्रांसफर करना सीधा धोखा”

आफताब आलम के नेतृत्व में मजदूरों ने आरोप लगाया कि विश्वसनीय सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स से यह जानकारी मिल रही है कि प्रबंधन SESBF फंड को बिना सहमति NPS में ट्रांसफर करने की तैयारी कर रहा है।
उन्होंने इसे:
* कर्मचारियों के साथ विश्वासघात
* कानूनी प्रक्रिया की अवहेलना
* और श्रमिक अधिकारों पर हमला बताया

ट्रस्ट डीड की कॉपी मांगी, पारदर्शिता पर सवाल

संघ ने प्रबंधन से मांग की कि:
* SESBF ट्रस्ट डीड की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराई जाए
* ट्रस्ट की वर्तमान स्थिति और फंड का पूरा ब्योरा दिया जाए
मजदूरों ने कहा:
👉 “जिस फंड में हमारा पैसा लगा है, उसकी पूरी जानकारी लेना हमारा मौलिक अधिकार है।”

ठेका मजदूरों के मुद्दे भी गरमाए: “समान काम का समान वेतन चाहिए”

प्रदर्शन के दौरान ठेका मजदूरों ने भी अपनी कई अहम मांगें उठाईं:
* समान काम के लिए समान वेतन लागू किया जाए
* कार्य के अनुसार योग्यता आधारित प्रोन्नति मिले
* स्थानीय बेरोजगारों को नौकरी में प्राथमिकता दी जाए
* मेघाहातुबुरु ओपीडी में नियमित डॉक्टर की नियुक्ति हो, फिजियोथेरेपी विशेषज्ञ की नियुक्ति हो
* राउरकेला रेफर किए जाने वाले मरीजों के लिए👉 एंबुलेंस में वातानुकूलित सुविधा उपलब्ध कराई जाए
इन मुद्दों ने आंदोलन को और व्यापक बना दिया।

“अगर पैसा नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन”

मजदूर नेताओं ने साफ चेतावनी दी कि अगर:
* SESBF फंड को कर्मचारियों को वापस नहीं किया गया
* या बिना सहमति ट्रांसफर की कोशिश की गई
तो आने वाले दिनों में:
👉 और बड़ा आंदोलन होगा
👉 कामकाज ठप किया जाएगा

प्रबंधन के सामने बढ़ती चुनौती

इस पूरे घटनाक्रम ने सेल प्रबंधन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ कर्मचारियों का बढ़ता असंतोष, तो दूसरी ओर कानूनी सवाल—दोनों ही हालात को गंभीर बना रहे हैं।

“यह लड़ाई हक की है, पीछे हटने का सवाल नहीं”

मेघाहातुबुरु में उठा यह आंदोलन सिर्फ एक फंड का मुद्दा नहीं, बल्कि मजदूरों के अधिकार, पारदर्शिता और विश्वास की लड़ाई बन चुका है।
आफताब आलम और उनके साथ खड़े मजदूरों का साफ कहना है:
👉 “हम अपनी गाढ़ी कमाई किसी भी कीमत पर लुटने नहीं देंगे।”
अब देखना यह होगा कि सेल प्रबंधन इस उबलते गुस्से को कैसे शांत करता है—संवाद से या टकराव से।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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