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“पीड़ित मुगदी होनहागा या ‘नक्सली’ का ठप्पा?” – सरेंडर पर उठे संगीन सवाल

On: April 2, 2026 9:17 AM
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परिवार का आरोप: काम दिलाने के बहाने ले जाकर फर्जी तरीके से कराया आत्मसमर्पण, पुलिस और बिचौलियों की भूमिका संदिग्ध

✍️ रिपोर्ट: शैलेश सिंह

🔴 “मेरी बेटी नक्सली नहीं, उसे फंसाया गया” – पिता का फूट पड़ा दर्द

सारंडा के दोलाईगड़ा गांव की 19 वर्षीय युवती मुगदी होनहागा के कथित नक्सली सरेंडर मामले ने अब बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। जहां पुलिस इसे अपनी उपलब्धि बता रही है, वहीं पीड़ित परिवार इस पूरे मामले को साजिश करार दे रहा है।
पिता मंगल होनहागा का आरोप है—
👉 उनकी बेटी कभी नक्सली संगठन से जुड़ी ही नहीं थी
👉 वह घर और परिवार के बीच ही रहती थी
👉 किसी भी नक्सली घटना या गतिविधि में उसकी कोई भूमिका नहीं रही
उनका सवाल सीधा है—
“जब मेरी बेटी घर से बाहर ही नहीं जाती थी, तो उसे नक्सली कैसे बना दिया गया?”

मुगदी होनहागा ओड़िशा पुलिस के सामने सरेंडर स्थिति में

 

काम के बहाने ले जाकर ‘नक्सली’ बना दिया?

परिवार ने इस मामले में कुंबिया गांव निवासी गोनो चांपिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
👉 बताया गया कि गांव में नक्सलियों की गतिविधि के कारण बेटी को सुरक्षा के लिहाज से मारांगपोंगा गांव में उसके भाई के पास भेजा गया था
👉 इसी दौरान गोनो चांपिया ने उसे काम दिलाने का लालच दिया
👉 और फिर उसे अपने साथ ले गया
परिजनों का आरोप है कि—
उसी के बाद उसे उड़ीसा पुलिस के सामने “नक्सली” बताकर फर्जी तरीके से सरेंडर करा दिया गया।

मुगदी की मां

 

“दो-तीन दिन में वापस लाएंगे” – बयान ने बढ़ाया शक

मामला यहीं खत्म नहीं होता। जब परिजनों ने गोनो चांपिया से संपर्क किया तो उसने कथित तौर पर कहा—
👉 “चिंता मत कीजिए, दो-तीन दिन में वापस ला देंगे”
यह बयान पूरे घटनाक्रम को और अधिक संदिग्ध बनाता है और यह सवाल खड़ा करता है कि—
अगर सब कुछ सही था, तो ‘वापस लाने’ की बात क्यों कही गई?

मुगदी के पिता मंगल होनहागा

 

गांव में अकेली लड़की, बनी आसान निशाना?

मंगल होनहागा ने बताया कि—
👉 उनके गांव में नक्सलियों का आना-जाना लगा रहता था
👉 ऐसे में सुरक्षा कारणों से उन्होंने अपनी बेटी को दूसरे गांव भेजा
लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि—
क्या एक गरीब, असहाय और अकेली लड़की को सिस्टम का आसान शिकार बना दिया गया?

ग्रामीण मुगदी को निर्दोष बताते

 

ग्रामीणों का समर्थन, साजिश की आशंका

इस पूरे मामले में ग्रामीण भी परिवार के साथ खड़े हो गए हैं।
👉 ग्रामीणों का कहना है कि मुगदी को कभी नक्सली गतिविधियों में नहीं देखा गया
👉 वह एक सामान्य ग्रामीण लड़की थी
अब गांव में चर्चा है कि—
यह सरेंडर नहीं, बल्कि “फर्जी सरेंडर” का मामला हो सकता है।

ओड़िशा पुलिस और बिचौलियों की भूमिका पर सवाल

इस घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या आंकड़ों का खेल दिखाने के लिए निर्दोषों को नक्सली बनाया जा रहा है?
❓ क्या स्थानीय बिचौलियों के जरिए युवाओं को फंसाया जा रहा है?
❓ क्या सुरक्षा एजेंसियों की “कामयाबी” के पीछे कोई और सच्चाई छिपी है?

“नक्सल विरोधी अभियान या निर्दोषों पर वार?”

सारंडा और आसपास के क्षेत्रों में नक्सल विरोधी अभियान तेज है। ऐसे में यह मामला बेहद संवेदनशील हो जाता है।
👉 अगर आरोप सही हैं, तो यह केवल एक लड़की का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है
👉 अगर गलत हैं, तो सच्चाई सामने लाना प्रशासन की जिम्मेदारी है

परिवार की गुहार: बेटी को सुरक्षित लौटाओ

मंगल होनहागा और उनकी पत्नी मंजिली होनहागा ने प्रशासन से मांग की है—
✔️ पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
✔️ गोनो चांपिया और संबंधित लोगों पर कार्रवाई हो
✔️ उनकी बेटी को सुरक्षित घर वापस लाया जाए

सच्चाई सामने आना जरूरी

मुगदी होनहागा का मामला अब सिर्फ एक “सरेंडर” नहीं रहा, बल्कि यह सवाल बन गया है—
“क्या सिस्टम की सफलता के नाम पर किसी निर्दोष की जिंदगी दांव पर लगाई जा सकती है?”
जब तक इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक यह संदेह बना रहेगा कि—
👉 यह एक बड़ी सफलता है
👉 या फिर एक बड़ी साजिश
🟥 अंतिम सवाल:
“क्या मुगदी होनहागा सच में नक्सली है, या सिस्टम की एक और ‘कहानी’?”

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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