नव निर्मित मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा, भव्य भंडारे से जुड़ेगा पूरा क्षेत्र
गुवा संवाददाता।
गुवा क्षेत्र में आस्था, श्रद्धा और सामाजिक एकता का एक बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। आगामी 15 अप्रैल को झारखंड मजदूर संघर्ष संघ यूनियन कार्यालय परिसर में नव-निर्मित मंदिर में भगवान हनुमान जी, साईं बाबा, गणेश जी और माता दुर्गा की प्रतिमाओं की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इस आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह और धार्मिक उमंग का माहौल है।

वैदिक मंत्रों के बीच होगा दिव्य अनुष्ठान
इस महत्वपूर्ण आयोजन की जानकारी बुधवार देर शाम यूनियन कार्यालय में आयोजित बैठक के दौरान संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे ने मजदूरों को दी। उन्होंने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम बनारस से आए विद्वान पुरोहितों के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न होगा।
पूरे अनुष्ठान को पारंपरिक विधि-विधान और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार कराया जाएगा, जिससे मंदिर में स्थापित देव प्रतिमाओं में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो सके।
आस्था का केंद्र बनेगा नया मंदिर
रामा पांडे ने कहा कि यह मंदिर सिर्फ पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए आस्था और एकजुटता का प्रतीक बनेगा। यहां स्थापित चारों देवताओं की प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा प्रदान करेंगी।
उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह मंदिर गुवा और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में विकसित होगा।
भव्य भंडारा: हर वर्ग के लिए खुला आमंत्रण
प्राण प्रतिष्ठा के शुभ अवसर पर पूजा-अर्चना के उपरांत भव्य भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। इसमें सभी मजदूरों, उनके परिवारों और स्थानीय लोगों को सादर आमंत्रित किया गया है।
भंडारे को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं ताकि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को सुचारू रूप से प्रसाद ग्रहण कराया जा सके।
मजदूरों में दिखा उत्साह, सहयोग का संकल्प
बैठक में उपस्थित मजदूरों ने इस आयोजन को लेकर गहरा उत्साह व्यक्त किया। सभी ने मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाने का संकल्प लिया और आयोजन की तैयारियों में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाने का भरोसा दिया।

धार्मिक के साथ सामाजिक एकता का संदेश
यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक समरसता और एकता का भी मजबूत संदेश देगा।
एक मंच पर मजदूर, परिवार और स्थानीय लोग एकत्रित होकर न सिर्फ पूजा-अर्चना करेंगे, बल्कि आपसी भाईचारे को भी मजबूती देंगे।
15 अप्रैल का यह आयोजन गुवा क्षेत्र के इतिहास में एक यादगार अध्याय जोड़ने जा रहा है, जहां श्रद्धा, सेवा और सामूहिक भागीदारी का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।














