अनुमंडल स्तर पर जांच तेज, पूर्व विधायक ने दोबारा पेशी को बताया अनावश्यक
जगन्नाथपुर में प्रशासनिक हलचल, नोटिस के बाद बढ़ी सियासी सरगर्मी
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर अनुमंडल में प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) द्वारा पूर्व विधायक सह झारखंड आंदोलनकारी के मुख्य सलाहकार मंगल सिंह बोबोंगा को नोटिस जारी कर 2 अप्रैल 2026 को साक्ष्य सहित उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था।
यह नोटिस उस जन शिकायत के आधार पर भेजा गया था, जो स्वयं बोबोंगा ने झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री को सौंपा था। शिकायत में जगन्नाथपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी सत्यम कुमार पर भ्रष्टाचार और जनता के प्रति तानाशाही रवैये के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

“29 जनवरी की बैठक में ही रख दिए गए थे सारे सबूत”
इस पूरे मामले में सबसे अहम मोड़ तब आया, जब 2 अप्रैल को प्रस्तावित जांच बैठक से पहले ही मंगल सिंह बोबोंगा ने अनुमंडल पदाधिकारी को पत्र भेजकर अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया।
बोबोंगा ने अपने पत्र में साफ कहा है कि—
👉 BDO सत्यम कुमार के भ्रष्टाचार से जुड़े सभी साक्ष्य और तथ्य पहले ही 29 जनवरी 2026 को आयोजित बैठक में प्रस्तुत किए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि उस बैठक में:
* सभी आरोपों को बिंदुवार रखा गया था
* संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत किए गए थे
* पूरी कार्यवाही प्रशासन की मौजूदगी में हुई थी
* बैठक की जानकारी मीडिया के माध्यम से आम जनता तक पहुंच चुकी है
इस आधार पर बोबोंगा ने दो टूक कहा कि अब दोबारा साक्ष्य प्रस्तुत करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
“प्रशासन को सब कुछ पहले से पता, अब सिर्फ कार्रवाई बाकी”
बोबोंगा ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि:
* BDO के कार्यकाल के दौरान हुए आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और जन आक्रोश से प्रशासन भलीभांति परिचित है
* 29 जनवरी की बैठक में सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो चुकी है
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब प्रशासन के पास पर्याप्त आधार मौजूद है और पुनः सुनवाई के बजाय ठोस कार्रवाई की जरूरत है।

अस्वस्थता का हवाला, बैठक में शामिल होने से किया इनकार
मंगल सिंह बोबोंगा ने अपनी अस्वस्थता का हवाला देते हुए 2 अप्रैल की बैठक में शामिल होने में असमर्थता जताई है।
उन्होंने कहा कि:
👉 “वर्तमान में मैं अस्वस्थ हूं, इसलिए बैठक में उपस्थित होना संभव नहीं है।”
लेकिन इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि—
* 29 जनवरी की बैठक की कार्यवाही
* उपस्थित लोगों के बयान
* और पहले से उपलब्ध साक्ष्यों
के आधार पर जनहित में मुख्यमंत्री को स्पष्ट और निष्पक्ष रिपोर्ट भेजी जाए।
जनता के बीच भी उठ रहे सवाल—क्या होगा अगला कदम?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में कई सवाल उठने लगे हैं:
* जब पहले ही साक्ष्य दिए जा चुके हैं, तो दोबारा पेशी क्यों?
* क्या प्रशासन जांच को लंबा खींच रहा है?
* या फिर किसी बड़े निर्णय की तैयारी चल रही है?
स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर आरोप सही हैं, तो अब तक कार्रवाई हो जानी चाहिए थी।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव, अब रिपोर्ट पर टिकी नजर
अब इस मामले में सबसे अहम भूमिका अनुमंडल पदाधिकारी की रिपोर्ट की होगी, जिसे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा जाना है।
मंगल सिंह बोबोंगा ने जिस तरह से पहले ही साक्ष्य देने का दावा किया है, उससे प्रशासन पर दबाव और बढ़ गया है।













