चार घंटे ठप रहा माल परिवहन, जीएम का गुवा निरीक्षण रद्द
गुवा संवाददाता।
एक बार फिर हादसा, वही जगह–वही कहानी
गुवा सेल के बंकर साइड में सोमवार को एक बार फिर मालगाड़ी की एक बोगी बेपटरी हो गई। यह घटना सुबह करीब 10:45 बजे की बताई जा रही है। हादसे के बाद रेल लाइन पर अफरा-तफरी मच गई और पूरे क्षेत्र में रेल परिचालन ठप हो गया।

चार घंटे तक जाम रहा ट्रैक
बेपटरी की घटना के चलते रेलवे ट्रैक लगभग चार घंटे तक पूरी तरह जाम रहा। इस दौरान गुवा सेल से लौह अयस्क की माल ढुलाई पूरी तरह प्रभावित रही, जिससे उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ा।
पहली बार नहीं, पहले भी चार बार हो चुकी है बेपटरी
गौर करने वाली बात यह है कि गुवा सेल के इसी बंकर साइड पर यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी यहां चार बार मालगाड़ी बेपटरी हो चुकी है। लगातार हो रही घटनाओं ने रेलवे और सेल प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है।
पुरानी पटरियां हटाईं, फिर भी नहीं थमी घटनाएं
लगातार हादसों के बाद गुवा सेल प्रबंधन ने ब्रिटिश काल की पुरानी रेल पटरियों को हटाकर नई पटरियां बिछवाई थीं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके। लेकिन नई पटरियां लगने के बावजूद बेपटरी की घटनाएं जारी रहना रेल लाइन की गुणवत्ता, डिजाइन और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अधिकारियों की दौड़, घंटों की मशक्कत के बाद बहाल हुआ ट्रैक
घटना की सूचना मिलते ही रेलवे और सेल प्रबंधन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। क्रेन और तकनीकी टीम की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद कई घंटों में बेपटरी बोगी को हटाकर ट्रैक को दुरुस्त किया गया, तब जाकर रेल परिचालन बहाल हो सका।
जीएम का गुवा दौरा रद्द, अन्य साइडिंग का किया निरीक्षण
इसी बीच सोमवार को दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार मिश्रा का गुवा रेलवे साइडिंग निरीक्षण कार्यक्रम प्रस्तावित था। लेकिन ट्रैक बाधित होने के कारण वे गुवा नहीं पहुंच सके। इसके बाद उन्होंने डांगवापोसी, नोवामुंडी और बड़ाजामदा रेलवे साइडिंग का निरीक्षण किया।
सुरक्षा व्यवस्था पर मंडराता खतरा
गुवा साइडिंग में बार-बार हो रही बेपटरी की घटनाओं से न केवल रेल परिचालन बाधित हो रहा है, बल्कि रेल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। सवाल यह है कि जब नई पटरियों के बाद भी हादसे नहीं रुक रहे, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
स्थायी समाधान की दरकार
स्थानीय लोगों और रेलकर्मियों का कहना है कि जब तक ट्रैक की तकनीकी जांच, लोड प्रबंधन और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीरता से काम नहीं किया जाएगा, तब तक गुवा सेल बंकर साइड दुर्घटनाओं का हॉटस्पॉट बना रहेगा। अब देखना यह है कि रेलवे और सेल प्रबंधन इस बार क्या ठोस कदम उठाते हैं।














