रिपोर्ट: शैलेश सिंह
नोवागाँव–बसिरा पथ निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि अभियंताओं की अनुपस्थिति में ही संवेदक आरोहन बिल्डर द्वारा ढलाई का कार्य कराया जा रहा है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

मिलीभगत का आरोप, प्राक्कलन ताक पर
सूत्रों के अनुसार ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंता संजय कुमार सिंह की लापरवाही के चलते प्राक्कलन के अनुरूप कार्य नहीं हो रहा। आरोप है कि अभियंता और संवेदक की मिलीभगत से विपत्र (बिल/मेज़रमेंट) तैयार किए गए, जबकि ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है।
सेवानिवृत्ति के बाद ‘मनमानी’!
ग्रामीण बताते हैं कि लंबे समय तक कार्य बंद रखा गया था। लेकिन कार्यपालक अभियंता राधे श्याम मांझी के सेवा निवृत्त होते ही संवेदक ने मनमाने ढंग से काम शुरू करा दिया। न तो निगरानी दिखी, न ही गुणवत्ता नियंत्रण।
विधायक भी नाराज़, जांच की मांग
संवेदक द्वारा किए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता पर स्थानीय विधायक और ग्रामीण—दोनों ने सवाल उठाए हैं। सूत्रों का दावा है कि विधायक ने विभाग को औपचारिक रूप से जांच के लिए लिखा है। यह मामला अब महज़ ग्रामीण असंतोष नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही का बनता जा रहा है।
समयसीमा का मज़ाक!
ग्रामीणों का आरोप है कि संवेदक की कोई भी योजना निर्धारित समय पर पूरी नहीं होती। विलंब को सामान्य बना दिया गया है और देरी के बावजूद भुगतान और बिलिंग की चर्चाएँ तेज़ हैं।
PMGSY में भी खेल?
विशेष रूप से PMGSY (प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना) के अंतर्गत प्राक्कलन के विरुद्ध कार्य किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। मानक मोटाई, सामग्री की गुणवत्ता और तकनीकी प्रक्रियाओं को नज़रअंदाज़ किए जाने का आरोप है।
DPR ‘रिवाइज’, मनमर्जी से!
आरोप है कि स्वीकृत DPR को अपने मन मुताबिक रिवाइज करा लिया गया। सवाल यह है कि किसके आदेश पर और किस प्रक्रिया से यह बदलाव हुआ? क्या ग्रामसभा/तकनीकी स्वीकृति ली गई? जवाब नदारद हैं।
PCC सड़क की पोल खुली
ग्रामीणों का कहना है कि PCC सड़क की गुणवत्ता “नग्न” है—यानी कमज़ोर मिश्रण, अपर्याप्त क्योरिंग और सतही फिनिश में खामियाँ साफ़ दिख रही हैं। उच्च स्तरीय संस्था से जांच कराने का फैसला लिया गया है।
पहले भी डिबार!
सूत्रों का दावा है कि पथ निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा संवेदक आरोहन बिल्डर को पहले भी डिबार किया जा चुका है। ऐसे में सवाल उठता है कि इतिहास जानते हुए भी कार्यादेश कैसे मिला?
ग्रामीणों ने बनाया वीडियो, सबूत तैयार
नोवागाँव से बसिरा पथ के निर्माण का वीडियो ग्रामीणों ने खुद रिकॉर्ड किया है। वीडियो में ढलाई की प्रक्रिया, निगरानी की कमी और गुणवत्ता संबंधी खामियाँ दिखने का दावा किया जा रहा है। यह वीडियो अब जांच की मांग का प्रमुख आधार बन गया है।
निगरानी तंत्र फेल?
क्या अभियंता मौके पर थे?
क्या थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन हुआ?
क्या गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट मौजूद है?
इन सवालों पर विभाग खामोश है। यह निगरानी तंत्र की विफलता नहीं तो और क्या?
जनता का पैसा, जवाबदेही कहाँ?
ग्रामीणों का सीधा सवाल—जब जनता के पैसे से सड़क बन रही है, तो गुणवत्ता से समझौता क्यों?
लापरवाह अफसर, बेलगाम संवेदक—आख़िर जवाबदेह कौन?
मांगें तेज़
सभी योजनाओं की उच्च स्तरीय जांच
PMGSY कार्यों का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट
दोषी अभियंता व संवेदक पर कार्रवाई
भुगतान रोककर पुनः गुणवत्ता परीक्षण
निष्कर्ष
नोवागाँव–बसिरा पथ का मामला केवल एक सड़क नहीं, बल्कि प्रशासनिक ईमानदारी और जनहित की कसौटी है। यदि आरोप सही हैं तो कड़ी कार्रवाई ज़रूरी है, अन्यथा ग्रामीणों का भरोसा टूटेगा और योजनाओं की साख पर बट्टा लगेगा।
अब देखना यह है कि विभाग जांच करता है या आरोपों को फाइलों में दफना दिया जाता है।













