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गुवा सेल खदान सिविल विभाग में भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप — टैंक सफाई कार्य में मजदूरों का शोषण, 19 लाख के टेंडर पर उठे गंभीर सवाल

On: November 29, 2025 5:06 PM
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गुवा संवाददाता।

गुवा सेल खदान के सिविल विभाग में भ्रष्टाचार और मनमानी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। शौचालय टैंक सफाई कार्य को लेकर उठे सवालों ने विभागीय सिस्टम की कार्यशैली और टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गहरे संदेह खड़े कर दिए हैं।


19 लाख के टेंडर पर सवाल — सोना कंस्ट्रक्शन को मिला काम, सुरक्षा इंतजाम नदारद

सूत्रों के मुताबिक, टैंक सफाई का 19 लाख रुपये का टेंडर सोना कंस्ट्रक्शन के कॉन्ट्रैक्टर मोहम्मद इस्लाम को दिया गया है। इतना बड़ा ठेका मिलने के बावजूद मजदूरों को काम के समय

  • सेफ्टी बेल्ट,
  • ग्लव्स,
  • गम बूट,
  • हेलमेट

जैसे बुनियादी सुरक्षा उपकरण तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। यह न केवल सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन है, बल्कि मजदूरों की जान को भी सीधे खतरे में डालता है।


मजदूरों को 664 की जगह 350 रुपये — श्रम कानूनों की खुलेआम धज्जियां

झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे ने आरोप लगाया कि टैंक सफाई में लगे मजदूर सेमी-स्किल्ड श्रेणी में आते हैं, जिनका निर्धारित दैनिक मजदूरी दर 664 रुपये है।
लेकिन मजदूरों को प्रतिदिन सिर्फ 350 रुपये ही दिए जा रहे हैं।

यह सीधा-सीधा

  • श्रम कानूनों का उल्लंघन,
  • टेंडर राशि की हेराफेरी,
  • वित्तीय गड़बड़ी

का संकेत देता है। मजदूरों के मेहनताना में इस प्रकार की कटौती कहीं न कहीं बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।


“मिलीभगत बिना संभव नहीं” — रामा पांडे का गंभीर आरोप

रामा पांडे का कहना है कि इस मामले में केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि सिविल विभाग के कुछ उच्चस्तरीय सेल अधिकारियों की मिलीभगत भी शामिल है।
उन्होंने कहा,

“इतने बड़े पैमाने पर मजदूरों का शोषण और वित्तीय अनियमितताएं बिना अधिकारियों की सहमति या संरक्षण के संभव नहीं। यह पूरा मामला संगठित भ्रष्टाचार का संकेत देता है।”

यूनियन ने इस संबंध में कई बार सेल प्रबंधन को

  • लिखित शिकायत,
  • बैठक में मुद्दा उठाना,
  • दस्तावेजों के साथ प्रमाण देना

जैसी कार्रवाई की, लेकिन किसी भी स्तर पर प्रबंधन द्वारा जांच की पहल नहीं की गई।


शिकायतों पर प्रबंधन मौन — न जांच, न कार्रवाई

यूनियन के अनुसार, अब तक

  • न तो कोई जांच कमेटी गठित की गई,
  • न ठेकेदार से स्पष्टीकरण मांगा गया,
  • न ही मजदूरों की सुरक्षा या मजदूरी से संबंधित समस्याओं पर कोई कदम उठाया गया।

प्रबंधन की यह चुप्पी सवालों को और गहरा करती है कि आखिर 19 लाख रुपये का टेंडर पारदर्शी तरीके से उपयोग हो रहा है या नहीं।


यूनियन की कड़ी चेतावनी — “अब ईएलसी ऑफिस चाईबासा में दर्ज होगी आधिकारिक शिकायत”

रामा पांडे ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सेल प्रबंधन जल्द कार्रवाई नहीं करता है, तो यूनियन इस पूरे प्रकरण की शिकायत ईएलसी ऑफिस चाईबासा में औपचारिक रूप से दर्ज कराएगी।
उन्होंने कहा कि मजदूरों के अधिकारों और सुरक्षा से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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