“3344 करोड़ जमा, फिर भी सरंडा भूखा-प्यासा” — 25 मार्च को मनोहरपुर में उग्र धरना
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
आज 3 मार्च 2026 को बारला निवास, मनोहरपुर में भारत आदिवासी पार्टी प. सिंहभूम की मनोहरपुर विधानसभा स्तरीय बैठक जिलाध्यक्ष सुशील बारला की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में DMFT (District Mineral Foundation Trust) मद में हो रही कथित अनियमितताओं को लेकर प्रशासन और खनन प्रबंधन पर सीधा और तीखा हमला बोला गया।
सुशील बारला ने आरोप लगाया कि जिले में DMFT की राशि नियमावली के अनुसार नहीं, बल्कि “अपने चहेते संवेदकों को लाभ पहुंचाने के लिए सुनियोजित तरीके से” खर्च की जा रही है। उन्होंने इसे खुलेआम भ्रष्टाचार और आदिवासी अधिकारों की लूट करार दिया।

3344 करोड़ जमा, लेकिन सरंडा आज भी बदहाल
बैठक में बताया गया कि अगस्त 2025 तक कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) और DMFT मद के तहत 3344 करोड़ रुपए जमा किए गए, जिनसे 8755 योजनाएं स्वीकृत की गईं।
इसके बावजूद खान प्रभावित क्षेत्र सरंडा के युवा आज भी बड़े पैमाने पर दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए पलायन करने को मजबूर हैं।
सुशील बारला ने कहा—
“गुवा और चिड़िया लौह अयस्क खान क्षेत्र के लोग आज भी गरीबी रेखा से नीचे जीवन जी रहे हैं। करोड़ों की योजनाओं का कागजी ढोल पीटा जा रहा है, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं दिखता।”
नदी-नालों का पानी पीने को मजबूर ग्रामीण
बैठक में गंभीर आरोप लगाया गया कि खनन प्रभावित गांवों के लोग आज भी नदी-नालों का पानी पीने को विवश हैं, जबकि DMFT मद से पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिलाओं-बच्चों के विकास, कौशल प्रशिक्षण, सिंचाई और जल संरक्षण पर खर्च होना चाहिए।
बारला ने कहा—
“DMFT का पैसा जनता के लिए नहीं, बल्कि अधिकारियों और संवेदकों के गठजोड़ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। यह आदिवासी समाज के साथ सबसे बड़ा धोखा है।”
वनाधिकार पट्टा नहीं, सिर्फ फाइलों का खेल
बैठक में यह भी मुद्दा उठा कि वनाधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदन देने के बावजूद हजारों आदिवासियों को अब तक वनाधिकार पट्टा नहीं दिया गया है।
नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन जानबूझकर फाइलें दबाकर बैठा है, ताकि जमीन पर अधिकार देने के बजाय कॉरपोरेट और ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया जा सके।
25 मार्च को मनोहरपुर में उग्र धरना
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि
25 मार्च 2026 को प्रखंड मुख्यालय मनोहरपुर में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
धरने के बाद महामहिम राज्यपाल और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें प्रमुख मांगें होंगी—
* DMFT योजनाओं की उच्चस्तरीय जांच
* दोषी अधिकारियों और संवेदकों पर कार्रवाई
* खान प्रभावित गांवों में पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा की तत्काल व्यवस्था
* लंबित वनाधिकार पट्टों का शीघ्र वितरण
“भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा” — सुशील बारला
जिलाध्यक्ष सुशील बारला ने दो टूक शब्दों में कहा—
“DMFT योजनाओं में भ्रष्टाचार अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर प्रशासन नहीं जागा, तो आदिवासी समाज सड़क पर उतरकर निर्णायक संघर्ष करेगा।”
बैठक में ये रहे प्रमुख चेहरे
बैठक में जिला सचिव शांन्तिएल कान्डयबुरू,
मोजेस चेरोवा,
विल्सन बहंन्दा,
मासुम हेमब्रोम,
सेम सुन्दर लोमगा,
दीपक गुड़िया,
वरदान ओडेया सहित बड़ी संख्या में सक्रिय सदस्य उपस्थित रहे।
आदिवासी इलाकों में उबाल
DMFT में कथित घोटाले और वनाधिकार पट्टों में देरी को लेकर सरंडा और मनोहरपुर क्षेत्र में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि अगर अरबों रुपये सच में गांवों पर खर्च हुए होते, तो आज पलायन, भूख और बीमारी उनकी पहचान नहीं बनती।
अब निगाहें 25 मार्च के धरना-प्रदर्शन पर टिकी हैं, जहां आदिवासी समाज अपने हक के लिए खुली लड़ाई का ऐलान करेगा।














