रोज़ाना 60 ट्रैक्टर अवैध बालू निकासी, पर्यावरण और कानून दोनों की खुलेआम हत्या
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
झारखण्ड आंदोलनकारी संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष झारखण्ड आंदोलनकारी संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष आसमान सुंडी ने शनिवार को जिला खनन पदाधिकारी को कड़ा और आक्रामक आवेदन सौंपते हुए ईलीगाड़ा नदी घाट से हो रही अवैध बालू निकासी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
आवेदन में कहा गया है कि ईलीगाड़ा नदी घाट से विगत कई महीनों से प्रतिदिन लगभग 60 ट्रैक्टर बालू की खुलेआम लूट की जा रही है, लेकिन खनन विभाग, थाना और प्रशासन आंखें मूंदे बैठे हैं।

🚜 अवैध बालू माफिया का पूरा नेटवर्क बेनकाब
यह बालू घाट तांतनगर प्रखंड एवं ओपी तांतनगर (कोकचो थाना–मंझारी) क्षेत्र में अवस्थित है।
यहां से निकाला गया अवैध बालू —
➡️ खरकई नदी की ओर
➡️ ग्राम बांदोडीह पुलिया के पास
➡️ ग्राम जयपुर होते हुए
➡️ विभिन्न इलाकों में खपाया जा रहा है।
यानी पूरा रूट तय है, सिस्टम सेट है और माफिया बेखौफ है।
🛣️ नदी किनारे बना दी गई अवैध कच्ची सड़क – कानून को ठेंगा
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बोंडोडीह पुल से नदी किनारे होते हुए ग्राम ईलीगाड़ा घाट तक अवैध कच्ची सड़क का निर्माण कर दिया गया है ताकि ट्रैक्टरों की आवाजाही आसानी से हो सके।
यह सीधा प्रमाण है कि:
❗ यह कोई छिपा हुआ अपराध नहीं
❗ बल्कि सुनियोजित अवैध कारोबार है
❗ और इसमें स्थानीय संरक्षण की बू साफ दिख रही है
🌊 पर्यावरण पर हमला, ग्रामीणों के भविष्य से खिलवाड़
लगातार हो रही बालू निकासी से:
नदी का प्राकृतिक बहाव बिगड़ रहा है
भू-क्षरण (कटाव) तेज़ हो रहा है
खेती और जलस्तर पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है
आने वाले समय में बाढ़ और सूखे दोनों की आशंका बढ़ रही है
यह सिर्फ बालू चोरी नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन पर सीधा हमला है।
🗣️ आसमान सुंडी का तीखा बयान
आसमान सुंडी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा:
“अगर प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो झारखण्ड आंदोलनकारी संयुक्त मोर्चा सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा।
यह बालू माफिया नहीं, बल्कि नदी का खून चूसने वाले अपराधी हैं।
सरकार की चुप्पी इस लूट में साझेदारी जैसी लग रही है।”

❓ सवालों के घेरे में प्रशासन
अब सबसे बड़ा सवाल यह है:
क्या खनन विभाग को इस अवैध निकासी की जानकारी नहीं?
क्या थाना पुलिस को रोज़ाना 60 ट्रैक्टर की आवाजाही दिखाई नहीं देती?
क्या बिना मिलीभगत के नदी किनारे सड़क बन सकती है?
यदि नहीं, तो यह सीधी प्रशासनिक विफलता है।
और यदि हां, तो यह संरक्षण प्राप्त अवैध कारोबार है।
🔥 चेतावनी: आंदोलन की तैयारी
झारखण्ड आंदोलनकारी संयुक्त मोर्चा ने साफ कर दिया है कि अगर जल्द:
✔️ अवैध बालू निकासी बंद नहीं हुई
✔️ दोषियों पर FIR दर्ज नहीं हुई
✔️ कच्ची सड़क ध्वस्त नहीं की गई
तो संगठन उग्र आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम करेगा।
ईलीगाड़ा नदी आज प्रशासनिक लापरवाही और बालू माफिया की साजिश का शिकार बन चुकी है।
यदि अभी सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो यह इलाका आने वाले समय में पर्यावरणीय कब्रिस्तान बन जाएगा।
अब देखना यह है कि प्रशासन कार्रवाई करता है या बालू माफिया के आगे घुटने टेकता है।














