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वैसाखी पर किरीबुरू में भक्ति का महासंगम: निशान साहिब का चोला परिवर्तन पूरे धार्मिक रीति-रिवाज के साथ सम्पन्न

On: April 13, 2026 1:03 PM
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दूध-दही से स्नान के बाद बदला गया चोला, कलगीधर गुरुद्वारा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

वैसाखी पर्व के पावन अवसर पर किरीबुरू स्थित कलगीधर गुरुद्वारा में 13 अप्रैल को निशान साहिब का चोला परिवर्तन अत्यंत श्रद्धा, मर्यादा और सिख परंपराओं के अनुसार संपन्न किया गया। इस दौरान पूरा गुरुद्वारा परिसर भक्ति और आस्था के रंग में डूबा नजर आया।

दूध-दही से स्नान के बाद हुआ चोला परिवर्तन

चोला परिवर्तन से पूर्व निशान साहिब को सिख परंपरा अनुसार दूध, दही और पवित्र जल से स्नान (इश्नान) कराया गया। इस पावन प्रक्रिया के दौरान संगत ने सेवा भाव से भाग लिया और “वाहेगुरु” के जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा।
स्नान के उपरांत नए चोले को बड़े सम्मान और मर्यादा के साथ चढ़ाया गया, जो सिख धर्म में पवित्रता, नवीकरण और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है।

अरदास और सेवा के साथ सम्पन्न हुआ अनुष्ठान

कार्यक्रम की शुरुआत अरदास के साथ हुई और संगत ने मिलकर सेवा भाव से पूरे अनुष्ठान को पूर्ण किया। हर ओर भक्ति, अनुशासन और समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिला।

पृष्ठभूमि: पावन स्वरूप में पहुँचे गुरु ग्रंथ साहिब

इस धार्मिक आयोजन की शुरुआत उस समय हुई जब गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप को जमशेदपुर के रामदास भट्ठा, बिष्टुपुर स्थित गुरुद्वारा से विशेष पालकी साहिब में सुसज्जित कर किरीबुरू लाया गया।
बाबाजी हरभजन सिंह, माताजी सतवंत कौर, माताजी बलजीत कौर और माताजी यशवीर कौर के नेतृत्व में श्रद्धालुओं का जत्था गुरबाणी और सेवा भावना के साथ गुरुद्वारा पहुँचा।

भव्य स्वागत और सेवा की परंपरा

टाउन गेट पर पावन स्वरूप का भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने:
* सड़कों पर पानी का छिड़काव
* झाड़ू लगाकर सफाई
* फूलों की वर्षा कर पूरे मार्ग को पवित्र बनाया। यह सेवा सिख धर्म की मूल भावना को दर्शाती है।

माथे पर उठाकर स्थापित किया गया पावन स्वरूप

गुरुद्वारा पहुंचने पर बाबाजी हरभजन सिंह ने पूर्ण श्रद्धा के साथ गुरु ग्रंथ साहिब को माथे पर उठाकर पवित्र स्थान पर स्थापित किया और अरदास कर क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।

संगत की उमड़ी भीड़

इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से धरम सिंह, अवतार सिंह, ज्ञान सिंह, संतोष सिंह, रीमा कौर, दीपा कौर, ममता सिंह, सलोनी सिंह, ऋषि सिंह, त्रिलोचन सिंह, निर्मल सिंह, हरपाल सिंह, मुख्तार सिंह, पपिंदर सिंह, नरेंद्र कौर, आयुषी कौर, राजदीप कौर, गुड्डू राय, छोटू पासवान सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे।

तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम जारी

वैसाखी पर्व के अवसर पर गुरुद्वारा में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं:
* 12 अप्रैल – अखंड पाठ
* 13 अप्रैल – निशान साहिब का चोला परिवर्तन
* 14 अप्रैल – भजन-कीर्तन एवं भव्य लंगर

आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम

निशान साहिब के चोला परिवर्तन से लेकर गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप के आगमन तक, पूरा आयोजन सिख धर्म की आस्था, सेवा और समर्पण का जीवंत उदाहरण बना।
जहां सेवा है, वहीं सिख धर्म की आत्मा है—और किरीबुरू में यह भावना पूरे चरम पर दिखी।

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