किरीबुरू और गुवा में गूंजा “प्रभु यीशु जीवित हैं” का संदेश
रिपोर्ट: शैलेश सिंह / संदीप गुप्ता
किरीबुरू और गुवा क्षेत्र में ईसाई समुदाय के लोगों ने ईस्टर संडे को पूरे हर्षोल्लास, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि आशा, पुनर्जन्म और नई शुरुआत का भी संदेश देता है। चर्चों और कब्रिस्तानों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ी और “प्रभु यीशु जीवित हैं” की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

ऐतिहासिक और धार्मिक पृष्ठभूमि
ईसाई धर्म के अनुसार, गुड फ्राइडे के दिन प्रभु यीशु मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। यह दिन उनके बलिदान और मानवता के लिए दिए गए त्याग की याद में मनाया जाता है।
इतिहास के अनुसार, प्रभु यीशु ने प्रेम, करुणा, क्षमा और भाईचारे का संदेश दिया, जो उस समय के कट्टर धार्मिक समूहों को स्वीकार्य नहीं था। परिणामस्वरूप, रोमन शासन के अधीन उन्हें क्रूस पर चढ़ा दिया गया।
लेकिन ईसाई मान्यता के अनुसार, तीसरे दिन यानी रविवार को प्रभु यीशु पुनर्जीवित हो उठे—यही दिन ईस्टर संडे के रूप में मनाया जाता है। यह घटना ईसाई धर्म की सबसे महत्वपूर्ण आस्था का आधार है, जो यह दर्शाती है कि सत्य, प्रेम और जीवन की जीत हमेशा होती है।
सुबह-सुबह कब्रिस्तानों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
ईस्टर के अवसर पर किरीबुरू और गुवा के ईसाई समुदाय के लोग अहले सुबह अपने-अपने कब्रिस्तानों में पहुंचे।
* लोगों ने अपने पूर्वजों की कब्रों पर मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की
* प्रभु यीशु को याद करते हुए विशेष प्रार्थनाएं की गईं
* पूरे वातावरण में शांति, श्रद्धा और भावनात्मक जुड़ाव का अनोखा दृश्य देखने को मिला
इस दौरान एक-दूसरे को “हैप्पी ईस्टर” कहकर शुभकामनाएं दी गईं और खुशियां साझा की गईं।

किरीबुरू में विशेष आराधना और संदेश
किरीबुरू में आयोजित कार्यक्रम में
* CNI चर्च के प्रचारक नरेश लुगुन ने आराधना कराई
* GEL चर्च के प्रचारक एस. भेंगरा ने ईस्टर का संदेश दिया
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि ईस्टर हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों और दुखों के बाद भी जीवन में नई उम्मीद और रोशनी आती है।
कब्र कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं के लिए चाय और बिस्कुट की व्यवस्था भी की गई, जिससे सामुदायिक एकता और भाईचारे का परिचय मिला।

जनप्रतिनिधियों और समाज के लोगों की भागीदारी
इस अवसर पर कई गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे, जिनमें
* मुखिया पार्वती कीड़ों
* मुखिया प्रफुल्लित ग्लोरिया टोपनो
* कुमुद हेंब्रम
सहित अन्य स्थानीय लोग शामिल थे। सभी ने मिलकर इस पर्व को सामाजिक समरसता और एकता के साथ मनाया।
गुवा में भी दिखी गहरी आस्था
गुवा के कब्रिस्तान में भी ईस्टर को लेकर विशेष आयोजन हुआ, जहां
* पादरी सुशील कुमार बागे
* पंचम जार्ज सोय
* मनोज बाखला
* दाऊद पूर्ति
* जार्ज तिर्की
* जेम्स
सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर प्रभु यीशु के पुनर्जीवन की खुशी मनाई और मानवता के कल्याण की प्रार्थना की।

ईस्टर: नई शुरुआत और आत्ममंथन का पर्व
ईस्टर केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन और परिवर्तन का भी अवसर है।
यह पर्व सिखाता है कि—
* बुराई पर अच्छाई की जीत निश्चित है
* निराशा के बाद आशा का उदय होता है
* प्रेम और क्षमा ही मानवता का सच्चा मार्ग है

आस्था, प्रेम और एकता का संदेश
किरीबुरू और गुवा में मनाया गया ईस्टर पर्व इस बात का प्रतीक बना कि आज भी समाज में प्रेम, भाईचारा और आस्था की जड़ें मजबूत हैं।
प्रभु यीशु का संदेश आज भी लोगों के दिलों में जीवित है और यही संदेश समाज को जोड़ने और आगे बढ़ाने का मार्ग दिखाता है।














