भक्ति, प्रेम और आनंद से सराबोर रहा पूरा वातावरण
गुवा संवाददाता।
बड़ाजामदा स्थित सत्संग विहार में रविवार को मासिक सत्संग कार्यक्रम श्रद्धा, प्रेम और भक्ति से ओतप्रोत माहौल में संपन्न हुआ। सुबह से ही सत्संग विहार परिसर में भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई थी, और पूरे परिसर में भजन-कीर्तन की दिव्य ध्वनि गूंजती रही।

भोग निवेदन और भंडारा का उत्कृष्ट प्रबंध
बलियाडीह और जगन्नाथपुर सत्संग उपयोजना केंद्र के सौजन्य से भोग निवेदन सह आनंद बाजार (भंडारा) का सुंदर और व्यवस्थित प्रबंध किया गया।
सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर आध्यात्मिक और सामाजिक आनंद का अनुभव किया।
विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालु
बड़ाजामदा, गुवा, नोवामुंडी, किरीबुरु, कोचड़ा, भनगांव सहित आसपास के विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में गुरुभाई एवं गुरुमाँ उपस्थित हुए।
सत्संग स्थल भक्तों की उपस्थिति से भरा रहा, जहां सभी ने गुरु-परंपरा और प्रेमाधारित सामूहिक आध्यात्मिक अनुभव का आनंद लिया।
भावपूर्ण भजन-कीर्तन
कार्यक्रम में प्रस्तुत भजन-कीर्तन ने हर हृदय को भक्ति रस से भर दिया।
प्रमुख भजन प्रस्तोता थे:
- श्रद्धेय शिवलाल लकड़ा दा
- मनमोहन चौबे दा
- शशिकांत पोदार दा
- शुभदीप ठाकुर दा
- श्रद्धेया रश्मिता माँ
- पार्वती माँ, द्रोपदी पात्रो माँ
- मेदिनी माँ, जयश्री माँ
- कविता माँ, माला माँ एवं मुनमुन
इनकी सुमधुर प्रस्तुति पर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
भावधारा आधारित याजन एवं प्रवचन
कार्यक्रम में संरक्षक एवं सह प्रति-ऋत्विक श्रद्धेय अमरनाथ ठाकुर दा,
डॉ. सुबोध बड़ाईक, श्रद्धेय तापस चन्द्र डे दा, श्रद्धेय मनमोहन चौबे दा एवं श्रद्धेय भगवान सिंकु दा द्वारा
परम प्रेममय श्री श्री ठाकुर अनुकूल चन्द्र जी की भावधारा पर आधारित याजन किया गया।
सत्संग के दौरान ठाकुर जी की दिव्य उपदेश और मानवता, सेवा, प्रेम एवं सदाचार के संदेशों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी गई।

अनुकूल माहौल में सम्पन्न हुआ आयोजन
पूरे कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रद्धेय अमरनाथ ठाकुर दा ने सौम्य और अनुशासित ढंग से की।
उनके नेतृत्व में सत्संग विहार में आध्यात्मिक अनुशासन और सेवा का अनुपम वातावरण देखने को मिला।
भक्ति में डूबा रहा बड़ाजामदा
सत्संग कार्यक्रम के दौरान
भक्ति, प्रेम, अनुशासन और आनंद का अद्वितीय वातावरण व्याप्त रहा।
भक्तों ने कहा कि सत्संग जैसे आयोजन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार करते हैं।















