डूबते सूरज को अर्घ्य, रातभर भक्ति, उगते सूर्य से पूर्ण होगा व्रत
रिपोर्ट: शैलेश सिंह, भोजपुर (आरा)
गांव में छठ की शुरुआत, हर घर में पर्व का उल्लास
बिहार के भोजपुर (आरा) जिले के पचमा गांव में छठ के पावन पर्व की रौनक देखते ही बनती है। यहां स्थित श्री बुढ़ऊ महादेव मंदिर के छठ घाट तालाब पर सैकड़ों छठव्रतियों और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है।
पर्व की शुरुआत के साथ ही गांव का हर घर भक्ति, पवित्रता और उत्साह से भर उठा है।

सफाई से लेकर सजावट तक—गांववासियों ने निभाई जिम्मेदारी
छठ पर्व से दो दिन पहले ही पचमा गांव के लोग जुट गए:
- ✔️ गांव की गलियों की सफाई
- ✔️ नालियों की पूरी तरह धुलाई
- ✔️ छठ घाट पर विशेष स्वच्छता अभियान
- ✔️ जगह-जगह रंगबिरंगी रंगोलियां
- ✔️ मार्गों को सुंदर डिज़ाइन से सजावट
छठ व्रतियों के मार्ग पर हर कदम सजावट, सादगी और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

बैंड-बाजे और पारंपरिक गीतों के साथ घाट की ओर कूच
सांझ ढलते ही व्रतियों का हुजूम अपने परिवार व समुदाय के साथ:
- ढोल-नगाड़ों और बैंड बाजों की धुनों पर
- पारंपरिक छठ गीतों की गूंज के साथ
- पूरी भक्ति भावना से छठ घाट की ओर रवाना हुआ
छठ गीतों में शामिल भावनाओं ने पूरे वातावरण को दिव्यता से भर दिया।

छठ घाट पर जगमगाती रोशनी—पूरा तालाब रोशन
श्री बुढ़ऊ महादेव मंदिर परिसर और तालाब के चारों ओर:
- रंग बिरंगी LED लाइटें
- जगमगाते झालर
- सजावटी डेकोरेशन
- स्वच्छ व व्यवस्थित व्यवस्था
पूरी रात्रि भक्ति में डूबे रहने के लिए दोहरे सुरक्षा व प्रकाश प्रबंध किए गए।

डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य
27 अक्टूबर की शाम को:
- छठव्रतियों ने तालाब में पवित्र स्नान किया
- प्रसाद और पूजा सामग्री के साथ पूजा-अर्चना संपन्न की
- डूबते सूर्य देव को अर्घ्य दिया
सूर्य देव के प्रति आभार और प्रकृति के प्रति समर्पण की यह अनूठी पूजा गांव वालों के लिए आत्मा का सौभाग्य है।

रातभर भक्ति-जागरण, गीत-संगीत का दौर
भक्तगण पूरी रात घाट पर ही डेरा जमाए रहे:
- महिलाएं काशी-कलावा बांध आरती करती रहीं
- बच्चे दीप जलाकर तालाब किनारे खेलते रहे
- पुरुष सेवा सहयोग में लगे रहे
- हर पल धार्मिकता, सुरक्षा और सम्मान का माहौल
सुरक्षा टीम व स्वयंसेवकों की सतर्क निगाहें पूरी रात व्यवस्था संभालती रहीं।

सुबह उगते सूर्य की प्रतीक्षा—पूर्णता की ओर व्रत
अगली सुबह कर्णप्रिय गीतों के बीच व्रती:
- उगते सूर्य को अर्घ्य देंगी
- कच्चे दूध, गंगाजल और कुसुमित प्रसाद से पूजा होगा
- उसके बाद व्रत का पारण
यह पर्व सूर्योपासना के चरम पूर्णता का सुंदर क्षण माना जाता है।
छठ: पवित्रता, आस्था और अनुशासन का अनूठा संगम
छठ को भारत के सबसे पवित्र और कठोर व्रतों में शामिल किया जाता है। इसकी विशेषताएं:
| विशेषता | महत्त्व |
|---|---|
| बिना नमक और शुद्ध प्रसाद | तन-मन की शुद्धि |
| 36 घंटे निर्जल व्रत | दृढ़ संकल्प और अनुशासन |
| सूर्य देव की आराधना | प्रकृति और ऊर्जा का सम्मान |
| नदी-तालाब में अर्घ्य | जल और पर्यावरण संरक्षण का संदेश |
यह पर्व सामाजिक सद्भाव, मातृशक्ति और लोक-आस्था का अनुपम उदाहरण है।
गांव की समरसता—जाति और वर्ग से ऊपर भक्ति
पचमा गांव की विशेषता यह है कि:
- सभी जातियों के लोग छठ आयोजन में साथ
- व्रतियों की मदद, कोई भेदभाव नहीं
- प्रसाद और चायवाहन सभी के लिए
- अकेले व्रती को भी गांव का हर घर परिवार बनकर सहयोग करता है
छठ में समुदाय, संस्कृति और संवेदना का अनूठा मेल दिखता है।
छठ घाट सुरक्षा और सहयोग व्यवस्था
ग्रामीण सामाजिक कार्यकर्ताओं की टीम ने:
- चाय-पानी, गर्म दूध की व्यवस्था
- प्राथमिक चिकित्सा किट उपलब्ध
- भीड़ नियंत्रण में सहयोग
- साफ-सफाई निगरानी
हर व्रती को पूजा में कोई कठिनाई न हो—इसका पूरा ध्यान रखा गया।
सीमित साधन, लेकिन अपार श्रद्धा
भले ही गांव में संसाधन बहुत अधिक न हों:
- लेकिन श्रद्धा हर कठिनाई पर भारी
- साधारण से दीप जलने पर भी हृदय में प्रकाश
- जलाशय की लहरों पर भक्ति का कंपन
यही छठ की आत्मा है — कठोर तपस्या और सरल भाव।
लोकगीतों में छठ की महिमा
पूरी रात गूंजते रहे पारंपरिक गीत:
- “ऊँ हिलोरी दऽs, उगS हे सूरज देव…”
- “कांच ही बांस के बहंगिया…”
- “पाहन पूजे हर कोई…”
हर गीत में मां शशि देवी और सूर्य देव की उपासना का गौरव गाया गया।

महिलाओं की आस्था—परिवार की सुख-समृद्धि की कामना
छठ पर्व खासकर महिलाओं का पर्व माना जाता है:
- संतान की सुख-समृद्धि
- परिवार की खुशहाली
- दांपत्य जीवन की रक्षा
- कृषि, फसल और जल की प्रचुरता की प्रार्थना
व्रतियों की आंखों में विश्वास की चमक दूर से ही पहचान ली जाती है।
विरासत और आधुनिकता का संगम
नवयुवकों ने:
- सोशल मीडिया पर लाइव कवरेज
- पारंपरिक ગીત का रिकॉर्डिंग
- फोटो और वीडियो बनाकर प्रचार
ऐसे आयोजनों से आने वाली पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का मार्ग मिलता है।

छठ: केवल पर्व नहीं—जीवन के प्रति कृतज्ञता है
छठ पर्व प्रकृति के मूल तत्वों के प्रति सम्मान की शिक्षा देता है:
- सूर्य (ऊर्जा का स्रोत)
- जल (जीवन का मूल)
- भूमि (अन्नदाता)
- वायु और आकाश (जीवन का आधार)
यही कारण है कि इसे सबसे वैज्ञानिक लोकपर्व भी कहा जाता है।
बुढ़ऊ महादेव मंदिर परिसर—छठ का आध्यात्मिक केंद्र
मंदिर के आस-पास:
- भक्तों का तांता
- पुजारियों द्वारा विशेष आयोजन
- लोगों की मनोकामनाओं का केंद्र
पचमा गांव में बुढ़ऊ महादेव मंदिर छठ महापर्व का धार्मिक व सांस्कृतिक केंद्र बन चुका है।

समापन—उषा अर्घ्य के साथ खुशियों की सौगात
सुबह उगते सूर्य को अंतिम अर्घ्य देने के बाद:
- गांव में प्रसाद वितरण
- परिवारों में उल्लास
- एकता व भाईचारे का संदेश
- शुभकामनाओं के साथ पर्व का समापन
छठ मां की कृपा से सभी परिवारों में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे—इसी प्रार्थना के साथ यह महान पर्व पूर्ण होगा।
छठ की आस्था—अनंत, अविरल और उज्ज्वल
पचमा गांव की यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक दीप की तरह जगमगाती रहे—
यही है छठ की असली जीत, यही है भक्ति का महापर्व।















