नेशनल लेवल यूएसओ प्रतियोगिता में तीन छात्राओं की ऐतिहासिक जीत, पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
जहां संसाधन सीमित हों, वहां अक्सर सपनों की उड़ान को कठिन माना जाता है। लेकिन जैंतगढ़ की तीन नन्हीं बेटियों ने यह साबित कर दिया कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के सामने कोई सीमा नहीं होती। छोटे से कस्बे जैंतगढ़ से निकलकर इन छात्राओं ने नेशनल लेवल यूएसओ प्रतियोगिता में टॉपर बनकर न सिर्फ अपने परिवार का, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
यह उपलब्धि केवल एक परीक्षा की सफलता नहीं, बल्कि बेटियों की शक्ति, शिक्षा की ताकत और भविष्य की उम्मीदों की जीत है।

एक साथ चमकीं तीन सितारे
यूएसओ नेशनल टेस्ट 2025 के अंतर्गत आयोजित नाइंथ नेशनल आईटी एवं एआई टेस्ट में जैंतगढ़ निवासी—
लीजा शमीम (पुत्री – शम्मा बानो व एन. अहमद)
अनाबिया काशिफ
मायसरा जमाल
ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर टॉपर का स्थान प्राप्त किया।
संयोग यह रहा कि तीनों छात्राएं एक ही विद्यालय—केरला इंग्लिश मीडियम स्कूल, चंपुआ—और एक ही कक्षा (कक्षा छह) की हैं। यह मानो जैंतगढ़ की धरती से एक साथ तीन दीप जल उठे हों।
बेटियों की जीत, पूरे जैंतगढ़ का गर्व
इन तीनों बेटियों की सफलता की खबर जैसे ही फैली, पूरे जैंतगढ़ क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। मोहल्लों में चर्चा होने लगी, लोग एक-दूसरे को बधाइयां देने लगे और हर चेहरा गर्व से चमक उठा।
खास बात यह रही कि इस सफलता ने क्षेत्र की छात्राओं में नया आत्मविश्वास भर दिया। अब बेटियां खुद से कह रही हैं—
“अगर जैंतगढ़ की बेटियां टॉपर बन सकती हैं, तो हम क्यों नहीं?”
गणतंत्र दिवस पर मिला सम्मान, तालियों से गूंजा विद्यालय परिसर
विद्यालय परिसर में गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर इन तीनों छात्राओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
उन्हें मेडल और प्रमाण पत्र देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।
जब मंच पर तीनों छात्राएं एक साथ खड़ी हुईं, तो तालियों की गूंज ने पूरे परिसर को भावुक कर दिया। शिक्षकों की आंखों में गर्व और माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू साफ झलक रहे थे।
मेहनत की कहानी: सपनों से सफलता तक
विद्यालय के शिक्षकों के अनुसार तीनों छात्राएं शुरू से ही अनुशासित, मेहनती और जिज्ञासु रही हैं।
आईटी और एआई जैसे कठिन विषयों में उन्होंने नियमित अभ्यास, निरंतर अध्ययन और आत्मविश्वास के साथ तैयारी की।
इनकी सफलता यह संदेश देती है कि—
“प्रतिभा गांव और शहर नहीं देखती, वह सिर्फ मेहनत पहचानती है।”
बेटियों ने बदली सोच, बनाया नया रास्ता
यह सफलता केवल परीक्षा की जीत नहीं, बल्कि सामाजिक सोच की जीत भी है। जिस समाज में बेटियों की शिक्षा को लेकर अब भी चुनौतियां हैं, वहां जैंतगढ़ की बेटियों ने नई मिसाल कायम की है।
आज वे सिर्फ छात्राएं नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्तंभ बन चुकी हैं।

विद्यालय परिवार ने दी शुभकामनाएं
विद्यालय परिवार ने तीनों छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि बच्चों की कड़ी मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और माता-पिता के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ये छात्राएं देश और समाज के लिए गौरव बनेंगी।
जैंतगढ़ की धरती से उगा भविष्य का उजाला
इन बेटियों की सफलता ने जैंतगढ़ को एक नई पहचान दी है। आज यह कस्बा गर्व से कह सकता है कि उसकी बेटियां देश के मंच पर चमक रही हैं।
यह जीत सिर्फ तीन छात्राओं की नहीं, पूरे जैंतगढ़ की जीत है।













