सारंडा के दोदारी उत्क्रमित उच्च विद्यालय की भयावह तस्वीर, छत-दीवारें टूटने की कगार पर—क्या शिक्षा विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
सारंडा। नक्सल प्रभावित सारंडा क्षेत्र के गंगदा पंचायत अंतर्गत स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय, दोदारी की स्थिति ऐसी हो चुकी है कि यहां पढ़ने वाले करीब 300 बच्चों की जान हर दिन खतरे में पड़ रही है। जर्जर भवन, दरकती दीवारें और टूटती छतों के बीच बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक आंख मूंदे बैठा है। सवाल उठ रहा है कि क्या शिक्षा विभाग और प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
गुरुवार, 12 मार्च को गंगदा पंचायत के मुखिया राजू शांडिल ने अभिभावकों की लगातार शिकायतों के बाद विद्यालय का निरीक्षण किया। उनके साथ अभियंता और अन्य लोग भी मौजूद थे। इस दौरान उन्होंने विद्यालय के क्लास रूम की स्थिति देखी और प्रधानाध्यापक उत्तम कुमार दास से मुलाकात कर पूरी जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान जो सच्चाई सामने आई, उसने सभी को हैरान कर दिया।

दरकती दीवारें, झड़ता प्लास्टर और नीचे बैठते बच्चे
उत्क्रमित उच्च विद्यालय, दोदारी में कक्षा पहली से लेकर दसवीं तक की पढ़ाई होती है। विद्यालय में लगभग 290 बच्चों का नामांकन है। लेकिन इतने बच्चों के लिए स्कूल में सिर्फ पांच कमरे ही उपलब्ध हैं।
इन पांच कमरों में भी एक कमरा लाइब्रेरी, कार्यालय और स्टोर के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। यानी पढ़ाई के लिए सिर्फ चार कमरे बचे हैं। विडंबना यह है कि ये चारों कमरे भी बुरी तरह जर्जर हो चुके हैं।
कमरों की छतों में दरारें पड़ चुकी हैं, दीवारों का प्लास्टर गिर रहा है और कई जगहों पर ईंटें तक दिखाई देने लगी हैं। ऐसे खतरनाक माहौल में मासूम बच्चे बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं।

कमरे नहीं तो बरामदे में लगती है कक्षाएं
विद्यालय में कमरों की कमी इतनी गंभीर है कि कई बच्चों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाया जाता है। तेज धूप, उमस और बारिश के बीच भी बच्चों को पढ़ाई करनी पड़ती है।
बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता है और बरामदे में भी पढ़ाई संभव नहीं हो पाती। ऐसे में कई बार पढ़ाई बाधित हो जाती है। अभिभावकों का कहना है कि अगर बच्चों के बैठने के लिए सुरक्षित कमरा भी उपलब्ध नहीं होगा तो शिक्षा की गुणवत्ता की बात करना सिर्फ दिखावा है।

सात शिक्षक, लेकिन पढ़ाने के लिए सुरक्षित कमरा नहीं
विद्यालय में कुल सात शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें एक सरकारी शिक्षक, तीन पारा शिक्षक और तीन शिक्षक टाटा स्टील द्वारा अंशकालिक रूप से उपलब्ध कराए गए हैं।
शिक्षकों की मौजूदगी के बावजूद पढ़ाई सही तरीके से नहीं हो पा रही है। पर्याप्त कमरा नहीं होने के कारण कई बार एक ही कमरे में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को बैठाकर पढ़ाना पड़ता है।
शिक्षकों का कहना है कि वे अपनी ओर से पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन संसाधनों की भारी कमी के कारण पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

छह नए कमरे की मांग, लेकिन प्रशासन मौन
गंगदा पंचायत के मुखिया राजू शांडिल ने निरीक्षण के दौरान नाराजगी जताते हुए कहा कि इस विद्यालय की समस्या नई नहीं है। पंचायत की ओर से कई बार शिक्षा विभाग और प्रशासन से यहां छह नए कमरों के निर्माण की मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारियों को पत्र लिखा गया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे साफ जाहिर होता है कि विभाग इस गंभीर समस्या को लेकर संवेदनशील नहीं है।
राजू शांडिल ने तीखे शब्दों में कहा कि अगर इसी तरह लापरवाही जारी रही तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।

क्या हादसे के बाद ही जागेगा सिस्टम?
विद्यालय की जर्जर हालत देखकर स्थानीय लोगों में भी आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते भवन निर्माण नहीं कराया गया तो किसी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
अगर छत या दीवार गिर गई और उस समय बच्चे कक्षा में मौजूद रहे तो स्थिति भयावह हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को तुरंत इस दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
अभिभावकों का फूटा गुस्सा
विद्यालय की बदहाल स्थिति को लेकर अभिभावकों में भी भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि वे अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, लेकिन यहां उनकी जान तक सुरक्षित नहीं है।
अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही नए कमरों का निर्माण शुरू नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

सरकारी दावों की खुली पोल
दोदारी उत्क्रमित उच्च विद्यालय की स्थिति ने सरकारी दावों की भी पोल खोल दी है। एक ओर सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और डिजिटल शिक्षा की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर बच्चे जर्जर भवनों में पढ़ने को मजबूर हैं।
सारंडा जैसे दूरदराज और संवेदनशील इलाके में शिक्षा की ऐसी हालत चिंता का विषय है।

300 बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक दोदारी विद्यालय के बच्चे इस खतरे के साये में पढ़ाई करते रहेंगे। क्या शिक्षा विभाग किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा?
फिलहाल स्थिति यह है कि लगभग 300 बच्चे रोज जर्जर भवन के नीचे बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं और उनकी जिंदगी हर पल खतरे में है। अगर जल्द ही नए कमरों का निर्माण नहीं कराया गया तो किसी भी दिन यह लापरवाही एक बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है।














