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जिस इनामी नक्सली बेटे ने पुलिस को मारने की रची साजिशें, मौत के घाट उतारा, उसी पुलिस ने उसके माता-पिता को दिया सहारा

On: January 29, 2026 11:16 PM
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सारंडा मुठभेड़ में मारे गए इनामी नक्सली रापा मुंडा के परिजनों के साथ किरीबुरू पुलिस की मानवता की मिसाल

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

सारंडा के घने जंगलों में गोलियों की गूंज, बारूद की गंध और 17 नक्सलियों के मारे जाने की खबर पूरे देश में सुर्खियां बनी। लेकिन इस मुठभेड़ की एक ऐसी तस्वीर भी सामने आई, जिसने पत्थर दिल को भी पिघला दिया।
जिस नक्सली ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा पुलिस जवानों को मारने की योजनाएं बनाने में बिताया, उसी नक्सली के माता-पिता को सम्मान, भोजन और कंबल देकर विदा करने का काम किया – किरीबुरू थाना प्रभारी रोहित कुमार और उनकी पूरी टीम ने।
मारे गए कुख्यात इनामी नक्सली रापा मुंडा उर्फ रापा बोदरा उर्फ पावेल के प्रति पुलिस का यह मानवीय व्यवहार आज पूरे कोल्हान में चर्चा का विषय बना हुआ है।

मृत नक्सली रापा मुंडा के पिता को कंबल देते थाना प्रभारी रोहित कुमार

रापा मुंडा: 32 लाख का इनामी, 24 मामलों का आरोपी

रापा मुंडा कोई साधारण नक्सली नहीं था।
उस पर—
उड़ीसा सरकार द्वारा 32 लाख रुपये का इनाम
कुल 24 संगीन मामले
दर्जनों पुलिस और सुरक्षाबलों पर हमले की साजिशों में संलिप्तता
उसका नाम आते ही इलाके के ग्रामीणों में डर फैल जाता था।
वह अपने साथियों के साथ लगातार पुलिस को नुकसान पहुंचाने की नई-नई रणनीति बनाता रहा।
लेकिन जब 22–23 जनवरी 2026 की मुठभेड़ में वह मारा गया, तब कहानी ने एक नया मोड़ ले लिया।

मृत शरीर नहीं, इंसान का बेटा समझकर सौंपने की पहल

मुठभेड़ के बाद जब रापा मुंडा की पहचान हुई, तो सवाल उठा –
अब उसके शव का क्या होगा?
कई बार ऐसे मामलों में लाशें लावारिस रह जाती हैं।
लेकिन इस बार किरीबुरू थाना प्रभारी रोहित कुमार ने एक अलग ही फैसला लिया।
उन्होंने—
* विशेष वाहन भेजकर उड़ीसा के सुंदरगढ़ जिले के टोपकोई गांव से
रापा मुंडा के माता-पिता और ग्रामीणों को बुलवाया
* उन्हें सम्मान के साथ थाना परिसर में बैठाया
* पूरी संवेदनशीलता से समझाया कि
“आपका बेटा भले ही गलत रास्ते पर चला गया, लेकिन वह आपका बेटा है।”

थाना प्रभारी के साथ कंबल लिए रापा मुंडा के गांव के ग्रामीण

 

जब मां-बाप ने बेटे का शव लेने से इनकार कर दिया

थाने में एक बेहद मार्मिक दृश्य देखने को मिला।
रापा मुंडा के वृद्ध माता-पिता ने अपने ही बेटे का शव लेने से इनकार कर दिया।
उनका कहना था—
“जिस बेटे ने इतना पाप किया, उसका शरीर हम कैसे लें?”
उनकी आंखों में अपराधबोध था, शर्म थी और टूटे हुए सपनों का दर्द था।
तब थाना प्रभारी रोहित कुमार ने उन्हें समझाया—
“आप दोषी नहीं हैं। गलती बेटे की थी, पर माता-पिता को सजा नहीं मिलनी चाहिए।”
काफी देर तक बातचीत के बाद वे मान गए।

खाना, कंबल और सम्मान – पुलिस का मानवीय चेहरा

इसके बाद जो हुआ, वह पुलिस की छवि को नई ऊंचाई पर ले गया।
थाना प्रभारी रोहित कुमार ने—
* रापा मुंडा के माता-पिता और साथ आए ग्रामीणों को सम्मान के साथ बैठाया
* उन्हें भोजन कराया
* ठंड से बचने के लिए कंबल भेंट किया
* पूरे आदर के साथ विदा किया
इस दौरान वृद्ध माता-पिता और ग्रामीणों की आंखें झुकी हुई थीं।
वे शर्मसार थे कि—
“जिस बेटे ने पुलिस को मारने की योजना बनाई, उसी पुलिस ने हमें इंसान समझकर अपनाया।”

मृत नक्सली रापा मुंडा की मां को कंबल देते थाना प्रभारी रोहित कुमार

 

मुठभेड़ की पृष्ठभूमि: कैसे हुआ 17 नक्सलियों का खात्मा

पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक को सटीक सूचना मिली थी कि
प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के शीर्ष नेता—
अनल उर्फ पतिराम मांझी
अनमोल उर्फ सुशांत
अपने दस्ता सदस्यों के साथ छोटानागरा थाना क्षेत्र के
कुमडीह और बहदा गांव के जंगलों में घूम रहे हैं।
उनका मकसद था—
सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर बड़ी घटना को अंजाम देना।

संयुक्त ऑपरेशन: झारखंड पुलिस, कोबरा और CRPF की रणनीति

सूचना के सत्यापन के बाद—
* झारखंड पुलिस, झारखंड जगुआर
* कोबरा 209 बटालियन
* सीआरपीएफकी संयुक्त टीम बनाई गई।
22 और 23 जनवरी 2026 को
लगातार कई बार भीषण मुठभेड़ हुई।
नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग की।
जवाब में सुरक्षाबलों ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की।

17 नक्सली ढेर, भारी मात्रा में हथियार बरामद

सर्च अभियान के बाद—
कुल 17 नक्सलियों के शव बरामद
भारी मात्रा में
हथियार
विस्फोटक
कारतूस
दैनिक उपयोग की सामग्री
मिली।

मारे गए कुख्यात नक्सलियों में बड़े नाम

इस मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों में शामिल हैं—
अनल उर्फ पतिराम मांझी
अनमोल उर्फ सुशांत
अमित मुंडा
पिंटु लोहरा
लालजीत उर्फ लालु
समीर सोरेन
रापा मुंडा उर्फ पावेल
और कई अन्य कैडर सदस्य
ये सभी वर्षों से इलाके में आतंक का पर्याय बने हुए थे।

थाना में रापा मुंडा के गांव के ग्रामीणों को भोजन कराती पुलिस

 

मानवता बनाम हिंसा: एक गहरी सीख

इस पूरी घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया—
क्या नक्सली सिर्फ अपराधी हैं या किसी के बेटे-बेटी भी?
पुलिस ने यह साबित कर दिया कि
कानून का हाथ सख्त हो सकता है,
लेकिन दिल इंसानी बना रह सकता है।
रापा मुंडा के माता-पिता के साथ किया गया व्यवहार
यह बताता है कि
लड़ाई आतंक से है, इंसानियत से नहीं।

ग्रामीणों में बदली पुलिस की छवि

टोपकोई गांव से आए ग्रामीणों ने कहा— “हमने सोचा था पुलिस हमें डांटेगी, डराएगी।
लेकिन यहां हमें सम्मान मिला।”
इस घटना के बाद क्षेत्र में पुलिस की छवि एक
कठोर बल से संवेदनशील संरक्षक के रूप में उभरी है।

एक नक्सली गया, पर एक संदेश छोड़ गया

रापा मुंडा का अंत भले ही देश और समाज विरोधी कार्यों में हुआ,
लेकिन उसके बाद की कहानी इंसानियत की मिसाल बन गई।
उसकी मौत यह संदेश छोड़ गई कि—
गलत रास्ते का अंत सिर्फ मौत नहीं,
माता-पिता की आंखों में शर्म और समाज का दर्द भी होता है।

मृत नक्सली रापा मुंडा की मां को कंबल देते थाना प्रभारी रोहित कुमार

 

बंदूक से बड़ी होती है इंसानियत

सारंडा की इस मुठभेड़ को इतिहास
नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता के रूप में याद रखेगा।
लेकिन किरीबुरू थाना प्रभारी रोहित कुमार और उनकी टीम का यह कदम
उसे मानवता की जीत के रूप में भी यादगार बना देगा।
जहां एक ओर 17 नक्सलियों का खात्मा हुआ,
वहीं दूसरी ओर पुलिस ने यह दिखा दिया कि—
कानून का रास्ता कठोर हो सकता है,
पर इंसानियत का रास्ता हमेशा रोशन रहता है।
यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं,
बल्कि उस समाज के लिए संदेश है
जहां हिंसा के बीच भी
मानवता जिंदा रह सकती

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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