गंभीर स्थिति में पहुंचे मरीज
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
पश्चिमी सिंहभूम निवासी 62 वर्षीय जीतू हांसदा, पिता स्व. पोंगा हांसदा, लंबे समय से आंखों की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। दोनों आंखों में हाइपरमैच्योर कैटरेक्ट (अतिपक्व मोतियाबिंद) के कारण स्थिति इतनी कठिन हो चुकी थी कि वे आधा मीटर दूरी तक भी उंगलियां नहीं गिन पा रहे थे।

इलाज की आखिरी उम्मीद — डॉ. नंदी जेराई
परिवार की चिंता और दृष्टि खोने की बढ़ती आशंका के बीच मामला सेल किरीबुरू–मेघाहातुबुरू अस्पताल में तैनात अतिरिक्त सीएमओ इंचार्ज एवं वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. नंदी जेराई तक पहुंचा। उनकी विशेषज्ञता और अनुभव ने मरीज में नया भरोसा जगाया।

जटिल सर्जरी, सफल परिणाम
गहन जांच के बाद डॉ. जेराई ने आधुनिक तकनीक से दोनों आंखों की सर्जरी की।
ऑपरेशन बेहद जटिल था, लेकिन डॉक्टर की कुशलता और चिकित्सा टीम के सहयोग से यह सफल रहा।
परिणाम — मरीज की दृष्टि वापस लौट आई।
सर्जरी के बाद जीतू हांसदा भावुक हो उठे और डॉक्टर एवं अस्पताल प्रबंधन के प्रति आभार जताया।
परिवार और ग्रामीणों में खुशी
परिजनों ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतनी गंभीर स्थिति में यहां इलाज संभव हो सकेगा।
यह सफलता ग्रामीण और आदिवासी समुदाय में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास को मजबूत करती है।
डॉक्टर का संदेश — समय पर जांच बेहद जरूरी
डॉ. नंदी जेराई ने कहा कि अतिपक्व मोतियाबिंद के मामलों में मरीज यदि देर करते हैं तो दृष्टि हमेशा के लिए जा सकती है।
उन्होंने लोगों से अपील की —
“आंखों में थोड़ी भी समस्या हो तो तुरंत जांच कराएं।”
अस्पताल प्रबंधन की प्रशंसा
सेल किरीबुरू–मेघाहातुबुरू अस्पताल ने डॉ. जेराई की इस उपलब्धि को स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता का उदाहरण बताया।
स्थानीय स्तर पर ऐसी सफलता ग्रामीण जीवन में स्वास्थ्य सुरक्षा की नई उम्मीद जगाती है।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा का मजबूत संदेश
यह उपलब्धि साबित करती है कि
समर्पित डॉक्टर + आधुनिक चिकित्सा सुविधा = नयी रोशनी, नई जिंदगी
डॉ. नंदी जेराई ने एक बार फिर दिखाया है कि संवेदना, कौशल और सेवा का भाव मिलकर चमत्कार कर देता है।













