17 मरीज मलेरिया ग्रसित मिले, पूर्व सीएम मधु कोड़ा और पूर्व सांसद गीता कोड़ा भी हुए सक्रिय – सड़क बदहाली बनी बड़ी बाधा
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
खबर का असर – डॉक्टरों की टीम गांव पहुंची
कासिया–पेचा गांव में दूषित पानी से फैल रही बीमारी पर प्रकाशित खबर का असर अब दिखने लगा है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने संज्ञान लेते हुए मनोहरपुर सीएचसी (CHC) से डॉक्टरों की टीम गांव भेजी। टीम ने पहुंचकर लगभग 50 मरीजों की जांच और इलाज किया।

17 मलेरिया मरीज मिले
डॉक्टरों की जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। 50 मरीजों में से 17 लोग मलेरिया ग्रसित पाए गए। कई मरीज बुखार, खांसी और कमजोरी से पीड़ित हैं। हालांकि सभी मरीजों का इलाज नहीं हो सका, लेकिन डॉक्टरों ने दवाइयां बांटी और गंभीर रोगियों की पहचान की।
पूर्व सीएम और पूर्व सांसद भी हुए सक्रिय
गांव की गंभीर स्थिति की खबर मिलने पर पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और पूर्व सांसद गीता कोड़ा भी सक्रिय हुए। दोनों ने 24 सितंबर की शाम एक एंबुलेंस गांव भेजने की कोशिश की, लेकिन खराब सड़क की वजह से एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाई।
दोनों जनप्रतिनिधियों ने डॉक्टरों की टीम से सीधे संपर्क कर व्यवस्था की और ग्रामीणों की मदद के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी पहल करने की बात कही।

ग्रामीणों की राहत, लेकिन जरूरत अभी और
ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टरों की टीम ने गांव में कैंप लगाकर अच्छा काम किया। इससे कई बीमारों को राहत मिली। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
“कम से कम दो–तीन दिन और मेडिकल कैंप लगना जरूरी है, तभी सभी बीमारों का इलाज हो सकेगा।” – ग्रामीणों की मांग
गांव में तीन मरीज गंभीर हालत में हैं जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से एंबुलेंस भेजने की अपील की है।
सड़क बनी सबसे बड़ी बाधा
गांव तक पहुंचने में सबसे बड़ी समस्या सड़क की है। हल्की बारिश के बाद सड़क इतनी खराब हो जाती है कि वहां कोई वाहन नहीं जा पाता। यही कारण है कि एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच सकी।

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार डीसी और बीडीओ को ग्रामसभा के जरिए सड़क बनाने की गुहार लगाई, लेकिन अब तक सड़क नहीं बनी। नतीजा यह है कि बीमारी के समय इलाज तक समय पर नहीं मिल पाता।
सवाल बरकरार – कब मिलेगा स्थायी समाधान?
डॉक्टरों की टीम की पहल से ग्रामीणों को थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन सवाल अब भी बरकरार है –
- क्या सरकार गांव में स्थायी शुद्ध पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था करेगी?
- क्या स्वास्थ्य विभाग नियमित रूप से यहां मेडिकल कैंप लगाएगा?
- क्या प्रशासन टूटी सड़क बनवाएगा, ताकि आपातकालीन हालात में मदद पहुंच सके?
नतीजा
कासिया–पेचा गांव की स्थिति ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि समस्या पर जब तक मीडिया और जनता दबाव नहीं डालती, तब तक प्रशासनिक मशीनरी नहीं जागती। अब डॉक्टरों की टीम पहुंचना और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता उम्मीद जगाती है, लेकिन जब तक शुद्ध पानी और बेहतर सड़क उपलब्ध नहीं होती, तब तक ग्रामीणों की पीड़ा खत्म नहीं होगी।















