गुवा संवाददाता।
गुवा सेल परिसर में शनिवार का दिन ठेका कर्मियों के गुस्से और संघर्ष का गवाह बना। ओवरटाइम भुगतान में अनदेखी और ठेकेदारों की मनमानी के खिलाफ ठेका मजदूर जनरल ऑफिस के सामने जुटे, नारे लगाए और अपनी आवाज बुलंद की। लंबे समय से श्रमिकों को ओवरटाइम के पैसे नहीं मिलने से नाराज ठेका कर्मी अब आरपार की लड़ाई के मूड में नजर आए। अंततः प्रबंधन को बैठक कर आश्वासन देना पड़ा।

समस्या का बड़ा मुद्दा: 30 दिन काम, वेतन सिर्फ 26 दिन!
ठेका कर्मियों का आरोप है कि वे महीनों तक बिना छुट्टी लगातार 30 दिन तक काम करते हैं, लेकिन उन्हें मजदूरी मात्र 26 दिनों की ही दी जा रही है।
- दो महीने से ओवरटाइम भुगतान लंबित
- मजदूरी भुगतान में कटौती का आरोप
- काम अधिक, भुगतान कम — मजदूरों में नाराजगी चरम पर
एक मजदूर ने आक्रोश जाहिर करते हुए कहा—
“हम सुबह-शाम मेहनत कर रहे हैं। घर परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। ठेकेदार पैसा खा जा रहा है और हमें सिर्फ आश्वासन मिलता है। अब और नहीं!”
ज़ोरदार नारेबाजी और चेतावनी: चक्का जाम की धमकी
मजदूरों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होगा और पूरा प्लांट ठप कर दिया जाएगा।
नारे गूंजे—
- “मजदूर एकता ज़िंदाबाद!”
- “ओवरटाइम का पैसा दो!”
- “शोषण बंद करो!”
मजदूरों की चेतावनी का असर साफ दिखा। प्रबंधन हरकत में आया और अफसरों ने तत्काल बातचीत की मेज बिछाई।
प्रबंधन हरकत में — ताबड़तोड़ बैठक
मजदूरों के आंदोलन और यूनियनों की एकजुटता को देखते हुए सेल प्रबंधन ने तुरंत उच्च स्तर की बैठक बुलाई। बैठक में मुख्य महाप्रबंधक चंद्रभूषण कुमार ने यूनियन और मजदूर प्रतिनिधियों से बातचीत की।
7 नवंबर तक भुगतान का आश्वासन — प्रबंधन का बड़ा बयान
मुख्य महाप्रबंधक ने मजदूरों को भरोसा दिलाया—
- 7 नवंबर तक ओवरटाइम का पूरा भुगतान किया जाएगा।
- किसी मजदूर का वेतन नहीं काटा जाएगा।
- 30 दिन काम = 30 दिन का वेतन सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने कहा,
“मजदूर हमारी रीढ़ हैं। किसी का भी हक छीना नहीं जाएगा। ओवरटाइम भुगतान की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जा रही है।”
आश्वासन के बाद मजदूरों ने आंदोलन समाप्त किया, लेकिन चेतावनी भी दी कि यदि वादा पूरा नहीं हुआ तो संघर्ष और बड़ा होगा।
यूनियनों की मजबूत उपस्थिति
इस आंदोलन में संयुक्त यूनियन के तहत कई मजदूर संगठनों की एकजुटता देखने को मिली। बड़ी संख्या में मजदूर मौजूद रहे।
शामिल यूनियनें—
- झारखंड मजदूर संघर्ष संघ यूनियन
- बोकारो स्टील वर्कर्स यूनियन (इंटक)
- झारखंड मुक्ति मोर्चा यूनियन
- क्षेत्रीय मजदूर प्रतिनिधि और पदाधिकारी
यूनियन नेताओं ने कहा कि मजदूरों पर अत्याचार किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्थानीय मजदूरों का दर्द: “हमारी मेहनत की कमाई मत खाओ”
मजदूरों ने बताया कि लगातार महंगाई बढ़ रही है, बच्चों की फीस, घर खर्च और इलाज तक मुश्किल हो गया है। ऐसे में ओवरटाइम पैसा रोकना मजदूरों की रोटी छीनने जैसा है।
एक मजदूर नेता ने कहा—
“झारखंड की धरती शोषण बर्दाश्त नहीं करती। अगर समय पर भुगतान नहीं हुआ, तो गुवा आंदोलन की जमीन बनेगा।”
आंदोलन खत्म पर भी सतर्क — ‘वादे पर नजर रखेंगे’
मजदूरों ने आश्वासन के बाद आंदोलन रोक दिया, लेकिन कहा कि वे 7 नवंबर तक प्रबंधन की कार्रवाई पर कड़ी नजर रखेंगे।
अगर भुगतान समय पर नहीं हुआ—
- चक्का जाम
- काम बंद
- अगला चरण बड़ा आंदोलन
संदेश साफ: मजदूरों को हल्के में नहीं लें
गुवा सेल जैसे औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों की ताकत एक बार फिर दिखी है। ठेकेदारों की मनमानी और देरी पर अब मजदूर चुप नहीं बैठेंगे। एकजुटता और संघर्ष से मजदूरों ने अपना हक मनवाया है।















